भाजपा सरकार के कार्यकाल में नहीं दिया किसी मंत्री ने संपत्ति का ब्यौरा

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/20 11:42

जयपुर। भाजपा सरकार के करीब 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान किसी भी मंत्री ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। कुछ मंत्रियों ने किसी न किसी साल हालांकि कैबिनेट सचिवालय को ब्यौरा भिजवाया तो है लेकिन रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होने से ये ब्यौरे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। 

केन्द्र सरकार ने 2010 में सभी केन्द्रीय और राज्यों के मंत्रियों को अपनी सम्पत्ति की जानकारी हर वर्ष 31 अगस्त तक ब्यौरा देने के निर्देश दिए थे और ऐसा न करना जवाबदेही व पारदर्शिता अधिनियम का उल्लंघन माना जाता है। वहीं मौजूदा राज्य सरकार का कार्यकाल पूरा होने को है लेकिन राजे सरकार में मंत्री अपने पूरे कार्यकाल के दौरान इस जिम्मेदारी से पीछे हटते रहे। इस बारे में लगातार खबरें प्रसारित होने के बाद भी किसी भी मंत्री की संपत्ति का ब्यौरा कैबिनेट सचिवालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक नहींं किया गया है। इसे लेकर कैबिनेट सचिवालय ने बार बार रिमाइंडर भी जारी किए हैं। जिसके बाद भी लगातार 4 सालों तक हर साल किसी भी मंत्री ने संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। कुछ मंत्रियों ने किसी किसी साल का ब्योरा दिया है इसमें भी इन मंत्रियों ने किसी भी साल ब्योरा नहीं दिया है।

किसी भी वर्ष ब्यौरा न देने वाले कैबिनेट मंत्री

1.नंदलाल मीणा              टीएडी मंत्री
2.राजपाल सिंह शेखावत      उद्योग मंत्री
3.अजय सिंह किलक          सहकारिता मंत्री

राज्यमंत्रियों में अमराराम का नाम शामिल है।

कैबिनेट सचिवालय के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 13 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों और 6 राज्यमंत्री किसी न किसी वर्ष ब्यौरा दे चुके हैं। लेकिन इन्होंने अभी अपूर्ण सूचनाएं मुहैया कराई हैं और इसलिए इनका भी पूरा ब्यौरा उपलब्ध नहीं हैं।

कैबिनेट मंत्री
गुलाब चंद कटारिया
राजेन्द्र सिंह राठौड़
कालीचरण सराफ
प्रभुलाल सैनी
गजेन्द्र सिंह खींवसर
युनूस खान
सुरेन्द्र गोयल
डॉ. रामप्रताप
हेमसिंह भड़ाना
बाबूलाल वर्मा
अरूण चतुर्वेदी
श्रीचंद कृपलानी
जसवंत सिंह यादव

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
कृष्णेन्द्र कौर दीपा
वासुदेव देवनानी
राजकुमार रिणवा
अनिता भदेल
सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी

राज्य मंत्री 
ओटाराम देवासी
पुष्पेन्द्र सिंह
धनसिंह रावत
बंशीधर
सुशील कटारा
कमसा

यहां गौरतलब यह है कि जिन मंत्रियों ने संपत्ति का ब्योरा दे भी दिया है वह ब्यौरा अभी कैबिनेट सचिवालय की फाइलों में बंद हैं और उसे वेबसाइट पर या अन्य तरह से उजागर नहीं किया गया है। 

क्या देनी होती है जानकारी

-किसी भी मंत्री को अपने परिवार के सदस्यों की परिसम्पत्तियों, देयताओं और व्यापारिक हितों की जानकारी प्रधानमंïत्री या मुख्यमंïत्री को देनी होती है। 
-इस ब्यौरे में सभी अचल सम्पत्ति, शेयर-डिबेंचर, नकदी, आभूषण की कुल अनुमानित कीमत बतानी होती है। 
-मंत्री बनने के बाद उसे और उसकी पत्नी को व्यापार और कार्यों के प्रबंधन-स्वामित्व छोडऩे की जानकारी शामिल होती है। 

मंत्रियों की आचार संहिता के मुताबिक यदि उन्होंने अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया तो मुख्यमंत्री उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं।

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