नई दिल्ली यूक्रेन से इस स्तर पर भारतीयों, दूसरे नागरिकों को लाने का अभियान किसी अन्य देश ने नहीं चलाया- जयशंकर

यूक्रेन से इस स्तर पर भारतीयों, दूसरे नागरिकों को लाने का अभियान किसी अन्य देश ने नहीं चलाया- जयशंकर

यूक्रेन से इस स्तर पर भारतीयों, दूसरे नागरिकों को लाने का अभियान किसी अन्य देश ने नहीं चलाया- जयशंकर

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन से भारतीयों को वापस लाने के लिए चलाये गये ‘ऑपरेशन गंगा’ अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सभी अभियान अद्भुत होते हैं लेकिन युद्ध के बीच यूक्रेन से इतने बड़े स्तर पर भारतीयों और दूसरे देशों के नागरिकों को लाने का काम किसी अन्य देश ने नहीं किया. यूक्रेन से भारतीय छात्रों को लाने में देरी के बारे में कुछ विपक्षी सदस्यों के आरोपों पर विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन की उभरती स्थिति को लेकर वहां के विश्वविद्यालयों एवं प्रशासन से मिले संकेत कुल मिलाकर हमारे नागरिकों, छात्रों को दुविधा में डालने वाले थे, इसलिये काफी छात्र वहां रुके रहे. ‘ऑपरेशन गंगा’ का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि हमारा निकासी अभियान सबसे पहला था. अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि इतने बड़े स्तर पर भारतीयों और दूसरे देशों के नागरिकों को लाने का काम किसी देश ने नहीं किया. विदेश मंत्री ने लोकसभा में नियम 193 के तहत यूक्रेन की स्थिति पर हुई चर्चा में कुछ सदस्यों की टिप्पणी के संदर्भ में कहा कि अगर हमारे परामर्श (एडवाइजरी) का प्रभाव नहीं होता या भारतीय उसे गंभीरता से नहीं लेते तो यूक्रेन में संघर्ष शुरू होने से पहले हमारे 4,000 नागरिक कैसे वहां से निकलते.

उन्होंने कहा कि छात्रों को लगा होगा कि उस समय यूक्रेन छोड़कर भारत चले जायेंगे तो शिक्षा प्रभावित होगी. ऐसी भावना इसलिए आई क्योंकि अनेक विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन कक्षा की सुविधा देने से भी मना कर दिया था. जयशंकर ने कहा कि कीव के एक विश्वविद्यालय ने कहा कि हम तो ऑनलाइन सुविधा नहीं दे सकते, एक संस्थान ने कहा कि वे कुछ ही समय तक यह सुविधा दे सकते हैं और कुछ संस्थानों ने छात्रों से कहा कि स्थिति गंभीर नहीं होगी, इसलिये रुक जाओ. उन्होंने कहा कि उस समय ये खबरें भी थीं कि रूस अपने कुछ सैनिकों को वापस बुला रहा है. विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन की सरकार ने तब कहा था कि ‘‘दहशत में नहीं आएं, हम स्थिति संभाल लेंगे. उन्होंने कहा की कुल मिलाकर संकेत हमारे नागरिकों, छात्रों को दुविधा में डालने वाला था. इसलिए संघर्ष से पहले 4,000 लोग लौट आए बाकी करीब 18,000 लोग रुके रहे. जयशंकर ने कहा कि जो चुनौती ‘ऑपरेशन गंगा’ चलाने में थी, अपने 45 साल के अनुभव से विश्वास के साथ कह रहा हूं कि ऐसी चुनौती पहले कभी नहीं देखी थी. विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन के संबंध में निकासी अभियान की एक विशेषता थी कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से नजर रखी और खुद नेताओं से बात की, यूक्रेन में जहां दो जगहों पर छात्र बुरी तरह फंसे थे वहां संघर्ष विराम कराया. जयशंकर ने कहा कि सूमी और खारकीव में हालात बहुत खराब थे, प्रधानमंत्री मोदी ने खारकीव को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की थी और उसके कारण ही छात्र खारकीव से सुरक्षित क्षेत्र में जा सके.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने दोनों देशों (रूस और यूक्रेन) को समझाया कि कुछ समय के लिए सेना गोलीबारी नहीं करे और इस तरह यूक्रेन और रेडक्रास की मदद से सूमी का निकासी अभियान संपन्न हुआ. उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर दबाव डाला गया और विशेष ट्रेनें चलाई गयीं, बसों की भी व्यवस्था की गयी. विदेश मंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन गंगा’ पूरा हो चुका है, छात्र आ चुके हैं और हमें इससे कुछ सीख लेते हुए सोचना चाहिए कि साथ मिलकर क्या किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यूक्रेन से छात्रों सहित भारतीयों को वापस लाने में केवल सरकार, मंत्रालयों का ही नहीं बल्कि भारतीय समुदाय, कारोबारी जगत, यूक्रेन और उसके पड़ोसी देशों का भी योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि छात्रों ने स्वयं प्रयास किये और दूसरे छात्रों की मदद की और साहस दिखाया. निकासी अभियान के लिये देश से चार-चार मंत्रियों को भेजने के औचित्य के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि अगर हमारे मंत्री नहीं जाते तो संभवत: उन देशों की सरकारों से उस स्तर पर सहयोग नहीं मिलता. विदेश मंत्री ने कहा कि निकासी अभियान के समन्वय के लिये चार मंत्रियों के यूक्रेन के पड़ोसी देश जाने से उनका (जयशंकर का) काम आधा हुआ. सोर्स- भाषा

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