यहां डिजिटल इंडिया का नारा लगता है बेमानी, ना सड़क है और न ही बिजली-पानी

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/11/21 05:02

बूंदी| बूंदी देश के भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एक और देश को डिजिटल और आम जनता को डिजिटलाइजेशन से जोड़ने के लिए बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं| वहीं बूंदी जिले का गोलपुर गांव डिजिटल से जुड़ना तो दूर सड़क, लाइट से भी अभी तक दूर है| इस गांव में ना ही सड़क है ना ही बिजली, ना ही पीने का पानी, लोगों को मिल रहा है| काले पानी की सजा भोग रहे हैं यहां के ग्रामीण लोग|

देश के प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया की और बढ़ने की बात कह रहे है और  गांव-गांव, ढाणी-ढाणी को बिजली सड़क सहित इंटरनेट से जोड़ने की बात कर रहे है, लेकिन दूसरी और तो नजारा कुछ अलग ही है, बूंदी जिले का गोलपुर गांव आज भी सुविधाओं का मोहताज है| गांव के लोग न तो देश के प्रधान मंत्री को जानते है ना किसी नेता को और ना ही अधिकारीयो को| यह कैसी विडंबना है भारत देश की? बूंदी जिले के इस गोलपुर गांव में आज भी लोग आधुनिक सुविधा और आधुनिक युग में काले पानी की सजा पा रहे हैं| गांव में जाने के लिए ना ही कोई सड़क है ना ही कोई बिजली की सुविधा|

ग्रामीणों का कहना है कि टीवी ( टेलीविजन ) देखने के लिए कोई बिजली की व्यवस्था नहीं है, वहीं सड़क के अभाव में अब ग्रामीणों ने स्वच्छता अभियान के तहत शौचालयों निर्माण का भी विरोध कर दिया है| लोगों का कहना है कि इस काले पानी की सजा के तहत हम अगर शौचालय बना भी लेंगे तो उनका कोई महत्व नहीं है| वहीं उन्होंने बताया कि स्कूल है दो अध्यापक कार्यरत है जो भी समय पर नहीं आते है| वहीँ पूरे गांव की करीबन 300 ग्रामीण जनता जिसमें गुर्जर समुदाय और भील समुदाय के लोग रहते हैं| 15 से 20 परिवार BPL भी है| इन लोगों को  BPL सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा है| सरकार के बड़े-बड़े दावे केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार से  इन अव्यवस्थाओं और इस गांव की दुर्दशा को देख कर हर कोई सवाल खड़ा कर सकता है| प्रशासन के अधिकारी मोटी-मोटी तनख्वाह पा रहे हैं, लेकिन इस गांव का इन अधिकारियो को भी कोई अंदाजा नहीं है और जानते तक नहीं कभी यहां पर ना कोई कलेक्टर गया है ना कोई SDM ना ही कोई राजनेता, जनप्रतिनिधि| 

गोलपुर गावं बूंदी जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर हे और बीमार और गर्भवती महिलाओ को लाने के लिए सड़क के अभाव में लोग गर्भवती महिलाओं सहित कई लोगों की जान रास्ते में ही गंवा देते हैं| बीमार होने पर लोगों को चादर, साफी या चारपाई पर लेकर जाते समय कई बार मौत होने से ग्रामीणों के परिवार में मातम भी छा जाता है| अब इस गांव के लोग काला पानी की सजा नहीं भुगत रहे तो क्या हैं|  इस मामले में अब बिजली के कारण बालक रात को पढ़ाई नहीं कर पाते मोबाइल भी दो चार परिवारों में ही मिले है जो मोटरसाइकील की बैटरी से या ट्रेक्टर की बैटरी से चार्च करते है| 

प्रशासनिक अधिकारी अतिरिक्त जिला नरेश मालव से बात की गई तो उनका कहना था कि आपके द्वारा मामला जानकारी में आया है और अब इस गांव में किसी प्रशासनिक अधिकारी को भेजकर वहां पर क्या-क्या समस्याएं उनके बारे में बातचीत की जाएगी| करीबन इस वर्ष इस गांव में 7 लोगों की बीमारी के चलते मौत हो गई है, लेकिन इस गांव में सड़क होती तो शायद कोई एंबुलेंस जाती और उन मरीजों को जिला अस्पताल में पहुंच आती, लेकिन सड़क नहीं मात्र पगडंडी जिसमें सिर्फ ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल के अलावा कुछ उपयोग नहीं कर सकते, लोग पैसे वाले भी है, लेकिन कार नहीं ला सकते है| अपना जीवन यापन कैसे कर रहे हैं, वहां के लोग काफी परेशान हैं, उनका कहना है कि जब तक हमारे यहां पर सड़क और बिजली मुहैया नहीं होगी तब तक हम शौचालय भी नहीं बनाएंगे|

अगर गावं में बिजली सड़क की सुविधा पानी की सुविधा हो जाए तो ग्रामीण गोलपुर में शौचालय बनकर काम में लेने से पीछे नहीं हटेंगे और लोगों को सुविधा सहित टीवी देखने का भी मौका मिल जाएगा जानकारी भी ग्रामीणों को मिलने लगेगी| ऐसे में सरकार और प्रशासन को ऐसे इलाको में भी ध्यान देना चाहिए| 

 

 

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