VIDEO: खींवसर और मंडावा उपचुनाव में थमा प्रचार का शोर, अब होगी घर-घर दस्तक

VIDEO: खींवसर और मंडावा उपचुनाव में थमा प्रचार का शोर, अब होगी घर-घर दस्तक

VIDEO: खींवसर और मंडावा उपचुनाव में थमा प्रचार का शोर, अब होगी घर-घर दस्तक

जयपुर: खींवसर और मंडावा उपचुनाव में प्रचार का शोर आज थम गया. इसके साथ ही शुरु हो गया डोर टू डोर दस्तक देने का सिलसिला. मतदान से पहले का समय काफी अहम है. चुनावी परिणाम जो भी रहे, लेकिन चुनाव रहेगा साख का. खास बात आज दोनों ही सीटें कांग्रेस के पास नहीं है, वहीं बीजेपी एक सीट पर चुनाव लड़ रही हैं और एक सीट आरएलपी के लिये छोड़ी है. 
 
कांग्रेस राज में अब तक हुये चुनाव में सत्तारुढ़ दल को विजय मिली है. रामगढ़ का उपचुनाव कांग्रेस ने जीता था. अब उपचुनाव है खींवसर और मंडावा के.  दोनों ही उपचुनावों में कांग्रेस सरकार की साख का सवाल है. वहीं बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के सामने अग्नि परीक्षा है. पहले बात कर लेते है खींवसर की... 

खींवसर का संग्राम:
—नागौर कही जाती है जाट राजनीति की धरती
—खींवसर में पिछले चुनावों से हनुमान बेनीवाल का दबदबा रहा है
—इस बार मिर्धा परिवार ने कड़ी चुनौती दी है
—मिर्धा परिवार की एकता यहां काबिलेगौर रही
—हरेन्द्र मिर्धा के साथ खड़े रहे ज्योति मिर्धा और रिछपाल मिर्धा
—हनुमान बेनीवाल ने यहां छोटे भाई को नारायण बेनीवाल को मैदान में उतारा
—खींवसर में सर्वाधिक मतदाता जाट वर्ग से है
—खींवसर में निर्णायक वोट बैंक है राजपूत, मुस्लिम और दलित

मंडावा में कांग्रेस की उम्मीदवार फिर से रीटा चौधरी है. रामनारायण चौधरी की पुत्री रीटा चौधरी चुनावी समर में है. मुकाबला है कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आई सुशीला सीगड़ा से. दो महिला उम्मीदवारों की जंग ने मंडावा का सियासी तापमान गर्माया है. जानते है मंडावा की वुमेन जंग के बारे में... 

मंडावा का सियासी गणित:
—कांग्रेस ने मजबूत प्रत्याशी रीटा चौधरी को उतारा
—बीजेपी ने खेला कांग्रेस आयातित सुशीला पर दांव
—रीटा पिछली बार नरेन्द्र से हारी थी चुनाव
—नरेन्द्र चाहते थे पुत्र का टिकट नहीं मिला
—सुशीला पहली बार लड़ रही विधायक का चुनाव
—सुशीला को  प्रधानी का व्यापक अनुभव है 
—रीटा से उनकी पुरानी अदावत है 
—अंतिम दौर में रीटा के पक्ष में सीएम गहलोत और सचिन पायलट ने सभा की 
—वहीं सुशीला के लिये सतीश पूनिया ने ताबड़तोड़ दौरे किये, हेमा मालिनी ने प्रचार किया 
—राजेन्द्र राठौड़ ने संभाली सुशीला के प्रचार की कमान 
—रीटा चौधरी के वॉर रुम को संभाला गोविन्द सिंह डोटासरा ने
—जाट सीट पर मुस्लिम और दलित वोट निर्णायक कहे जाते है 
—राजपूत - ब्राह्मण वोटों का गणित यहां अहम है 

खास बात है कि राजस्थान की सियासत के शीर्ष नेताओं ने खींवसर और मंडावा से दूरी बनाई..पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे दोनों ही जगहों पर नजर नहीं आई. प्रादेशिक और स्थानीय क्षत्रपों के हाथों में बागडोर रही. जाहिर है परिणामों से इन्हीं नेताओं की सियासत प्रभावित होगी, लेकिन दोनों ही उपचुनाव सियासत की नई इबारत लिखेंगे. 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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