पाक ही नहीं हमारा सिस्टम भी फेल, बॉर्डर के 400 गांवों के किसानों पर पड़ रही मार

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/09/25 01:06

जैसलमेर: 27 साल बाद पाकिस्तान की तरफ से आए टिड्‌डी दल का बड़ा हमला हुआ है. इससे पहले 1992 में आई टिड्डी ने फसलों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया था. इस साल जैसलमेर-बाड़मेर के सीमावर्ती 400 गांवों में करीब 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्‌डी दलों ने कहर ढा रखा है. पाक से टिड्‌डी दलों के आने का सिलसिला इस साल 22 मई से शुरू हुआ. प्रशासन की ओर से तमाम दावे किए गए, लेकिन चार माह में ही हालात बेकाबू हो गए.

पूरे प्रदेश के संसाधन जैसलमेर में लगा दिए गए: 
पूरे प्रदेश के संसाधन जैसलमेर में लगा दिए गए, 20 टीमें नियंत्रण में जुटी रहीं, लेकिन टिड्डी दलों पर कंट्रोल नहीं हुआ। अब एक उम्मीद की किरण यह दिखी है कि हवा का रुख बदला है तो ही ये टिड्डी दल वापस पाकिस्तान की तरफ लौटेंगे. जैसलमेर में सबसे पहले बॉर्डर इलाके में ही टिड्डी दल देखने को मिले, लेकिन मानसून के बाद नमी बढ़ी तो धीरे-धीरे इनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि ये पूरे जिले में फैल गए. फिलहाल पोकरण, फतेहगढ़ व जैसलमेर के गांवों में टिड्डी दल मौजूद है. रेगिस्तानी बाड़मेर-जैसलमेर में इस बार अच्छी बारिश से फसलों की पैदावार भी अच्छी है. ऐसे में टिड्डी के हमले से सबसे ज्यादा नुकसान बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ व अन्य फसलों को पहुंच रहा है. बॉर्डर के सुंदरा, पांचला, बंधड़ा समेत कई गांवों में टिड्‌डी दल ने हमला बोला. खेतों व पेड़ों पर टिडि्डयों की चादर बिछ गई. किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट यह है की उनकी फसले तबाह हो जाएगी और वे बर्बाद हो जायेगे. टिड्डी दलों के जिले भर में फैल जाने से बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि विभाग के पास स्प्रे के लिए 20 वाहन हैं. यहां से मौके तक जाने व कंट्रोल करने में एक टीम को एक दिन से भी अधिक का समय लग रहा है. इस बीच कई अन्य सूचनाओं पर टीम समय पर नहीं पहुंच पा रही है और नुकसान की आशंका बढ़ जाती है. 

26 साल बाद अब फिर से टिड्‌डी का भारत में हमला बोला है: 
25 जून से टिड्डी ने राजस्थान के बाड़मेर जिले से प्रवेश किया था. तीन माह में बॉर्डर के सात जिलों में 1.50 लाख हैक्टेयर क्षेत्र टिड्डी फैल गई है. इन जिलों में 100 से ज्यादा टीमें टिड्‌डी नियंत्रण में लगी हुई है. इससे पूर्व 1992 में बॉर्डर इलाके में टिड्‌डी आई थी, 26 साल बाद अब फिर से टिड्‌डी का भारत में हमला बोला है. पाकिस्तान से टिड्डी के छोटे-छोटे दल बनकर हवा के साथ भारत की सीमा में घुस रहे हैं. पाकिस्तान से हवा का रुख भारत की ओर होने के कारण 10 हजार से 1 लाख टिड्डियों के दल प्रतिदिन भारत आ रहे हैं. टिड्डी दलों पर कंट्रोल करने के लिए अब तक जितने भी प्रयास हुए हैं वह सारे विफल रहे. नतीजा यह रहा है कि जिले भर में टिड्डियों का आतंक फैल गया है. इस बार बार बारिश देरी से हुई फिर भी किसानों ने 70% बुवाई की है. अब उनके सामने बड़ी चिंता टिड्डी दलों की है. करोड़ों की फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं साथ ही पशुओं के चारे की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.  

किसान खुद टिड्डी दल आने पर कीटनाशक का स्प्रे करें: 
टिडि्डयों के हमले को लेकर शुरू से विवाद यह रहा कि केन्द्र सरकार के विभाग का काम है और वह काम कर रहे हैं. वहीं राज्य सरकार की तरफ से कोई प्रयास शुरुआत में नहीं किए गए. कई बार राज्य सरकार पर यह आरोप भी लगा. आखिरकार अब राज्य सरकार ने प्रयास शुरू किए हैं और किसानों को ही कीटनाशक अनुदान पर दिया जा रहा है. एक हजार रुपए के कीटनाशक पर किसानों के खाते में 500 रुपए वापस जमा होंगे. इस योजना का उद्देश्य यह है कि किसान खुद टिड्डी दल आने पर कीटनाशक का स्प्रे करें, ताकि टीम आने में लगने वाली देरी से टिड्डी आगे नहीं बढ़ सके.   

किसानों में भारी रोष: 
जैसलमेर में टिड्डी चेतावनी संगठन के प्रभारी को लेकर किसानों में भारी रोष है. उनका कहना है कि कभी भी फोन नहीं उठाते इस मामले में उनके उच्च अधिकारियों यह मानते हैं कि कई बार शिकायत मिली है कि स्थानीय अधिकारी फोन नहीं उठाते ऐसे में जो जिम्मेदार फोन नहीं उठा रहे हैं तो समय पर टीम मौके पर कैसे भी जाएंगे. हालांकि कंट्रोल रूम है वहां पर किसानों की सूचना दर्ज की जाती है लेकिन उसमें भी शिकायत यह मिल रही है कि समय पर टीम नहीं पहुंच रही है.  

खड़ी फसलों में गाड़ी से स्प्रे नहीं हो पाता: 
कृषि विभाग के मुताबिक इन दिनों फसलें बड़ी हो गई. विभाग के पास गाड़ी से स्प्रे की सुविधा है. खड़ी फसलों में गाड़ी से स्प्रे नहीं हो पाता है. खुले खेत जहां बुवाई नहीं की हुई है वहां टिड्‌डी के बैठने का इंतजार करते है और फिर छिड़काव करते है. किसानों से कहा कि वे फसलों पर टिड्‌डी नहीं बैठने दें. इसी वजह से किसान खेतों में थाली, खाली टीन बजाकर टिड्‌डी को भगा रहे है. अक्टूबर के बाद फसलों की कटाई हो जाएगी. जब तक टिड्‌डी से फसलों को भारी नुकसान होने का अंदेशा है. वहीं इसके बाद खेतों से फसलों की कटाई होने के बाद स्प्रे के लिए भी विभाग को परेशानी नहीं आएगी. डेढ़ लाख हेक्टेयर में टिड्‌डी फैली हुई है. राज्य को हवाई स्प्रे के लिए केंद्र सरकार से मांग करनी चाहिए.  

टिड्‌डी कंट्रोल नहीं होने की बड़ी वजह: 
1. शुरुआती टिड्डी दलों ने आते ही प्रजनन किया. शुरुआती दौर में पर्याप्त संसाधन नहीं जुटाए गए. 
2. फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ प्रजनन, गोडावण की वजह से स्प्रे नहीं हुआ और टिड्डी दल बढ़ते गए. 
3. सीमावर्ती इलाकों में टीमें तैनात नहीं की गईं, जिससे पाकिस्तान से टिड्‌डी दलों के भारतीय क्षेत्र में आते ही उन पर कंट्रोल नहीं किया जा सका और हालात बेकाबू होते गए. 
4. सबसे बड़ी बात तो यह भी है कि फाका (छोटी टिडि्डयां) जो उड़ नहीं सकती है और वे तारबंदी के नीचे से होकर जैसलमेर में प्रवेश कर गईं और यहां आकर बड़ी टिड्डियों के दल में बदल गईं. नियंत्रण विभाग के लिए इन फाका दलों पर कंट्रोल करना आसान था. 
5. टिड्‌डी चेतावनी संगठन को जब भी टिड्‌डी दल आने की ग्रामीणों से सूचना मिली तो समय पर टीम वहां नहीं पहुंच पाई. 
6. हवाई स्प्रे किया जाता तो हालात काबू में होते. इधर, सरकार कह रही है कि यदि हवाई स्प्रे करते तो दूसरी तरह का नुकसान होता.   
7. टिड्डी दल इतने हो गए हैं कि उन्हें बढ़ने के लिए 40 से 45 दिन का समय मिल गया और अब टिड्डिया बन चुकी है और इन पर कंट्रोल करना मुश्किल हो गया है.  

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