जयपुर VIDEO: अब कुंभलगढ़ होगा पांचवा टाइगर रिजर्व,बाघ संरक्षण में अग्रणी राज्य बनेगा राजस्थान 

VIDEO: अब कुंभलगढ़ होगा पांचवा टाइगर रिजर्व,बाघ संरक्षण में अग्रणी राज्य बनेगा राजस्थान 

जयपुर: एक्सपर्ट कमेटी की पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद प्रदेश में कुंभलगढ़ पांच में टाइगर रिजर्व के तौर पर मंजूर किया गया है.फर्स्ट इंडिया न्यूज़ लगातार बाघों की संख्या को संतुलित करने और टेरिटोरियल फाइट को रोकने के लिए कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व के तौर पर घोषित करने की पैरवी करता रहा है.अब कुंभलगढ़ को मंजूरी मिलने के बाद एक उम्मीद जगी है कि प्रदेश में न केवल वाइल्डलाइफ टूरिज्म अपने चरम पर होगा वर्णन बाघ संरक्षण की दिशा में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो जाएगा.

पहली बार बाघों की संख्या 100 के पार पहुंची:

राजस्थान में पहली बार बाघों की संख्या 100 के पार पहुंची है.फिलहाल प्रदेश में कुल 105 बाघ हैं.रणथंभौर में क्षमता 45 से 50 बाघ की है लेकिन यहां पर बाघों की संख्या 72 पहुंच गई है.ऐसे में एक टाइगर रिज़र्व और घोषित होने की दरकार थी, जिससे देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में सबसे बड़ा टाइगर कॉरिडोर बन जायेगा और यह सम्भवतः देश का भी सबसे बड़ा टाइगर कॉरिडोर साबित होगा.फिलहाल राजस्थान में तीन टाइगर रिज़र्व हैं अलवर का सरिस्का, सवाई माधोपुर-करौली का रणथंभौर और कोटा, झालावाड़, बूंदी और चित्तौड़गढ़ का मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिज़र्व.अब बूंदी के रामगढ को भी चौथे टाइगर रिज़र्व का दर्जा मिल गया है इससे सवाई माधोपुर से चित्तौड़ तक टाइगर कनेक्टिविटी हो जाएगी.

मुकुंदरा टाइगर रिज़र्व मोनिटरिंग में लापरवाही:

वहीं अब कुंभलगढ़ टाइगर रिज़र्व बनने से उदयपुर से राजसमंद से पाली और रावली टॉडगढ़ होते हुए अजमेर और उदयपुर के रणकपुर से सिरोही की माउंट आबू वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से फिर उदयपुर के फुलवारी की नाल तक टाइगर कॉरिडोर बन जाएगा.कुंभलगढ़ रावली टॉडगढ़ के टाइगर प्रोजेक्ट पर अब सैद्धांतिक मंज़ूरी मिल चुकी है, एनटीसीए की एक्सपर्ट कमेटी नें इसका प्रस्ताव आगे प्रेषित कर दिया है.हालाँकि टीम ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की  है लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स एवं गोपनीय सूत्रों के अनुसार कुम्भलगढ़ को अब टाइगर रिज़र्व बनाए जाने में कोई कमी बेशी नहीं रह गई है .इससे पहले हाड़ौती को मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी के रूप में 2-2 टाइगर रिज़र्व की सौगात मिल चुकी है.हालांकि मुकुंदरा टाइगर रिज़र्व मोनिटरिंग में लापरवाही की वजह से फेल हो गया था, वन्यजीव एक्सपर्ट अनिल रोजर्स का कहना है कि कुम्भलगढ़ में जो वर्तमान में चुनौतियां है उनको जल्द से जल्द खत्म करना होगा ताकि इसे दूसरा मुकुंदरा बनने से बचाया  जा सके.

कुंभलगढ़ में अभी सफिशियन्ट प्रे बेस:

कुंभलगढ़ में अभी सफिशियन्ट प्रे बेस है लेकिन सांभर के साथ चीतल की संख्या खास तौर पर बढ़ानी होगी.वहीं कुम्भलगढ़ लेपर्ड प्रूफ फेंसिंग में हरबिवोर एनरिचमेंट एनक्लोजर का काम लगभग पूरा हो चुका है.इसके साथ ही इनवेसिव वीड रेडिकेशन प्रोग्राम और ग्रासलैंड मैनेजमेंट काम युद्ध स्तर पर ज़ारी है.प्रस्तावित टाइगर रिज़र्व के एरिया को जिसे अब बढ़ा कर 2053 कर दिया है थिन बेल्ट की समस्या से निजात मिलेगी.कुंभलगढ़ में पहले से पैंथर, भालू, भेड़िया, ज़रख, लोमड़ी, सांभर, चीतल, चौसिंगा मौजूद है.वहीं कुंभलगढ़ का किला यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है.कुंभलगढ़ को टाइगर रिज़र्व बनाए जानें में, विधानसभा अध्यक्ष डॉ.सीपी जोशी, राजसमंद लोकसभा सांसद एवं एनटीसीए सदस्या दिया कुमारी, राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह डूंगरपुर, व स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड सदस्य धीरेंद्र गोधा, सुनील मेहता सहित पूर्व सीसीएफ राहुल भटनागर आदि का विशेष सहयोग रहा है. स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कुंभलगढ़ को जल्द टाइगर बनाए जाने की सहमति जताई थी.वर्ष 2024 तक कुंभलगढ़ में बाघों की दहाड़ गूंजने की संभावना है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि प्रदेश में पांचवें टाइगर रिजर्व के तौर पर कुंभलगढ़ को मंजूरी मिलने से प्रदेश में वाइल्डलाइफ टूरिज्म को नए आयाम मिलेंगे.बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट रुकेगी, टाइगर्स की संख्या संतुलित की जा सकेगी बाघ और मानव के बीच संघर्ष थम जाएगा और प्रदेश बाघ संरक्षण की दिशा में अग्रणी राज्य के तौर पर शामिल हो जाएगा.

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