VIDEO: अब 'मय' और 'मयखानों' पर दोहरी नज़र, फूड सेफ्टी के दायरे में शराब कारोबार 

Vikas Sharma Published Date 2019/04/02 12:47

जयपुर। शराब को हतोत्साहित करने के लिए अब 'मय' और 'मयखानों' पर दोहरी नज़र रहेगी। शराब पर आबकारी के साथ अब चिकित्सा विभाग भी पैनी निगाह रख सकेगा फिर चाहे वो मिलावटी शराब से जुड़ा मामला हो या फिर शराब की गुणवत्ता का। ये तमाम अधिकार अब आबकारी के साथ चिकित्सा विभाग के पास भी आ गए हैं। इतना ही नहीं शराब की बोतल अब आमजन को चेतावनी देती नजर आएगी कि 'नशे की हालत में ड्राइव करना घातक हो सकता।' आखिर क्या हैं फूड सेफ्टी के नए प्रावधान और ये प्रदेश में किस तरह से शराब को हतोत्साहित करने में सहायक सिद्ध होंगे। पेश है फर्स्ट इंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट:

आबकारी विभाग राज्य सरकार को दूसरा सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला विभाग है, लेकिन चूंकि प्रदेश में शराब को हतोत्साहित करने के लिए नीति लागू है ऐसे में शराब से राजस्व के साथ ही उसके नियंत्रित इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाता है। मौजूदा हालात को देखे तो शराब पर लागू फूड सेफ्टी एक्ट नियमों के अभाव में ज्यादा प्रभावी नहीं है। जिसके चलते आबकारी विभाग ही खानापूर्ति कर लेता था, लेकिन अब एफएसएसएआई ने जो नई गाइडलाइन जारी की उसके बाद आज से राजस्थान सहित पूरे देश में शराब बतौर फूड प्रोडक्ट मानी जाएगी और उस पर चिकित्सा विभाग प्रभावी नियंत्रण के लिए कानूनी कार्रवाई कर सकेगा।

शराब होगी फूड प्रोडक्ट, तो क्या-क्या दिखेंगे बदलाव:

—शराब की बोतल पर "शराब का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है' के साथ ही "BE SAFE- DON"T DRINK AND DRIVE" भी लिखना होगा। 
—यह चेतावनी अंग्रेजी भाषा के अलावा प्रत्येक प्रदेश की स्थानीय भाषा में लिखी जानी अनिवार्य की गई है। 
—किसी भी फूड प्रोडेक्ट में अगर एल्कोहल का उपयोग किया गया है, तो लेबल पर नॉन वेजीटेरियन लोगो लगाना अनिवार्य होगा।  
—शराब का सेवन कितना करना है, जिसका भी जिक्र बोतल पर करना होगा। 
—शराब कारोबारियों को फूड लाइसेंस लेना होगा, साथ ही ब्राउन रंग का फूड सेफ्टी डिस्प्ले बोर्ड भी लगाना होगा। 
—राज्य कंट्रोल रूम 0141-2225624 का भी बोर्ड पर जिक्र जरूरी 
—शराब बोतल पर यह उल्लेख नहीं किया जा सकता है कि "इस ड्रिंक में कोई पोषक तत्व हैं"
—शराब किसी भी तरह नहीं स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है 
—0.5 प्रतिशत से ज्यादा एल्कोहल पर लिखनी होगी चेतावनी कि इस ड्रिंक से नशा होता है 
—शराब बोतल पर यह भी उल्लेख करना होगा कि किस जगह के अंगूर का मदिरा निर्माण में उपयोग किया गया है। 
—शराब दुकानों से सैम्पलिंग का काम फूड सेफ्टी ऑफिसर ही करेंगे 

राजस्थान सहित पूरे देश में भले ही आज से ये कानून लागू हो गया हो, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए अभी गाइडलाइन तय नहीं की जा सकी है। जल्द ही चिकित्सा और आबकारी विभाग के अधिकारी एक संयुक्त बैठक कर क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार करेंगे। हालांकि चिकित्सा विभाग के स्तर पर इस संबंध में विस्तृत मसौदा तैयार कर लिया गया है। इसमें वो तमाम पहलू शामिल किए गए हैं जो दोनों विभागों के बीच समन्वय के साथ ही अधिकारों के अतिक्रमण की स्थिति पैदा नहीं होने देंगे।

'सुरा' के 'सुर' हमारी संस्कृति को दागदार न कर सकें। 'मदिरा' से 'मातम' के हालात पैदा न हों...शायद यही सबकुछ सोचकर एफएसएसएआई ने शराब को फूड सेफ्टी के दायरे में लिया है...अब देखना होगा कि रेवेन्यू टारगेट के नाम पर मद्य संयम की भावना भूले आबकारी विभाग पर चिकित्सा विभाग कैस पैनी नजर रखेगा। उम्मीद है अब शराब हतोत्साहित भी होगी और राजस्व भी आएगा। लेकिन जिंदगी की कीमत पर कभी नहीं।

... सहयोगी निर्मल तिवारी के साथ विकास शर्मा की रिपोर्ट 


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