VIDEO: अब जनप्रतिनिधि की मुहर बताए बिजली की सच्चाई !

Vikas Sharma Published Date 2019/04/20 09:39

जयपुर। प्रदेश में चुनावी बयार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर जयपुर डिस्कॉम प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। गांव-ढाणियों से लेकर शहरों की बिजली आपूर्ति की सच्चाई का पता लगाने के लिए अब जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों से फीडबैक लेने का फैसला लिया गया है। डिस्कॉम अभियंताओं को रोजाना पांच-पांच लोगों के फीडबैक का लक्ष्य दिया गया है। 

राजधानी जयपुर समेत प्रदेशभर में 16 अप्रैल को आए अंधड़, तूफान और बरसात ने विद्युत तंत्र में बड़ी तबाही मचाई। अकेले जयपुर डिस्कॉम की बात की जाए तो विभिन्न जिलों में 8 पावर ट्रांसफार्मर, 489 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर व 2500 के आसपास बिजली के पोल क्षतिग्रस्त हुए। इसमें करीब पांच करोड़ से अधिक के नुकसान का आंकलन अभी तक किया जा चुका है। हालांकि, डिस्कॉम प्रशासन का दावा है कि दो दिन के अथक प्रयास के बाद सभी मुख्य लाइनों को बहाल कर दिया है, लेकिन सच्चाई ये है कि अभी भी कई ग्रामीण इलाकों में विद्युत तंत्र क्षतिग्रस्त होने से बिजली का इंतजार हो रहा है। ऐसे में चुनाव के दौरान किसी भी तरह का बिजली मुद्दा नहीं बने, इसलिए जनता का फीडबैक लेना शुरू किया गया है। जयपुर डिस्कॉम एमडी एके गुप्ता ने इसके लिए विस्तृत आदेश जारी किए है। 

फीडबैक कवायद के पीछे की मंशा -
- अंधड़-बारिश ने बिजली की रफ्तार पर लगाया बड़ा ब्रेक  
- चुनावी दंगल के बीच बिजली आपूर्ति के व्यवधान ने बढ़ाई डिस्कॉम की चिंता 
- बिजली न बने चुनावी मुद्दा, इसलिए डिस्कॉम प्रशासन हुआ अलर्ट 
- अब बिजली आपूर्ति की सच्चाई का पता लगाने के लि त्रिस्तरीय मॉनिटरिंग शुरू 
- सर्किल, जोनल और एमडी स्तर से लिया जाएगा रोजाना 5-5 लोगों का "फीडबैक"
- एमडी स्तर पर होगी फीडबैक की समीक्षा और सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट 

डिस्कॉम प्रशासन की तरफ से जारी आदेश को देखे तो सर्किल के अधीक्षण अभियंता से लेकर जोनल चीफ इंजीनियर को फीडबैक के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि,इस तरह की कवायद पहले भी होती रही है, लेकिन अभी आनन-फानन में शुरू की गई कवायद को सीधे तौर पर चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। क्योंकि पिछले दिनों की भाजपा के कई बड़े नेताओं ने सार्वजनिक मंच से बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए है। 

कौन किससे लेगा फीडबैक - 
- सर्किल के अधीक्षण अभियंता रोजाना एसडीएम और अन्य सरकारी अधिकारियों से फीडबैक लेकर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे 
- जबकि जोनल मुख्य अभियंता कलक्टर और संभागीय आयुक्त से बिजली आपूर्ति की जानकारी लेकर मुख्यालय तक भेजेंगे
- इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति की मॉनिटरिंग भी मुख्यालय स्तर से शुरू की गई है। 
- इसके लिए फील्ड अभियंताओं को रोजाना 11 बजे एमडी सेल में रिपोर्ट देने निर्देश दिए गए है। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा है कि प्रदेश में गांव से लेकर शहरों तक लोगों को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति मिले। इस मंशा को धरातल पर उतारने के लिए जयपुर डिस्कॉम प्रशासन युद्ध स्तर पर फील्ड में जुटा हुआ है। अब देखना ये है कि डिस्कॉम प्रशासन अपनी कवायद में कितना सफल हो पाता है। 

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