राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की कमी से बढ़ रहा मुकदमों का अंबार, विधानसभा में भी उठा मुद्दा 

Nizam Kantaliya Published Date 2019/07/23 05:10

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट में सेवानिवृति और तबादले के बाद जजों की संख्या आधे से भी कम रह गई है. हाईकोर्ट में नए जजों की नियुक्ति में जितनी देरी हो रही है, उतनी ही देरी हाईकोर्ट में लंबित पक्षकारों को उनके केसों में न्याय मिलने में हो रही है. जजों की कमी को लेकर अब विधानसभा में आवाज उठी है. विधायक सयंम लोढा ने जजो की कमी का मुद्दा उठाया है. पेश है एक रिपोर्ट: 

जजों की कमी का मुद्दा विधानसभा में: 
—विधायक संयम लोढा ने जजों की नियुक्ति को लेकर किया सवाल
—क्यों नहीं हो रही राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति 
—डीजे कैडर के 11 में से सिर्फ 2 डीजे की नियुक्ति पर चर्चा
—जस्टिस वी एस सिराधना की सेवानिवृति पर भी हुई चर्चा 
—जजों के स्वीकृत 50 पदों पर कार्यरत है अब सिर्फ 23 जज
—जजों की लगातार कमी से बढ रही है केसो की पेडेंसी 
—एनजेडीजी के अनुसार 4 लाख 29 हजार 614 केस पेंडिंग
—1 जज पर 18 हजार 678 से भी ज्यादा केसों का भार 
—जजों की कमी का सुनवाई पर दिखने लगा सीधा असर
—जयपुर हाईकोर्ट पीठ में है 2 लाख 58 हजार 79 केस पेडिंग
—वहीं जोधपुर हाईकोर्ट में 1 लाख 71 हजार 535 केस पेडिंग
—पिछले एक साल में ही 1 लाख 66 हजार 176 से अधिक केस पेडिंग
—प्रतिमाह निस्तारित केसों की संख्या में भी आई भारी कमी

जजों की कमी से जूझ रहे राजस्थान हाईकोर्ट में अब जजों की संख्या घटकर 23 हो गई है. जस्टिस वी एस सिराधना के रिटायरमेंट से एक ओर पद रिक्त हो गया है. जून 2018 में राजस्थान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को कुल 20 नाम भेजे थे, लेकिन अब तक उनमें से सिर्फ 2 डीजे ही जज नियुक्त हुए हैं. हाईकोर्ट बार एसोएशन देश के मुख्य न्यायाधीश को भी पत्र लिख चुकी है. वहीं अब इस मामले को विधायक संयम लोढा ने भी विधानसभा में उठाया है.

राजस्थान हाईकोर्ट में नियुक्ति का क्रम:
—अक्टूबर 2014 में बढायी गये थे जजो के स्वीकृत पद 
—40 से बढाकर किये गये थे 50 हाईकोर्ट जजो के पद
—लेकिन पाच साल बाद भी कभी भी नही भरे गये पद
—जनवरी 2015 में हुई थी 6 नए जजो की नियुक्ति 
—6 अप्रैल 2016 को राजस्थान को मिले 7 नए जज 
—नवंबर 2016 तक सीजे सहित 30 जज थे कार्यरत
—नवंबर 2017 में हाईकोर्ट जजों की संख्या हुई 34
—12 मई 2018 को 5 जजो की नियुक्ति के बाद हुई 39
—मई 2018 से जुलाई 2019 तक 13 जज हुए सेवानिवृत
—वही 5 जजो का अन्य हाईकोर्ट में हो चुका है तबादला
—वर्तमान में 50 पदो में से मात्र 23 जज है कार्यरत 

2014 में जजों के स्वीकृत पद बढाकर 40 से 50:
राजस्थान हाईकोर्ट में अक्टूबर 2014 में जजों के स्वीकृत पद बढाकर 40 से 50 कर दिये गये थे, लेकिन इन पदों पर कभी भी पूरी तरह से नियुक्ति नहीं की जा सकी. मई 2018 को जजों की संख्या जरूर 39 हो गई थी. इससे मामलों के निस्तारण में भी तेजी देखने को मिली, लेकिन डेढ वर्ष में ही जजों की संख्या घटते-घटते 23 पर आ गई है. 

राजस्थान से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजे थे 20 नाम:
—11 न्यायिक अधिकारियों के साथ 9 अधिवकताओं के नाम
—जून 2018 के अंतिम सप्ताह में भेजे गये थे ये नाम
—न्यायिक अधिकारियों में से सिर्फ दो डीजे की हुई नियुक्ति
—जस्टिस एन एस ढड्डा और जस्टिस अभय चतुर्वेदी की हुई नियुक्ति
—अब अधिवक्ता कोटे के 9 नाम को लेकर है बड़ा इंतजार 
—एडवोकेट संजय झवर, अनिता अग्रवाल, अश्विन गर्ग
—अनुराग शर्मा, महेन्द्र गोयल, फरजंद अली, सचिन आचार्य
—मनीष सिसोदिया और राजेश पुरोहित के भेजे गये थे नाम 
—एक वर्ष बाद भी प्रदेश को है इनकी नियुक्ति का इंतजार

एक जज को दो से तीन जजों का रोस्टर:
जजों की नियुक्ति के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट शुरू से ही अपेक्षित सा रहा है. हालात ये है कि अब एक—एक जज को दो से तीन जजों का रोस्टर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान से जुड़े 2—2 जजों की मौजूदगी के बावजूद नए जजों की नियुक्ति नहीं हो पाना एक बड़ा विषय है. जजों की नियुक्ति नहीं होने से पक्षकारों को मिलने वाले न्याय में देरी हो रही है, तो वहीं बढते भार के चलते जज और अधिवक्ताओं के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं. बुधवार 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में कॉलेजियम होने की चर्चाएं है, जिससे राजस्थान को नए जज मिलने की बड़ी उम्मीदें है.

... संवाददाता निजाम कण्टालिया की रिपोर्ट 

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