VIDEO: रणथंभौर में बढ़ी बाघों की संख्या, 50 की जगह 66 बाघ, बढ़ रही टेरिटोरियल फाइट

VIDEO: रणथंभौर में बढ़ी बाघों की संख्या, 50 की जगह 66 बाघ, बढ़ रही टेरिटोरियल फाइट

जयपुर: रणथंभौर अब बाघों के लिए छोटा पड़ने लगा है. पहली बार ऐसा हुआ है कि रणथंभौर में व्यस्क बाघों की संख्या 50 के पार पहुंच गई है. यही कारण है कि बाघों के बीच अपना इलाका बनाने के लिए संघर्ष बढ़ता जा रहा है. आधा दर्जन से अधिक नर बाघ टाइगर रिजर्व की पैरा फेरी पर घूम रहे हैं तो कुछ बाघों को रामगढ़ या करौली धौलपुर की ओर पलायन करना पड़ा है. जल्द ही नया टाइगर रिजर्व तैयार नहीं किया गया तो बाघों की जान को खतरे के साथ ही बाघ और इंसान के बीच का संघर्ष भी बढ़ सकता है. 

रणथंभौर में बाघों की संख्या:

एडल्ट मेल    

20

फीमेल  

32

सब एडल्ट/कब्स  

14

कुल  

66

रामगढ़ विषधारी :

टी 115

धौलपुर :

मेल

टी 116

फीमेल

टी 117

शावक

2

कुल

4

करौली : 

मेल

टी 72

मेल

टी 80

फीमेल

टी 118

शावक

2

कुल

5

टी 62 और 92 मिसिंग :

करीब 1411.291 वर्ग किमी क्षेते मैं पहले रणथंबोर टाइगर रिजर्व में कभी भी नर बाघों की संख्या 18 से ऊपर नहीं पहुंची. पहली बार ऐसा हुआ है कि यहां नर बाघों की संख्या 20 पहुंच गई है. ऐसे में बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट बढ़ती जा रही है जिसकी वजह से बाघ, बाघिन और शावक अपनी जिंदगी गवा रहे हैं. रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अधिकतम 50 बाघ ही रह सकते हैं. यहां 20 नर और 32 मादा बाघ और 14 सबएडल्ट और शावक हैं. छोटा पड़ता जंगल इन बातों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. इस बात की तत्काल जरूरत है कि प्रदेश में नए टाइगर रिजर्व घोषित कर रणथंभौर से बाघों को वहां शिफ्ट किया जाए.

टेरिटोरियल फाइट से बचने के लिए बाघ टी 115 पहुंच चुका है रामगढ़ विषधारी:

रामगढ़ विषधारी और कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व बनाने के प्रस्ताव एनटीसीए को भेजे जा चुके हैं. लगभग बाघ विहीन हो चुके मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में भी तत्काल बाघ शिफ्ट करने की जरूरत है, जो वहां बची एकमात्र बाघिन एमटी 4 के साथ जोड़ा बना सके. रामगढ़ विषधारी में तो फिलहाल टेरिटोरियल फाइट से बचने के लिए बाघ टी 115 पहुंच चुका है. धौलपुर में भी एक मेल और एक फीमेल तथा दो शावकों सहित चार बाघ हैं. करौली में दो मेल एक फीमेल और दो शावकों सहित कुल 5 बाघ हैं. टी 62 और टी 92 मिसिंग चल रहे हैं ऐसे में धौलपुर से लेकर मुकंदरा तक के कॉरिडोर में फ़िलहाल 76 बाघ हैं. सरिस्का में बाघों की संख्या 23 है इसका मतलब प्रदेश में लगभग 100 बाघ हैं. हालांकि अभी प्रदेश में कोरोना के चलते लॉक डाउन है लेकिन जल्द ही एनटीसीए को प्रदेश में नए टाइगर रिजर्व को लेकर फैसला करना होगा अन्यथा बाघों के जीवन पर खतरा बढ़ जाएगा.

नए टाइगर रिजर्व को लेकर वन विभाग कर रहा है प्रयास:

बाघों की संख्या और नए टाइगर रिजर्व को लेकर वन विभाग प्रयास कर रहा है लेकिन वह कितना रंग लाएंगे यह देखना होगा. दरअसल कुंभलगढ़ भी टाइगर रिजर्व की दौड़ में शामिल है लेकिन रामगढ़ विषधारी में टाइगर का मूवमेंट उसके दावे को मजबूत कर रहा है. वन विभाग के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन मोहन लाल मीणा ने बताया कि उन्होंने रामगढ़ विषधारी को चौथे टाइगर रिजर्व के टूर पर अधिसूचित करने के लिए प्रस्ताव भेज दिया है. अब जल्द ही एनटीसीए के स्तर पर इस प्रस्ताव के अनुमोदन के बाद केंद्र द्वारा चौथे टाइगर रिजर्व की घोषणा की जा सकती है. वैसे भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रामगढ़ विषधारी को टाइगर रिजर्व बनाने की दिशा में प्रयास करते रहे हैं.

रामगढ़ विषधारी तक बाघों का मूवमेंट:

रणथंभौर से जुड़े होने के कारण रामगढ़ विषधारी तक बाघों का मूवमेंट होता रहा है. अब रामगढ़ विषधारी को टाइगर रिजर्व के तौर पर अधिसूचित करने के बाद यहां पर जल्द ही बाघों को बताया जाएगा वैसे भी रणथंभौर में बाघों की बढ़ती संख्या और इसकी वजह से बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट को रोकने के लिए रणथंभौर से अतिरिक्त बाघों को रामगढ़ विषधारी में शिफ्ट किया जा सकता है. जल्द ही एनटीसीए की टीम रामगढ़ विषधारी का दौरा कर वन विभाग द्वारा भेजे प्रस्ताव का अनुमोदन कर सकती है. इसके बाद केंद्र द्वारा इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी.

टाइगर रिजर्व मुकंदरा में भी बाघों के पुनर्वास की कर चुका है योजना तैयार:

वन विभाग हाडोती के पहले टाइगर रिजर्व मुकंदरा में भी बाघों के पुनर्वास की योजना तैयार कर चुका है. पिछले दिनों प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन मोहन लाल मीणा ने एनटीसीए को पत्र लिखकर मुकंदरा टीम भेजने को कहा है ताकि एनटीसीए की टीम मुकंदरा के हालात का जायजा लेने के बाद वहां बाघ पुनर्वास योजना को शुरू करने के लिए मंजूरी दे. दरअसल मुकुंदरा में पिछले वर्ष तक बाघों की संख्या 7 तक पहुंच गई थी लेकिन अलग-अलग कारणों से बाघों की मौत के बाद मुकंदरा लगभग बाघ विहीन हो चुका है. यहां एकमात्र बाघिन mt4 बची है जो चिकित्सकों की देखरेख में स्वास्थ्य लाभ ले रही है. वन विभाग चाहता है कि मध्य प्रदेश या महाराष्ट्र से एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत बाघ का एक जोड़ा मुकंदरा लाया जाए साथ ही रणथंभौर से भी एक जोड़ा बाद यहां लाए जाने की योजना है. एनटीसीए की मंजूरी मिली तो मानसून के बाद मुकंदरा में बाघ शिफ्टिंग की जा सकती है.

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