VIDEO: नाहरगढ़ और आमेर किले में बढ़ी सैलानियों की संख्या, वॉच टावर और वाटर पॉइंट पर बघेरों की चलकदमी से डर रहे लोग

VIDEO: नाहरगढ़ और आमेर किले में बढ़ी सैलानियों की संख्या, वॉच टावर और वाटर पॉइंट पर बघेरों की चलकदमी से डर रहे लोग

जयपुर: अब कोरोना का संक्रमण घटते ही नाहरगढ़ किले और आमेर किले पर सैलानियों की आवाजाही बढ़ गई है,वहीं दूसरी ओर यहां इन दिनों बघेरो की चहलकदमी भी बढ़ गई है, बघेरे वॉच टावर, वाटर पॉइंट पर लगातार देखे जा रहे है, ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. 

नाहरगढ़ वन अभयारण्य क्षेत्र में करीबन 20 से ज्यादा बघेरे प्रवास कर रहे है, हाल हीं में कई जगह शावक भी नजर आ रहे है, जैसे आमेर के वॉच टावर पर शावकों के साथ तो कभी जोडे के साथ बघेरों की चहल कदमी देखी जा रही है, ऐसे में साफ है यहां लगातार इनकी संख्या भी बढ़ रही है, इनमें शामिल चार-पांच बघेरे नाहरगढ़ किले के बाउंड्री में ही रहते है और वे पहले कभी कभार ही दिखते थे, लेकिन यहां पर लॉकडाउन के दौरान लोगों की आवाजाही घटी तो, वे किले के आसपास दिन में भी घूमते दिखे है, इन दिनों वॉच टावर के आसपास एक बघेरा का जोड़ा लगातार दिख रहा है, कई बार सैलानियों ने उनके वीडियो बनाकर भी सोशल साइट्स पर अपलोड किए है, नाहरगढ-आमेर किले पर लगातार इनकी बढ़ रही चहलकदमी लोगों के लिए महंगी साबित हो सकती है, 

नाहरगढ़ किले की सैर महंगी पड़ सकती है
क्योंकि किले पर अलसुबह से देर शाम तक लोगों की आवाजाही बरकरार रहती है, कई लोग बच्चों के साथ यहां दौड़ते भी नजर आते है तो कई पहाड़ियों पर चढ़ते भी दिखते है, अल सुबह लोग मॉर्निंग वॉक के लिए नाहरगढ रोड और आमेर रोड मावठा पर दौडते देखे जा सकते है, ऐसे में कभी भी बघेरे और मानव के आमना सामना हो सकता है, जिससे कभी भी बड़ी घटना हो सकती है, नाहरगढ़ किले की सैर महंगी पड़ सकती है, वन अधिकारी का कहना है कि मानव ने इनके तमाम जगहों पर कब्जा कर रहा है अब लोग इनके वन क्षेत्रों में घूस रहे है मॉर्निंग वॉक हो या भ्रमण के लिए जा रहे, पहले आदिमानव इन जानवरों के साथ रहते था, अब एक वक्त फिर से आ रहा है इन जानवरों के साथ रहना होगा,

भविष्य में वनों और वन्यजीवों का संरक्षण दिखाई देगा
वन विभाग लगातार वनों की रक्षा और वन्यजीवों की रक्षा के लिए प्रयासरत है लेकिन अब वन विभाग के साथ आमजन का भी कर्तव्य बनता है, धीरे धीरे नाहरगढ और आमागढ वन क्षेत्रों का संरक्षण सहित आने वाले 10 साल में प्रदेशभर के जंगलों का संरक्षण बेहतर होगा, वनों का संरक्षण इस लिए नहीं किया जा रहा कि पर्यटन बढे,संरक्षण इसलिए किया जा रहा है कि वनो, वन्यजीवों और जैव विविधता का संरक्षण हो, संरक्षण पर ही मानव का अस्तिव है, भविष्य में वनों और वन्यजीवों का संरक्षण दिखाई देगा, इन दिनों थोडी़ ज्यादा साइटिंग हो रही है, इस वजह से लोग जंगल में न जाए इसको लेकर सख्ती बरत रहे है, किले पर भी मॉनिटरिंग कर रहे है, ताकि कोई अनहोनी न हों, साथ ही जंगल में घुसने पर जुर्माना भी कर रहे है, नाहरगढ़ अभयारण्य वन क्षेत्र में बघेरे के अलावा सियार, लोमड़ी समेत कई अन्य प्रजातियों के वन्यजीव प्रवास करते है, विभाग ने इनकी भोजन को लेकर इंतजाम किए, किले के वाटर पाइंट बने है तो, कई जगह लोग पानी की कुंडी रखे हुए है, जहां इन वन्यजीवों को पानी मिल जाता है, साथ ही आबादी के समीप होने से प्रेबेस (भोजन) भी मिल जाता है,
 

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