जयपुर VIDEO: पट्टे देने के रास्ते में आ रही अड़चनें होंगी जल्द दूर, राज्य सरकार निकायों को जारी करेगी मार्गदर्शन, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: पट्टे देने के रास्ते में आ रही अड़चनें होंगी जल्द दूर, राज्य सरकार निकायों को जारी करेगी मार्गदर्शन, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: प्रशासन शहरों के संग अभियान में बेवजह कोई भी भूखंडधारी पट्टे से महरूम नहीं रहे हैं, इसके लिए प्रदेश की अशाेक गहलोत सरकार लगातार प्रयास कर रही है. विभिन्न कारणों के चलते निकायों में पट्टों के अटके मामलों के निस्तारण के लिए जल्द ही सरकार कदम उठाएगी. पिछले वर्ष 2 अक्टूबर से चल रहे अभियान के तय कार्यक्रम के तहत नए साल में एक जनवरी से जिला स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन हुआ. इसके लिए जयपुर मुख्यालय के अधिकारियों के अलग-अलग दल बनाए गए थे. 

इन कार्यशालाओं का उद्देश्य निकायों के अभियान के कामकाज की समीक्षा करना और पट्टे देने में आ रही समस्याओं की जानकारी लेना था. इन कार्यशालाओं में सामने आया कि विभिन्न कारणों के चलते निकायों में पट्टे देने के बड़ी संख्या में प्रकरण अटके हुए हैं. आपको सबसे पहले बताते हैं निकायों में पट्टे नहीं देने के क्या कारण प्रमुख तौर पर सामने आए हैं.

यू अटका रहे हैं पट्टा:
-शहरों की पुरानी आबादी क्षेत्र में पट्टा देने के लिए संपत्ति पर कब्जे के तौर पर 31 दिसंबर 2018 के पहले के दस्तावेज मान्य हैं.

-कोई संपत्ति अगर इस तिथि के बाद बिकी है तो निकाय ऐसी संपत्ति का पट्टा जारी नहीं कर रहे हैं.

-इसके पीछे कई निकाय अधिकारियों का तर्क है खरीद-बेचान की रजिस्ट्री 31 दिसंबर 2018 के बाद की है.

-कृषि भूमि जो बाद में आबादी भूमि होने के कारण सिवायचक में दर्ज हो गई,उसका नियमन कई निकायों ने अटका दिया है.

-निकायों का तर्क है कि भूमि सिवायचक होने के कारण पट्टा नहीं दे सकते.

-जिन जमीनों का कभी नगर सुधार न्यास अधिनियम की धारा 32 के तहत अधिसूचना जारी हुई थी.

-लेकिन बाद में निकायों ने आगे कोई कार्यवाही नहीं की,ऐसी जमीनों को अपनी योजना बताकर नियमन को लेकर निकाय आनाकानी कर रहे हैं.

पट्टा नहीं देने के सामने आए इन कारणों को खत्म करने के लिए सरकार जल्द ही निकायों का विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करेगी. इसके लिए नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग के अधिकारी मंथन कर रहे हैं. आपको बताते है कि इन तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार क्या हल निकालेगी.

 

नियमन की राह के रोड़े यू हटाए जाएंगे:

-सरकार स्पष्ट करेगी कि 31 दिसंबर 2018 की कट ऑफ डेट संपत्ति के रहवास अथवा उसके उपयोग की है.

-रहवास और कब्जे के सबूत के तौर पर आवेदक जो दस्तावेज पेश करेगा वे इस कट ऑफ डेट तक के होने चाहिए.

-इस कट ऑफ डेट के बाद की तिथि में रजिस्ट्री के माध्यम से संपत्ति का बेचान हुआ है तो खरीदार को पट्टा दिया जा सकता है.

-कोई भूमि पहले कृषि भूमि थी लेकिन सेटलमेंट विभाग ने उसे आबादी भूमि मानी और वह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में सिवायचक दर्ज है.

-तो ऐसी भूमि का पट्टा जारी किया जा सकता है,क्योंकि भूमि मूलत: कृषि भूमि है जो कि राजस्व रिकॉर्ड में खातेदारी में दर्ज थी.

-किसी भूमि का पहले नगर सुधार न्यास अधिनियम की धारा 32 के तहत अधिसूचना जारी हुई है.

-लेकिन अधिसूचना जारी होने के बाद निकाय ने आगे कोई कार्यवाही नहीं की और वह अधिसूचना लैप्स हो गई.

-तो ऐसी जमीनों के भी प्रशासन शहरों के संग अभियान में पट्टे जारी किए जा सकते हैं.

इन तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए जल्द ही राज्य सरकार की ओर से मार्गदर्शन जारी किया जाएगा. इसके बाद उम्मीद है कि पट्टे के लिए इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिलेगी.

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