VIDEO: राजस्थान रोडवेज को घाटे से उबारने के नाम पर नए खर्चे बढ़ा रहे अधिकारी 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/20 09:30

जयपुर: राजस्थान रोडवेज एक तरफ आर्थिक संकट से जूझ रहा है. वहीं रोडवेज के अधिकारियों का एक समूह घाटे से उबारने के नाम पर नए खर्चे बढ़ा रहा है. रोडवेज प्रशासन ने हाल ही में जोनल प्रबंधकों की एक नई व्यवस्था लागू की है. क्या कारगर होगी यह व्यवस्था या फिर साबित होगी रोडवेज के लिए घाटा बढ़ाने का एक और साधन, फर्स्ट इंडिया न्यूज की खास रिपोर्ट:

नए जोनल प्रभारी लगाने के साथ रोडवेज में नई हलचल:
12 अप्रैल 2019 को राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने नए आदेश जारी किए हैं. रोडवेज में मॉनीटरिंग व्यवस्था को मजबूत करने और संसाधनों का समुचित उपयोग करवाने के नाम पर एक नई व्यवस्था शुरू की गई है. रोडवेज में आठ नए जोनल प्रबंधक या जोन प्रभारी लगाए गए हैं. इससे पहले 6 से 8 मार्च 2019 को आदेश जारी कर मुख्यालय के कुछ अधिकारियों को विभिन्न डिपो की कार्य व्यवस्था को सुधारने के निर्देश दिए थे. इन निर्देशों में कहा गया था कि सम्बंधित इकाई प्रभारी रोडवेज की वित्तीय स्थिति को सुधारने का काम करेंगे. वाहनों की मरम्मत का कार्य, संचालन व्यवस्था में सुधार करेंगे. साथ ही डिपो के मुख्य प्रबंधकों और कार्यशालाओं के मुख्य उत्पादन प्रबंधकों और उनके अधीनस्थ स्टाफ की मॉनीटरिंग का कार्य करेंगे. अब इन्हें इकाई प्रभारी से इतर जोनल प्रबंधक का नाम दिया गया है. जोनल प्रबंधकों की पद व्यवस्था रोडवेज के लिए फायदे का सौदा होगी या नहीं, लेकिन इससे रोडवेज का खर्चा बढ़ने की शुरुआत हो गई है. जोनल प्रबंधकों के लिए स्टाफ लगाने से लेकर संसाधन जुटाने के नाम पर रोडवेज का खर्चा बढ़ाने की शुरुआत हो गई है.

आय बढ़ाएंगे या पहले घाटा बढ़ाएंगे ?
—जोनल प्रबंधकों के लिए खरीदी जाएंगी नई बोलेरो गाड़ियां
—20 नई बोलेरो गाड़ियों की होगी खरीद
—एक बोलेरो कार करीब 10 से 11 लाख की
—यानी रोडवेज प्रशासन पर आएगा करीब 2 करोड़ रुपए का खर्चा
—जोन प्रभारियों को अलग से स्टाफ भी उपलब्ध कराया जाएगा
—कार्यकारी निदेशक प्रशासन जल्द ही अलग से स्टाफ उपलब्ध करवाएंगे

त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू:
जोनल प्रबंधकों के पद गठन के साथ रोडवेज में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू हो गई है. मुख्य प्रबंधक अब जोनल प्रबंधकों को रिपोर्ट करेंगे, जो कि कार्यकारी निदेशक यातायात या प्रशासनिक अधिकारियों को रिपोर्ट करेंगे. इसके बाद कार्यकारी निदेशक रोडवेज के प्रबंध निदेशक को रिपोर्ट करेंगे. इससे पहले वर्ष 2013 तक भी रोडवेज में जोनल प्रबंधक की व्यवस्था लागू थी, लेकिन तब इस व्यवस्था को गैरजरूरी मानते हुए पदनाम खत्म कर दिए गए थे. तब भी सभी 7 संभागों और सीकर के लिए जोनल प्रबंधक के पद थे. 

हर साल बढ़ रहा रोडवेज का घाटा:
—4220 करोड़ रुपए का घाटा रोडवेज को हुआ पिछले 10 वर्ष में
—पिछले वित्त वर्ष में 2229.64 करोड़ रुपए की आय हुई रोडवेज की
—2247.47 करोड़ रुपए का खर्चा हुआ पिछले वित्त वर्ष में
—17.83 करोड़ रुपए का घाटा हुआ वर्ष 2018-19 में
—रोडवेज का अब तक का कुल घाटा करीब 4850 करोड़ रुपए

अब जबकि नए सिरे से 5 साल बाद रोडवेज प्रशासन ने जोनल प्रबंधक की व्यवस्था को नए सिरे से शुरू कर दिया है, देखने वाली बात होगी कि आगामी समय में इसके कितने सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं. हालांकि नई व्यवस्था से शुरुआत में ही 2 करोड़ से ज्यादा खर्चा रोडवेज प्रशासन को भुगतना होगा. 

... संवाददाता काशीराम चौधरी की रिपोर्ट  

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