VIDEO: ओम प्रकाश माथुर का चुनावी टास्क, गुजरात के बाद मध्यप्रदेश में संभाला मोर्चा 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/15 06:36

जयपुर: राजस्थान के दिग्गज ओम प्रकाश माथुर इन दिनों चुनावी टास्क पर हैं. गुजरात के बाद उन्होंने मोर्चा संभाला मध्यप्रदेश में. दोनों ही जगहों पर चुनावी रणनीति बनाने का कार्य उन्होंने किया. गुजरात में फिर से इतिहास कायम करने का दावा माथुर ने किया है. देखते है खास रिपोर्ट:

गुजरात और मध्यप्रदेश दोनों सूबे ओम प्रकाश माथुर के लिये नये नहीं है. दोनों ही राज्यों में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी के नाते ओम प्रकाश माथुर पहले भी सियासी चातुर्य का लोहा मनवा चुके है. पहले बात करते है गुजरात की.. 

गुजरात और ओम माथुर:
गुजरात तो बीजेपी के अभेद्य सियासी दुर्गो में गिना जाता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विश्वस्तों में शुमार माथुर पर एक बार बीजेपी आलाकमान ने भरोसा जताया और उन्हें गुजरात में चुनावी टास्क सौंपा. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने माथुर पर विश्वास जताया. माथुर ने इस बार गुजरात में कमजोर कड़ी पर फोकस किया. माथुर ने कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों के लिये माइक्रो बूथ मैनेजमेंट की रणनीति बनाई. इतना ही नहीं ओम माथुर ने आदिवासी, दलित वोटों को प्राप्त करने के लिये कांग्रेस के दिग्गज क्षत्रपों को बीजेपी में लाने की रणनीति पर भी काम किया. नाराज पाटीदार वोटों को साथ लेने के लिये माथुर ने काम किया. माथुर के लिये गुजरात की सियासी जमीन नई नहीं है. यहां पर पहले भी माथुर विजयी पताका फहरा चुके है. उन्होंने पहले मोदी के चुनाव भी संभाले है तो इस बार शाह के चुनाव की रणनीति बनाने वाली कोर टीम में भी शुमार रहे. माथुर की सियासी उपलब्धियों के बारे में आपको बताते है. 

ओम प्रकाश माथुर:
—राजस्थान से राज्यसभा सांसद व बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष 
—गुजरात के प्रभारी
—यूपी में अपनी क्षमताओं का लोहा मनवा चुके
—इस बार गुजरात में चुनावी कमान रही हाथों में
—महाराष्ट्र,गुजरात,एमपी में पहले भी सियासी लोहा मनवा चुके
—पहले भी लंबे समय तक मोदी के राज्य गुजरात के प्रभारी रह चुके
—मोदी के साथ लंबे समय तक संघ में प्रचारक रहे
—नरेन्द्र मोदी के भरोसेमंद चेहरों में गिनती

मध्यप्रदेश और ओम माथुर: 
मध्यप्रदेश की सियासी जमीन पर पहले भी ओम माथुर अपनी चुनावी क्षमताओं का लोहा मनवा चुके है. ओम प्रकाश माथुर ने मध्यप्रदेश में उस जमाने में रणनीतिक जिम्मेदारी संभाली जब उमा भारती जैसी दिग्गज नेता की तूती बोला करती थी. मौजूदा लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी आलाकमान ने माथुर को कुछ चुनौतीपूर्ण टास्क एमपी से जुड़े सौंपे. चुनौती इसलिये भी अहम रही, क्योंकि इस बार एमपी में राज कांग्रेस पार्टी का है और माथुर को जूझना पड़ा कमलनाथ के चुनावी चातुर्य से. माथुर आज पार्टी के अग्रिम पंक्ति के नेताओं में शुमार है. उनकी चुनावी रणनीतिक क्षमताओं का जब भी पार्टी ने उपयोग किया तब पार्टी को लाभ ही मिला.यह भी दिलचस्प है कि माथुर अपने राज्य राजस्थान में जितने चर्चित है उतने ही चर्चित माने जाते है महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात में. इस बार माथुर का पूरी तरह चुनावी फोकस रहा नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य गुजरात पर. साथ ही उन्होंने एमपी में चुनावी टास्क को संभाला. व्यस्त समय के बीच उन्होंने राजस्थान में चुनाव प्रचार किया और पार्टी के लिये चुनावी दौरे किये, पीएम मोदी की सभाओं में मौजूदगी रही. अब परिणाम तय करेंगे कि कितनी सफलता यहां माथुर की रणनीति को मिली. आखिर वो यूं ही बीजेपी के चाणक्य नहीं कहे जाते. 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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