धुलंडी के दिन रंग नहीं खेलकर अध्यात्म के ख्याल में सरोबार होता है शाहपुरा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/21 10:42

शाहपुरा(भीलवाड़ा)। शाहपुरा के वाशिंदो ने पिछले लगभग ढाई सो सालों के इतिहास में धुलंडी पर कभी भी रंग नहीं खेला है। जब पूरा देश प्रदेश होली के सतरंगे रंगो में सरोबार होता है तब शाहपुरा के वाशिंदे रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक महाप्रभु श्री रामचरणजी महाराज की अणभैवाणी की शोभायात्रा निकाल रहे होते है। धुलंडी के दिन से ही शाहपुरा स्थित रामनिवास धाम में रामस्नेही संप्रदाय का वार्षिक फूलडोल महोत्सव का शुभारंभ होता है। जो मुख्य रूप से पांच दिन का होकर पंचमी तक चलता है। 

भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा में आज धुलंडी के दिन से रामस्नेही संप्रदाय के वार्षिक फूलडोल के मुख्य महोत्सव का आगाज हो गया है। महोत्सव का आगाज करते हुए बुधवार रात्रि में होली दहन के तुंरत बाद नया बाजार से जगतगुरू स्वामी रामदयाल जी महाराज की शोभायात्रा निकाली गयी। रास्ते में रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्य रामदयाल महाराज को राजशाही पंरपरा के अनुरूप रामस्नेही संप्रदाय लाया गया। रास्ते में उनके लिए पगमंडे बिछाये गये तथा लोगों ने जगह जगह उनकी अगवानी कर स्वागत किया। शोभायात्रा के रामनिवास धाम पर पंहुचने पर यहां जगतगुरू रामदयाल महाराज के प्रवचन हुए। महोत्सव के पहले दिन आज देश के कोने कोने से हजारों की तादाद में भक्तजन व रामस्नेही संत यहां पंहुचे। आचार्यश्री के साथ संप्रदाय के अन्य संत भी थे। रामनिवास धाम में रात भर जागरण का कार्यक्रम चला जिसमें मुख्य रूप् से भक्त प्रहलाद की कथा का विवेचन किया गया। 

हम आपको बता दें कि शाहपुरा में धुलंडी के दिन रंग नहीं खेलकर रामस्नेही संप्रदाय का वार्षिकोत्सव फूलडोल महोत्सव मनाया जाता है। यह परंपरा पिछले 300 वर्षों से चली आ रही है। इस दौरान पूरा शाहपुरा अध्यात्म के रंग में आज से सरोबार हो गया है। यह महोत्सव 5 दिन तक चलेगा तथा 25 मार्च को इसके समापन के साथ आचार्यश्री के चातुर्मास की घोषणा होगी। महोत्सव में नगरपालिका द्वारा मेला परिसर भी सजाया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस के जवान भी जगह जगह पर तैनात किये गये हैं। देश भर के रामस्नेही संतों की यहां मौजूदगी में निर्गुण राम की उपासना करने वालों का भी शाहपुरा में तांता लगा है। नगर पालिका द्वारा अस्थायी मेला बाजार स्थापित कर 350 दुकानों को लगाया गया है तथा दर्जनों डोलरे व चकरियां भी लोगों के मनोरंजन के लिए मौजूद है। 

सबसे पुरानी रियासत शाहपुरा के तत्कालीन राजाधिराज रणसिंह के अनुरोध पर रामस्नेही संप्रदाय के जन्मदाता महाप्रभु रामचरणजी महाराज शाहपुरा आये तब से प्रतिवर्ष फूलड़ोल महोत्सव का आयोजन किया जाता है। होलिका दहन के पश्चात रामस्नेही संप्रदाय के संत आचार्य श्री के संग रामनिवास धाम से बाहर निकलते है तथा रात्रि जागरण होता है।

...शाहपुरा संवाददाता मूलचन्द पेसवानी की रिपोर्ट 
 

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