एक बार फिर सवालों के घेरे में वनविभाग, 9 घंटे तक तारों में फंसा रहा भालू का बच्चा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/18 02:17

कोटा। एक बार फिर वनविभाग सवालों के घेरे में है। मामला थर्मल परिसर से भालू के बच्चे को रेस्क्यू करने का है जिसे वनकर्मियों की वजह से नौ घंटे बाद कंटीले तारों से मुक्ति मिल सकी। दरअसल थर्मल परिसर के एसएलडीसी ऑफिस के पास रात 1 बजे के आसपास पेडो और तारों के बीच भालू का बच्चा फंस गया था । भालू के बच्चे की आवाज सुनने के बाद कर्मचारियों ने वनविभाग और संबंधित अधिकारियों को सूचना दे दी। 

सूचना देने के करीब आठ घंटे बाद वनविभाग की टीम मौके पर पहुंची और मशक्कत के बाद इस भालू के बच्चे को रेस्क्यू किया तब तक तारो से बचने के चक्कर में किए गए प्रयासो वह गंभीर रुप से घायल  हो गया। फिलहाल वनविभाग की टीम उसे उपचार के लिए कोटा चिडियाघर लेकर गई है जहां उसका उपचार किया जाएगा। वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद दहशत में रात काटने वाले थर्मल कर्मचारियों में नाराजगी है और वह जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग कर रहे है कि हिसंक वन्यजीवो की शरण स्थली बनते जा रहे इस कोटा थर्मल प्लांट के कर्मचारियो को भय मुक्त किया जाए और विशेष अभियान चलाकर भालूओ और पैंथरो को पकडा जाए। 

राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन कर्मचारी संघ के इकाई अध्यक्ष रामसिंह शेखावत ने आरोप जड़ा है कि प्लांट परिसर में भालू और पैंथर की लगातार मौजूदगी बनी हुई है जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है लेकिन थर्मल प्रबंधन इसे गंभीरता से नही ले रहा है। 

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