राज्य सभा में विपक्ष का हंगामा जारी, बैठक दो बजे तक स्थगित

राज्य सभा में विपक्ष का हंगामा जारी, बैठक दो बजे तक स्थगित

राज्य सभा में विपक्ष का हंगामा जारी, बैठक दो बजे तक स्थगित

नई दिल्ली: पेगासस जासूसी विवाद, तीन कृषि कानूनों सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण मंगलवार को भी राज्यसभा में हंगामा जारी रहा और कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद 12 बजकर करीब 40 मिनट पर दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर भी सदन में विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी और वे आसन के समीप आकर सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे.

उपसभापति हरिवंश ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत होने और प्रश्नकाल चलने देने का अनुरोध किया तथा कहा कि यह समय सदस्यों का है. लेकिन उनकी अपील का हंगामा कर रहे सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ. शोरगुल के बीच ही प्रश्नकाल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया, पर्यटन राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल आदि ने अपने अपने मंत्रालयों से संबंधित विभिन्न सदस्यों के पूरक सवालों के जवाब दिए. सदन में शोर जारी रहने के कारण उनकी बात ठीक से सुनी नहीं जा सकी.

सदन में व्यवस्था नहीं बनते देख उपसभापति ने 12 बजकर करीब 40 मिनट पर बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी. इससे पहले सुबह हंगामे के कारण शून्यकाल भी नहीं हो पाया. संसद के मानसून सत्र का यह तीसरा सप्ताह है और विपक्षी सदस्यों के हंगामे की वजह से उच्च सदन में अब तक एक बार भी शून्यकाल नहीं हो पाया है. बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए. फिर उन्होंने सदन को सूचित किया कि उन्हें समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और विश्वंभर निषाद, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे, शक्ति सिंह गोहिल, के सी वेणुगोपाल, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय, भाकपा के विनय विस्वम तथा माकपा के इलामारम करीम ने अपने-अपने मुद्दों पर चर्चा के वास्ते नियम 267 के तहत पूर्व निर्धारित कामकाज स्थगित करने के लिए नोटिए दिए हैं. सभापति ने बताया कि उन्होंने ये नोटिस स्वीकार नहीं किए हैं.

सभापति के इतना कहते ही विपक्षी सदस्य आसन के समक्ष आ कर अपने-अपने मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा करने लगे. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि विपक्ष के एक सदस्य ने सदन में विधेयक पारित करने के तरीके को लेकर एक टिप्पणी की है जो उन्हें नहीं करना चाहिए था. उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणी सदन की गरिमा पर आघात है. हमारी मांग है कि वह सदस्य सदन से माफी मांगें. 

संसदीय मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि हर दिन सदन की कार्यवाही बाधित करना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है लेकिन विधेयक पारित करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस के एक सदस्य ने जो कहा है वह सदन का, इस देश के लोगों का अपमान है. उन्हें देश से और सदन से माफी मांगना चाहिए.

सभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने की अपील करते हुए कहा कि आसन चर्चा की अनुमति देना चाहता है लेकिन इस तरह के माहौल में चर्चा कैसे होगी. ज्यादातर सदस्य चाहते हैं कि सदन में कामकाज हो. उन्होंने कहा कि लोग देख रहे हैं कि हर दिन किस तरह व्यवधान डाला जाता है. आपको यहां हंगामा करने के लिए नहीं भेजा गया है. आप अपना खुद का नुकसान कर रहे हैं. इसी दौरान कांग्रेस के एक सदस्य के आचरण पर नाराजगी जाहिर करते हुए सभापति ने कहा  कि यह ठीक नहीं है. आसन पर कोई बात थोपी नहीं जा सकती. सदन में व्यवस्था बनते न देख सभापति ने 11 बज कर आठ मिनट पर बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी.  (भाषा)

और पढ़ें