गौ भक्त पनराज जी के भव्य मेले का आयोजन

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/09/20 01:12

रामगढ़ (जैसलमेर)। जिले की खींया गांव के निकट स्थित पनराजसर में गौभक्त पनराजजी के भव्य मेले का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भादवा सुदी दशमी को भव्य मेले का आयोजन हुआ। नवमी को रात्रि जागरण के बाद सुबह दशमी को मेले में हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मन्नत मांगी। आस-पास के गांव-ढाणीयों के हजारों भक्त पैदल यात्रा कर पनराजसर पहुंचे।जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी, शिव विधायक मानवेन्द्रसिंह, प्रदेश कांग्रेस की महासचिव सुनिता भाटी, पीसीसी सचिव रूपाराम सहित हजारों भक्त दादा पनराज के दरबार में पहुंचे और पूजा अर्चना की।

राहड़ सेवा समिति के अध्यक्ष गोरधनसिंह तेजपाला ने गौभक्त पनराज के जीवन परिचय और समाज में व्याप्त समस्याओं के बारे में उद्बोधन दिया। गोरधन सिंह ने कहा कि, "सीमावर्ती जिले जैसलमेर का इतिहास गौरवशाली रहा है। इस धरती पर मातृभूमि व गौरक्षक जन्म लेते रहते है। पनराजसर में ऐसे ही एक गौभक्त पनराजजी ने जन्म लिया।" 

उन्होंने बताया कि, "एक दिन काठौड़ी गांव में वीर पनराज अपनी धर्म की बहन बाला से मिलने पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक समुदाय के लोग वहां लूटपाट कर उनकी गायों को ले जा रहे थे। लोगों की चीख पुकार सुनकर और अपनी धर्म बहन को रोता देखकर उनकी भृकुटी तन गई और वे गायों को वापस लाने का वचन देकर युद्ध के लिए निकल पड़े। वीर पनराज के हुंकारों से वातावरण गुंजायमान हो रहा था और दुश्मनों में भगदड़ मची हुई थी। वीर पनराज सम्पूर्ण गायों को मुक्त करवाकर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति ने छल कपट से काम लेते हुए पीछे से वार कर वीर पनराज का सिर धड़ से अलग कर दिया। सिर कटने के बाद भी वीर पनराज का धड़ अपने दोनों हाथों से तलवार चलाकर शत्रुओं से लड़ते रहे और उनका धड़ बारह कोस तक बहावलपुर (पाक) में चला गया। तब वहां किसी वृद्ध तुर्क की सलाह पर वीर पनराज के धड़ पर नीला रंग छिड़क दिया और वीर पनराज का शरीर ठण्डा पड़कर धरती की गोद में समा गया।" उसी स्थान (बहावलपुर) पर वीर पनराज का स्मारक बना हुआ है जहां मुस्लिम उनकी मोडीया पीर व बंडिया पीर के नाम से पूजा करते हैं। स्वयं पनराज द्वारा निर्मित पनराजसर तालाब, जहां उनका सिर गिरा था उस स्थान पर पीले रंग की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। इसी स्थान पर वर्ष में दो बार भाद्रपद व माघसुदी दशमी को भव्य मेला लगता है। जहां हजारों की संख्या में दादा पनराज के मेले में पहुंचकर मन्नत मांगते है और दादा पनराज उनकी मन्नत पूरी करते है।

रागगढ़ से संवाददाता सूर्यवीर सिंह तंवर 

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