जयपुर VIDEO: एनिमिया मुक्त भारत की सोच को साकार करेगा हमारा एसएमएस!, SMS मेडिकल कॉलेज में हुआ ट्रायल, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: एनिमिया मुक्त भारत की सोच को साकार करेगा हमारा एसएमएस!, SMS मेडिकल कॉलेज में हुआ ट्रायल, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: अब एक इंजेक्शन और एनीमिया से मुक्ति चौंकिए मत ये कोई हमारा दावा नहीं, बल्कि प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस मेडिकल कॉलेज में शुरू हुए उस ऐतिहासिक टॉयल की बानगी है, जिसकी सफलता एनिमिया मुक्त भारत की सोच को जल्द साकार करेगी आखिर क्या है एनीमिया से मुक्ति का प्रोजेक्ट और एनीमिया से ग्रसित लाखों लोगों के लिए यह ट्रॉयल कैसे होगी फायदेमंद, 

अब इसे खानपान का असर कहे या फिर स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही, जिसके चलते राजस्थान समेत देशभर में किशोर अवस्था में काफी लोग एनीमिया से ग्रस्त हो जाते है. बीमारी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केन्द्र सरकार भी इसकी रोकथाम के प्रति गंभीर है. बकायदा एनीमिया मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है. लेकिन रोजाना आयरल फोलिक एसिड की दवा लेने की बाद्धता के चलते अभी भी इसके सकारात्मक परिणामों का इंतजार है. लेकिन इसी बाध्यता को खत्म करने के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज ने अमरीका की जैफरसन यूनिवसिटी व कर्नाटक के JN मेडिकल कॉलेज के साथ प्रोजेक्ट शुरू किया है. प्रोजेक्ट के तहत जयपुर जिले के चार ब्लॉक व एक सीएचसी पर चिकित्सकों की टीमें स्क्रीनिंग कर रही है. इस दौरान चिन्हित महिलाओं को तीन श्रेणियों में बांटकर एक को गोली व दो को अलग-अलग इंजेक्शन की डोज लगाई जा रही है. खुद चिकित्सकों का मानना है कि यदि यह ट्रायल सफल होता है तो एनिमिया मुक्त भारत की सोच जल्द साकार हो सकती है.

एक नजर में एनीमिया
यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें शरीर में रक्त की ज़रूरत को पूरा करने के लिये लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उसकी ऑक्सीजन वहन क्षमता अपर्याप्त होती है। यह क्षमता आयु, लिंग, धूम्रपान और गर्भावस्था की स्थितियों के साथ परिवर्तित होती रहती है.

आयरन की कमी इसका सबसे सामान्य लक्षण है। इसके साथ ही फोलेट (Folet), विटामिन बी 12 और विटामिन ए की कमी, दीर्धकालिक सूजन व जलन, परजीवी संक्रमण तथा आनुवंशिक विकार भी एनीमिया के कारण हो सकते है.

एनीमिया की गंभीर स्थिति में थकान, कमज़ोरी, चक्कर आना और सुस्ती इत्यादि समस्याएँ होती हैं गर्भवती महिलाएँ और बच्चे इससे विशेष रूप से प्रभावित होते हैं.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-20 के अनुसार भारतीय महिलाएँ और बच्चे अत्यधिक एनीमिक हैं. 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें अधिकांश राज्यों में आधे से अधिक बच्चे व महिलाएं एनीमिक मिले.

एनीमिया से ग्रसित कौन
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रजनन आयु वर्ग की वे महिलाएँ जिनका हीमोग्लोबिन का स्तर 12 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम है तथा पाँच साल से कम उम्र के जिन बच्चों में हीमोग्लोबिन का स्तर 11.0 ग्राम/डीएल से कम है, उन्हें एनीमिक माना जाता है.

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ सुधीर भण्डारी के निर्देशन में जयपुर जिले के सांगानेर, चाकसू, जमवारामगढ़, बस्सी ब्लॉक के अलावा आमेर की एक सीएचसी को प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है. अभी तक इन सभी जगहों से 7240 महिलाओं को स्क्रीन किया गया है. जिसमें से 813 महिलाएं एनीमिक पाई गई. इन महिलाओं में से 268 को ओरल रूटिन दवा आयरन फोलिक एसिड दी गई है, जबकि 545 महिलाओं को इजेक्टेबल श्रेणी में रखते हुए दो अलग-अलग दवाएं लगाई गई है. इसके साथ ही इन सभी महिलाओं पर चिकित्सक व फील्ड की टीमें विशेष निगरानी रख रही है, ताकि उनका डे टू डे रिपोर्ट कार्ड बनाया जा सके.

एनीमिया के ट्रीटमेंट में आमूलचूल परिवर्तन के उद्देश्य से शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट पर न सिर्फ चिकित्सक बल्कि पूरे प्रदेशवासियों की नजर टिकी है. एसएमएस मेडिकल कॉलेज में अभी कुल 2100 महिलाओं पर यह प्रोजेक्ट किया जाना है. चिकित्सकों की माने तो डिलीवरी के वक्त महिला के हिमोग्लोबिन और बच्चे के वजन के हिसाब से ही तय होगा कि इंजेक्टेबल दवा कितनी कारगर साबित हो रही है. ऐसे में उम्मीद ये है कि एसएमएस में शुरू इस प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम आएंगे और राजस्थान समेत देश को एनीमिया मुक्त बनाने में मदद मिलेगी.

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