सीमा पार से आतंक की टिड्डी का प्रकोप जारी, फसलों को बर्बाद होते देखने को मजबूर किसान

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/09/20 02:31

जैसलमेर: जिले में टिड्डी दलों के हमले जारी है. हर रोज पाकिस्तान से टिड्डी जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों सहित कई गांवों में टिड्डी दल पहुंच रहे हैं. किसानों की फसलों को चट कर रहे हैं दूसरी तरफ टिड्डी चेतावनी संगठन के प्रयास नाकाफी है. किसानों के लिए सामने सबसे बड़ी समस्या है और उसका समाधान नहीं हो रहा है. इस बार पहले से ही बारिश की देरी व मौसम की वजह से 70% ही बुआई हो पाई है अब इन फसलों को बचाने की चुनौती खड़ी है. जैसलमेर के कई इलाकों में टिड्डी का हमला हुआ है. इसमें मुख्य रूप से डाबला, रामगढ़, नरसींगो की ढाणी, मोहनगढ़ राजमथाई इलाके में लाखों की संख्या में टिड्डी देखी गई. कई इलाकों में फसलों को चौपट कर दिया और कई जगह पर नियंत्रण के लिए अभी तक टीमें नहीं पहुंची है.  

इन इलाको में सबसे ज्यादा प्रकोप:  
राजमथाई क्षेत्र की भोजराज सिंह जी की ढाणी सीनावाडिया गांव सहित अन्य गांवों में फसलों टिड्डी दल ने धावा बोला इसके चलते किसानों की आंखों के सामने टिड्डी दल फसलों एवं वनस्पति को चट कर रहे हैं. वहीं भणियाणा क्षेत्र के जालोड़ा पोकरण ग्राम के हयातपुरा में भी टिड्डी दल ने दस्तक दी और ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने सुबह-सुबह खेतों में टिड्डी के दल को देखा ग्रामीणों ने पटवारी को इसकी सूचना दी और पोकरण उपखंड के कई ग्रामीण क्षेत्र पिछले 2 महीनों से चिड़ियों का प्रकोप जारी है. रामगढ़ नहरी क्षेत्र में पिछले 2 माह से चल रही का टिड्डी प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है. गौरतलब है कि गांव के समीप हजारों हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले नेहरू क्षेत्र में गत 2 माह से टिड्डी का हमला जारी है. किसानों का कहना है कि टिड्डी और फाका का दलों ने खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया है. टीडी नियंत्रण दल की ओर से एक वाहन लगाने के कारण समय पर सहायता नहीं पहुंच रही है. खेतों के साथ जंगल में उगी घास फूस को भी चौपट कर रहे हैं. दूसरी और नियंत्रण दल की ओर से प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. 

फसलों को बर्बाद होते देखने को मजबूर किसान:
टिड्डी दलों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है. इससे जिले के सभी इलाकों में टिड्डी दलों के हमले शुरू हो चुके हैं. खासतौर पर फसलों वाले इलाके में टिड्डी दल देखे जा रहे हैं इस बीच किसान केवल अपनी फसलों को बर्बाद होता देख रहे हैं क्योंकि समय पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है.  

टूट रही है उम्मीदें किसान हुए लाचार: 
मानसून की बारिश देरी के कारण किसान इस बार मुश्किल से बुवाई कर पाए हैं और वह भी पर्याप्त नहीं हो पाई जिन किसानों ने मोबाइल कि अब उन्हें फसलों के नुकसान की चिंता सता रही है. डीडी दलों पर नियंत्रण नहीं होने से किसानों की उम्मीद टूट रही है. समय रहते डीडी दलों की आवक नहीं रुकी तो सारी फसलें चौपट हो जाएगी और किसानों का करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ेगा. 

नियंत्रण के प्रयासों से नहीं लग रही लगाम: 
टिड्डी नियंत्रण दल लगातार इन पर नियंत्रण के प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी तक लगाम नहीं लगी है. थोड़े थोड़े दिनों के अंतराल में फाका दल जिले के विभिन्न इलाकों में देखने को मिल रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं. स्प्रे के लिए 96 प्रतिशत मेलाफियोन का उपयोग होता है. यह स्प्रे कीमती है. करीब 50 हजार लीटर स्प्रे का उपयोग किया गया है. वहीं 20 टीमें सक्रिय है और इन वाहनों का रोजाना हजारों रुपए का डीजल उपयोग में आ रहा है. 

बॉर्डर पर ही नियंत्रण की तकनीक नहीं: 
टिड्डी नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के अनुसार उन्हें जैसे ही फाका दल या टिड्डी दल की सूचना मिलती है वहां पर जाकर स्प्रे करके नियंत्रण करने का प्रयास किया जाता है. उनके अनुसार लगातार पाकिस्तान से फाका दल जैसलमेर के इलाके में आ रहे हैं, बॉर्डर पर ही इनके निस्तारण की कोई तकनीक नहीं है. ऐसे में इन्हें सीमा में प्रवेश करने के साथ ही रोकना संभव नहीं है. जिससे आगामी दिनों में ज्यादा नुकसान की संभावना है. 

तीन माह में 68 हजार हेक्टेयर पर नियंत्रण: 
विभाग के अनुसार जैसलमेर में टिड्डी दलों पर नियंत्रण का काम 22 मई से शुरू हो गया था. तीन माह के अंतराल में करीब 68 हजार हेक्टेयर जमीन पर टिड्डी या फाका दल दिखाई दिए उन पर स्प्रे कर नियंत्रण किया जा चुका है. फिलहाल पोछीना में लगातार चार दिनों से फाका दल देखे जा रहे हैं. नियंत्रण के लिए जिले 20 टीमें कार्यरत है. 

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