VIDEO: मेवाड़-मारवाड़ में मोदी-मोदी, 21-22 अप्रैल को PM मोदी का चुनावी दौरा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/20 09:45

जयपुर। राजस्थान का सुदूर दक्षिणी इलाका गुजरात से सटा है। यहां की राजनीतिक राजधानी उदयपुर में नरेन्द्र मोदी तब भी आते रहे हैं, जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी आये। महाराणा प्रताप के कारण चितौड़ उन्हें सदैव प्रिय रहा। लोकसभा चुनावों में उनका प्रचार के लिये आना बेहद अहम है। यहां की आबो-हवा गुजरात जैसी है, वैसी ही संस्कृति और भाषा का असर भी है। गुजरात ने इस इलाके की संस्कृति को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि सियासी इतिहास भी बदला है। अब देखते है नरेन्द्र मोदी का चुनावी संदेश क्या असर डालता है। खास रिपोर्ट:

साल 2002 गुजरात में गोधरा कांड हुआ। रक्त रंजित दंगो ने धार्मिक ताना बाना बिगाड़ दिया और वैमनस्यता के बीज बो दिये। दंगो ने सियासत में भी उफान ला दिया, चाहे गुजरात हो या उससे सटा राजस्थान। इससे पहले साल 2001 में गुजरात में मोदी युग शुरु हो गया था। गोधरा दंगो ने गुजरात ही नहीं, बल्कि इससे सटे राजस्थान की राजनीति को हिला कर रख दिया। खासतौर पर राजस्थान के कांग्रेसी दबदबे वाले आदिवासी इलाकों को हिन्दुत्व की लहर पर सवार होकर बीजेपी ने वागड़-मेवाड़ की सीटों पर फतह प्राप्त की। डूंगरपुर और बांसवाड़ा में मोदी का जादू सिर चढ़कर बोला और पहली बार टीएसपी क्षेत्र में बीजेपी ने चमत्कारिक प्रदर्शन किया। डूंगरपुर जिले और बांसवाड़ा जिलों में आने वाली विधानसभा सीटे जीत ली और यही हाल लोकसभा में भी रहा। पहले तो मोदी ही थे, अब एक और गुजराती  क्षत्रप अमित शाह नई धमक पैदा करते भी यहां नजर आते है। गुलाब चंद कटारिया के लिये शाह ने उदयपुर में रोड शो किया था। 

त्याग, तपस्या और बलिदान की धरती कहे जाने वाले मेवाड़-वागड़ को राजस्थान का गौरव कहा जाता है। महाराणा प्रताप का शौर्य हो या फिर गोविन्द गुरु का आंदोलन, मेवाड़ और वागड़ को त्याग, तपस्या और स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता रहा है। बीजेपी ने राजस्थान गौरव यात्रा का आगाज यहीं से किया, तो राहुल गांधी ने भी राजस्थान में अपने चुनावी सफर में उदयपुर संभाग को विशेष महत्व दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेवाड़-वागड़ से लगाव पुराना है, उनके गृहराज्य गुजरात से सटे होने के कारण उनका यहां आना कई बार हुआ। बतौर मुख्यमंत्री और उसके बाद प्रधानमंत्री के रुप में भी वे यहां आये। मानगढ़ को नमन करना वे नहीं भूले, तो मावजी महाराज को तो हमेशा याद किया। अब एक बार मोदी यहां आ रहे हैं और मेवाड़ की धरती से चुनावी सन्देश देंगे। पुराने दौर में यहां कांग्रेस का हाथ आदिवासियो के बीच सिर चढ़कर बोलता था। अब हालात बदले है और बीजेपी ने उदयपुर संभाग के उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद और प्रतापगढ़ जिलों में अपनी धाक जमाई है। 

बीजेपी का मेवाड़ और वागड़ में कैसा रहा सफर:

—कद्दावर नेता सुंदर सिंह भंडारी ने मेवाड़ में जनसंघ खड़ा किया
—गुलाबचंद कटारिया जैसे संघ के स्वयंसेवकों को पार्टी में लाये
—बीजेपी के लिये जमीन तैयार की 
—पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 70के दशक में यहां प्रवास किये 
—भानुप्रकाश शास्त्री जैसे नेताओं ने बीेजेपी को खड़ा करने में पसीना बहाया
—मेवाड़-वागड़ की धरती पर आर एस एस ने नेटवर्क तैयार किया
—संघ प्रचारक सोहन सिंह ने आदिवासी धरती पर संघ नेटवर्क सशक्त बनाया
—वनवासी कल्याण परिषद बनाकर मिशनरी प्रभाव को रोकने का काम किया
—आदिवासी क्रांतिकारी गोविन्द गुरु के स्मारक के लिये कार्य किया
—मोदी खुद इस स्मारक पर दो या तीन बार आ चुके है
—यह इलाका गुजरात से सटा है लिहाजा नरेन्द्र मोदी का प्रभाव काम किया
—बीते दिनों मौजूदा संघ प्रमुख मोहन राव भागवत के यहां की बार आये
—प्रताप गौरव स्मारक बनाकर संघ ने यहां अपने दखल को सशक्त किया
—पीएम मोदी प्रताप गौरव आ कर प्रताप की प्रतिमा के नमन कर चुके है
—वसुंधरा राजे ने आदिवासी इलाके में कमल को मजबूती दी
—नये आदिवासी नेतृत्व को राजे भाजपा में लेकर आई

डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के हजारों लोग गुजरात में बसते है। जीवन यापन के लिये एक हद तक गुजरात पर आश्रित है। यहां पैदा हुआ अनाज महेसाणा, मोडासा और हिम्मनगर की मंडियों में अच्छे दामों पर बिकता है। मतदान के प्रति भी जागरुकता है लिहाजा यहां का निवासी वहां भले ही रोजगार के लिये गया हो, लेकिन चुनाव के वक्त वोट डालने के लिये राजस्थान जरुर आता है। यहां रह रहा गुजराती भी ऐसा ही करता है। शादी सरोकार और बहन बेटी के रिश्तों की तरह दक्षिण राजस्थान और गुजरात के बीच का व्यवहार है। ऐसे में वहां चलने वाली हवा यहां की राजनीति को प्रभावित ना करे यह संभव ही नहीं। 

अब देखिये ना राजस्थान के दिग्गज बीजेपी नेता ओम प्रकाश माथुर बरसों से गुजरात की बीजेपी को अपनी सेवाएं दे रहे है और सफलता का शत-प्रतिशत का रिकार्ड उनका रहा है। अशोक गहलोत जब गुजरात में विधानसभा चुनावों के समय इंचार्ज की भूमिका में थे, तब उन्होंने वहां झंडे गाड़े थे और गुजरात की राजनीति को प्रभावित करने का काम किया था। कारण दोनों की ओर की सियासत का असर गुजरात और राजस्थान में देखा जा सकता है। पीएम मोदी का चुनावी दौरा संदेश देने का काम करेगा। 

उदयपुर से पीएम कई योजनाओं का श्रीगणेश भी कर चुके है। पुराने इतिहास दोहराने की पीएम मोदी के सामने चुनौती है। अभी उदयपुर, बांसवाड़ा-डूंगरपुर, चितौड़ राजसमंद, जालोर सिरोही से बीजेपी के सांसद है। चितौड़ में तो विधानसभा चुनाव परिणाम बीजेपी के लिये अच्छे रहे। उदयपुर और डूंगरपुर - बांसवाड़ा में खास प्रदर्शन नहीं रहा। यहां बीटीपी ने भी कमर तोड़ने का काम किया। राजसमंद में कांग्रेस से बराबर का मुकाबला रहा। जालोर-सिरोही में कमल ने फिर ताकत दिखाई थी। 

डूंगरपुर और बांसवाड़ा या फिर मेवाड़ को मिला दे तो 5 लोकसभा सीटे तो सीधे तौर पर ऐसी है जो गुजराती आबो हवा से ओतप्रोत है। जाहिर है सियासत पर भी कम और ज्यादा असर पड़ता ही है। बीजेपी इस बात को भली भांति जानती है। लिहाजा प्रधानमंत्री मोदी का यहां चुनावी दौरा रखा गया है। BJP की दक्षिण राजस्थान में सफलता का दारोमदार गुजरातियों पर भी रहता है। 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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