नई दिल्ली Three Nation Tour कर स्वदेश लौटे प्रधानमंत्री मोदी

Three Nation Tour कर स्वदेश लौटे प्रधानमंत्री मोदी

Three Nation Tour कर स्वदेश लौटे प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन यूरोपीय देशों का दौरा पूरा कर बृहस्पतिवार को स्वदेश लौट आए. इस दौरान उन्होंने व्यापार, ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए कई द्विपक्षीय बैठकें कीं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने स्वदेश वापसी के लिए विमान पर सवार होने से पहले अभिवादन करते प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की तीन दिवसीय यात्रा बेहद सार्थक रही. व्यापार और निवेश संबंध आगे बढ़े, नयी हरित साझेदारियां बनीं, नवोन्मेष व कौशल विकास को लेकर सहयोग को बढ़ावा दिया गया तथा यूरोपीय साझेदारों से सहयोग की भावना को मजबूती प्रदान की गई. इससे पहले, प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट कर अपनी फ्रांस यात्रा को बहुत सार्थक बताया.

बुधवार की रात को मैक्रों से अकेले में तथा प्रतिनिधि स्तर पर गहन वार्ता की:

मोदी ने कहा कि फ्रांस का मेरा दौरा संक्षिप्त था लेकिन यह बहुत सार्थक रहा. मुझे और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को विभिन्न विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिला. शानदार आवभगत के लिए मैं उनको और फ्रांस की सरकार को धन्यवाद देता हूं.’’अपनी यात्रा के अंतिम चरण में मोदी ने मैक्रों के साथ विस्तृत वार्ता की. कुछ सप्ताह पहले ही मैक्रों फिर से फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गए हैं. यूक्रेन के खिलाफ रूस के हमले के बीच मोदी और मैक्रों ने द्विपक्षीय, आपसी हितों के साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की. उन्होंने बुधवार की रात को मैक्रों से अकेले में तथा प्रतिनिधि स्तर पर गहन वार्ता की.

मोदी की यह यात्रा यूक्रेन संकट के बीच और ऐसे वक्त में हुई है, जब रूस के खिलाफ यूरोपीय देश लगभग एकजुट :

मोदी और मैक्रों ने यूक्रेन में संघर्ष के क्षेत्रीय तथा वैश्विक प्रभावों पर चर्चा की और इस मुद्दे पर समन्वय बढ़ाने को लेकर सहमति व्यक्त की. यूक्रन का मुद्दा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी प्रमुखता से उठा जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और फिनलैंड, आइसलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और डेनमार्क के उनके समकक्षों ने भाग लिया. इसमें मोदी ने कहा कि भारत का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में कोई भी देश विजयी नहीं होगा क्योंकि सभी को नुकसान होगा और विकासशील तथा गरीब देशों पर इसका अधिक गंभीर प्रभाव पड़ेगा. मोदी की यह यात्रा यूक्रेन संकट के बीच और ऐसे वक्त में हुई है, जब रूस के खिलाफ यूरोपीय देश लगभग एकजुट हैं. सोर्स-भाषा 

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