गांधीनगर सरकार ने वैश्विक बाजारों में उवर्रकों की कीमतों में आई उछाल से किसानों को बचाने की कोशिश की: प्रधानमंत्री मोदी

सरकार ने वैश्विक बाजारों में उवर्रकों की कीमतों में आई उछाल से किसानों को बचाने की कोशिश की: प्रधानमंत्री मोदी

सरकार ने वैश्विक बाजारों में उवर्रकों की कीमतों में आई उछाल से किसानों को बचाने की कोशिश की: प्रधानमंत्री मोदी

गांधीनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने महामारी और यूक्रेन में जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उवर्रकों की कीमतों में हुई वृद्दि से देश में किसान प्रभावित नहीं हों यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए. इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के एक ‘नैनो यूरिया’ संयंत्र का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के आठ और संयंत्र स्थापित किये जाएंगे तथा वे विदेश पर निर्भरता घटाएंगे और पैसे बचाएंगे.

प्रधानमंत्री ने यहां महात्मा मंदिर सभागार में सहकारी संस्थाओं के सम्मेलन सहकार से समृद्धि को संबोधित किया. उन्होंने इस कार्यक्रम के दौरान इफको संयंत्र का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया. मोदी ने कहा कि तरल यूरिया संयंत्र के साथ यूरिया की पूरी बोरी (50किग्रा) की शक्ति आधे लीटर वाली बोतल में आ गई है, जिससे परिवहन और भंडारण में भारी बचत होगी. संयंत्र 500 मिलीलीटर की करीब 1.5 लाख बोतल का उत्पादन प्रतिदन करेगा. उन्होंने कहा कि देश में इस तरह के आठ और संयंत्र स्थापित किये जाएंगे.

उन्होंने कहा कि यह यूरिया के मामले में विदेश पर निर्भरता घटाएगा और देश का पैसा बचाएगा. मैं आश्वस्त हूं कि यह नवोन्मेष यूरिया तक सीमित नहीं रहेगा. भविष्य में अन्य नैनो उवर्रक भी हमारे किसानों को उपलब्ध होंगे. प्रधानमंत्री ने कहा कि नैनो प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार होगा. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में, कोविड-19 लॉकडाउन के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उवर्रकों की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई . युद्ध (यूक्रेन में) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में उवर्रकों की उपलब्धता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीमित कर दिया और इसके चलते कीमतें और बढ़ गईं.

मोदी ने कहा कि कोविड-19 महामारी और हाल में रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्थिति में मुश्किलें पैदा होने, जिसने कीमत बढ़ा दी और खरीद मुश्किल कर दी, के बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि वह किसानों को प्रभावित होने दिये बगैर कठिनाइयों का सामना करेगी.उन्होंने कहा कि यूरिया की एक बोरी पर 3,500 रुपये की लागत आती है जो किसानों को 300 रुपये में उपलब्ध कराई जाती है जबकि सरकार प्रति बोरी 3,200 रुपये की लागत वहन करती है.

मोदी ने कहा कि इसी तरह डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की प्रत्येक बोरी पर सरकार 2,500 रुपये की लागत वहन करती है, जबकि पूर्ववर्ती सरकारें 500 रुपये वहन करती थीं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले साल उर्वरकों के लिए 1,60,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी. इस साल यह सब्सिडी दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की होने जा रही. उन्होंने कहा कि हमें सोचना होगा कि क्या 21वीं सदी में हमारे किसानों को अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर निर्भर रहना चाहिए. 

क्या विदेश भेजे जाने वाले (उर्वरकों के आयात के लिए) करोड़ों रुपये किसानों के उपयोग के लिए नहीं रखे जाने चाहिए? क्या हमें महंगे उर्वरकों के चलते किसानों पर बढ़ते बोझ को घटाने का स्थायी हल नहीं तलाशना चाहिए. मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल, दोनों ने गांवों में आत्मनिर्भरता लाने की राह दिखाई और उसी भावना के अनुरूप उनकी सरकार मॉडल सहकारी गांव विकसित करने के पथ पर बढ़ रही है.उन्होंने कहा कि इसके लिए गुजरात में छह गांवों को चुना गया है.उन्होंने कहा कि सहकारी डेयरी ग्रामीण अर्थव्यस्था को मजबूत करने का जरिया है.(भाषा) 

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