80 प्रतिशत खिलौने हम आयात करते है, देश का करोड़ों रूपया जा रहा विदेशों में; इसे बदलने की जरूरत: मोदी 

80 प्रतिशत खिलौने हम आयात करते है, देश का करोड़ों रूपया जा रहा विदेशों में; इसे बदलने की जरूरत: मोदी 

80 प्रतिशत खिलौने हम आयात करते है, देश का करोड़ों रूपया जा रहा विदेशों में; इसे बदलने की जरूरत: मोदी 

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा कि बच्चे की पहली पाठशाला अगर परिवार होता है तो, पहली किताब और पहले दोस्त, ये खिलौने ही होते हैं. समाज के साथ बच्चे का पहला संवाद इन्हीं खिलौनों के माध्यम से होता है. भारत में लोग अपनी आवश्यकता के 80 प्रतिशत खिलौने (Toys) विदेशों से खरीद रहे है. इससे भारत का करोड़ों रूपया बाहर जा रहा है. इस नीति को बदलने की जयरत है. प्रधानमंत्री मोदी टायकैथन-2021 (Tycathon-2021) के प्रतिभागियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के माध्यम से बातचीत कर रहे थे. प्रतिभागीयों ने प्रधानमंत्री को अपने अपने गेम्स के बारे में जानकारी दी. प्रधानमंत्री ने इन्हें और बेहतर करने के लिए सुझाव दिए. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक खिलौना बाजार (Global Toy Market) करीब 100 बिलियन डॉलर का है. इसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ डेढ़ बिलियन डॉलर के आसपास ही है. आज हम अपनी आवश्यकता के भी लगभग 80 प्रतिशत खिलौने आयात करते हैं. यानि इन पर देश के करोड़ों रुपये बाहर जा रहे हैं. इस स्थिति को बदलना ज़रूरी है.

खिलौने और खेल हमारे चहुंमुखी विकास के लिए जरूरी:
मोदी ने कहा कि आज के युग में खेल और खिलौने हमारे सभी प्रकार के विकास के लिए अहम है. कि खिलौने और खेल हमारी मानसिक शक्ति, (Mental Strength) सृजनात्मकता, (Creativity) अर्थव्यवस्था (Economy) और ऐसे अनेक पहलुओं को प्रभावित करते हैं, इसलिए इन विषयों की बात भी उतनी ही आवश्यक है. भारत के वर्तमान सामर्थ्य को, भारत की कला-संस्कृति को, भारत के समाज को आज दुनिया ज्यादा बेहतर तरीके से समझना चाहती है. इसमें हमारी खिलौने और गेमिंग इंडस्ट्री (Gaming Industry) बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है.

मार्केट में उपलब्ध ऑनलाइन या डिजिटल गेम्स में भारतीय कॉन्सेप्ट होना चाहिए:
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जितने भी ऑनलाइन या डिजिटल गेम्स (Online or Digital Games) मार्केट में उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकतर का कॉन्सेप्ट भारतीय नहीं है. अनेक गेम्स के कॉन्सेप्ट या तो हिंसा को प्रमोट करते हैं या फिर मानसिक तनाव का कारण बनते हैं. हमारा दायित्व है कि ऐसे वैकल्पिक कॉन्सेप्ट​ डिजाइन हों जिसमें भारत का मूल चिंतन हो. हमारा फोकस ऐसे खिलौने और खेल का निर्माण करने पर भी हो, जो हमारी युवा पीढ़ी को भारतीयता (Indianness) के हर पहलू को रोचक तरीके से बताए. हमारे खिलौने और खेल, मनोरंजन भी करें संलग्न भी करें और शिक्षित भी करें, ये हमें सुनिश्चित करना है. बीते 5-6 वर्षों में हैकाथॉन (Hackathon) को देश की समस्याओं के समाधान का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनाया गया है. इसके पीछे की सोच है- देश के सामर्थ्य को संगठित करना, उसे एक माध्यम देना. कोशिश ये है कि देश की चुनौतियों और समाधान से हमारे नौजवान का सीधा कनेक्ट हो.

तीन दिवसीय आनलाइन टायकैथन ग्रैंड फिनाले:
PMO के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय, (Ministry of Education) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, (Ministry of Women and Child Development) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises) सहित कई अन्य मंत्रालयों ने पांच जनवरी को टायकैथन-2021 की संयुक्त रूप से शुरुआत की थी. देश से लगभग 1.2 लाख प्रतिभागियों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराकर 17 हजार से अधिक नए विचार रखे. इनमें से 1,567 विचारों को 22 जून से 24 जून तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय आनलाइन टायकैथन ग्रैंड फिनाले के लिए चुना गया.

टायकैथन-2021 का उद्देश्य भारत में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना है:
कोरोना संबंधी प्रतिबंधों के चलते इस कार्यक्रम में डिजिटल खिलौनों को लेकर विचार रखने वाली टीमें शामिल होंगी, जबकि गैर-डिजिटल खिलौनों की अवधारणाओं के लिए एक अलग समारोह आयोजित किया जाएगा, जो आनलाइन नहीं होगा. 

गौरतलब है कि भारत के घरेलू बाजार के साथ ही वैश्विक खिलौना बाजार देश में विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर पैदा करता है. टायकैथन-2021 का उद्देश्य भारत में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना है.

 

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