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एससीओ शिखर सम्मलेन में हिस्सा लेने बिश्केक पहुंचे पीएम मोदी

एससीओ शिखर सम्मलेन में हिस्सा लेने बिश्केक पहुंचे पीएम मोदी

बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन-एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक में भाग लेने के लिए किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच चुके हैं. नरेन्द्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी बहुपक्षीय सम्मेलन में पहली बार भाग लेंगे. अपने बिश्केक प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी संगठन के राष्‍ट्र प्रमुखों की परिषद की बैठक में शामिल होने के साथ ही अनेक द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे. 

गौरतलब है कि पीएम मोदी शिखर सम्मेलन के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी और अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति अशरफ गनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे. दो दिन का यह सम्मेलन आज से शुरू हो रहा है. इस बहुपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आठ सदस्य देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भाग ले रहे हैं. सम्मेलन में चार देशों के प्रमुख पर्यवेक्षक के रूप में भी भाग ले रहे हैं. बिश्‍केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान वैश्विक सुरक्षा की स्थिति, बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग के साथ ही अनेक सामयिक अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. चर्चा के दौरान अफगानिस्तान भी एक बड़ा  मुद्दा होगा. 

क्या है शंघाई सहयोग संगठन:
चीन के नेतृत्व वाला आठ सदस्यों का शंघाई सहयोग संगठन आर्थिक और सुरक्षा संबंधी समूह है. जुलाई 2015 में, रूस के ऊफा में, शंघाई सहयोग संगठन ने भारत और पाकिस्तान को संगठन के पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने का फैसला किया था और दोनों देश 2017 में अस्ताना में शिखर सम्मेलन के दौरान आधिकारिक रूप से पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुए. 
 

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नई दिल्ली: नेपाल में भारी बारिश ने कहर बरपाया है, जिसकी वजह से नदी और नाले उफान पर है. पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन हो रहा है. अब तक बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आने से 10 लोगों की मौत हो गई है. जबकि कई लोग लापता हो गए है. जिनकी तलाश जारी है.

बाढ़ प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन:
इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. आपको बता दें कि  नेपाल में बीते 7 जुलाई से 9 जुलाई के बीच हुई बारिश के चलते मायागड़ी, जाजरकोट और सिंधुपालचोक जिलों में भारी भूस्खलन हुआ है. 

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यहां पर हुआ भारी भूस्खलन:
एक अधिकारी ने बताया कि ​7 जुलाई से 9 जुलाई के बीच सिंधुपालचोक इलाके में तेज बारिश हुई है. बारिश के पानी की वजह से कई घर बह गए हैं. गत 24 घंटों में नेपाल के कई जिलों में मानसून की तेज बारिश के चलते हुए बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं. बारिश के चलते मायागड़ी, जाजरकोट और सिंधुपालचोक जिलों में भारी भूस्खलन हुआ है. 

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जैसलमेर: पाकिस्तान के रास्ते भारत आया टिड्डी दल फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. खासतौर पर राजस्थान के कई जिलों में इनका असर सबसे ज्यादा है. कई किलोमीटर लंबे टिड्डी दल राजस्थान के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में बार-बार हमला कर रहे हैं. टिड्डी दल के हमले से अब पाकिस्तान बॉर्डर से लगे राजस्थान के जिलों में किसानों पर आफत आ गई है. अब अगस्त में एक बार फिर पाकिस्तान के रास्ते कारोड़ों टिड्डियों का दल भारत में आ सकता है. राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त में टिड्डी दल के हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है. मानसून का सीजन शुरू हो चुका है, और बारिश में टिड्डियां ज्यादा अंडे देती हैं. 

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अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी:  
टिड्डी दलों के हमले से अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है. राजस्थान के कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अब हमले ज्यादा बड़े और लगातार होंगे. इन हमलों से यदि प्रदेश की 10 प्रतिशत फसल भी बर्बाद हुई तो नुकसान का आंकड़ा लगभग 4 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों की आशंका और अब तक हुए हमलों को ध्यान में रखते हुए टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने हेलीकॉप्टर से कीटनाशक स्प्रे कराने का प्रबंध किया है. वहीं राज्य सरकार जमीनी स्तर पर कीटनाशक का स्प्रे कराने के साथ ही अन्य आवश्यक कदम उठा रही है. फायर ब्रिगेड, ड्रोन व ट्रेक्टर का सहारा लेकर इन पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है. 

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टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई:
जैसलमेर में टिड्डी नियंत्रण अधिकारी राजेश कुमार व कृषि उपनिदेशक राधेश्याम नारवाल ने बताया कि जैसलमेर जिले में आज  टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई. जैसलमेर जिले के धनाना क्षेत्र में 140 आर.डी क्षेत्र में हेलिकॉप्टर से कीटनाशक का स्प्रे कर 50 से ज्यादा हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण किया गया. इसके साथ ही जिले में रविवार को कुल 351 हेक्टेयर क्षेत्र मे टिड्डी नियंत्रण किया गया जिनमें पोकरण, डेलासर, एकां, अमीरों की बस्ती प्रमुख रूप से शामिल है. उन्होंने बताया कि जैसलमेर में 908 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण की कार्यवाही की गई. जिले के मुल्ताना, फतेहगढ़, बांधा, ओला, सोढ़ाकर पोकरण, दूधिया आदि क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर, ड्रोन, व्हीकल माउंटेन स्प्रेयर के जरिए टिड्डी नियंत्रण किया गया. 

LAC विवाद पर भारत-चीन में समझौता, गलवान घाटी से पीछे हटे चीनी सैनिक

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नई दिल्ली: भारत-चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की. विदेश मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग ने सीमावर्ती क्षेत्रों में हालिया घटनाक्रमों पर खुलकर बातचीत हुई और व्यापक तौर पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया. जानकारी के मुताबिक शांति बहाल करने को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत हुई. गलवान जैसी झड़प भविष्य में नहीं होने पर बातचीत हुई.  

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चीनी सैनिकों ने पीछे हटना किया शुरू:
डोभाल और वांग यी के बीच बातचीत ऐसे समय में हुई है जब चीन की सेना गलवान घाटी के कुछ हिस्सों से तंबू हटाते और पीछे हटती नजर आई. सरकारी सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी. क्षेत्र में सैनिकों के पीछे हटने का यह पहला संकेत है.खबरों के मुताबिक दोनों पक्षों के कोर कमांडरों के बीच हुए समझौते के तहत चीनी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू किया है. 

गलवान घाटी में 15 जून को हुई थी हिंसक झड़प:
उन्होंने कहा कि चीनी सेना गश्त बिंदु 14 पर लगाए गए तंबू एवं अन्य ढांचे हटाते हुए देखी गई है. गौरतलब है कि गलवान घाटी में 15 जून को हिंसक झड़प हुई. जिसके बाद तनाव बढ़ गया था, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. चीन के सैनिक भी इस झड़प में हताहत हुए थे लेकिन उसने अब तक इसके ब्योरे उपलब्ध नहीं कराए हैं.

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Chandra Grahan 2020: साल का तीसरा चंद्र ग्रहण खत्म, जानिए अब कब लगेगा ग्रहण

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नई दिल्ली: साल 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण आज खत्म हो गया है. यह चंद्रग्रहण रविवार को भारत समयानुसार सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर लगा था. रविवार को लगने वाला चंद्र ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण था. जानकारी के मुताबिक जब पृथ्वी, सूरज और चांद के बीच तो आती है लेकिन तीनों सीधी रेखा में नहीं होते और ऐसे में पृथ्वी अपने बाहरी हिस्से से ही सूरज की रोशनी को चांद तक पहुंचने से रोक पाती है, जिसे पेनंब्र कहा जाता है. 

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भारत में नहीं दिखा चन्द्र ग्रहण:
इस कारण से वर्ष 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण है. हालांकि, इस बार यह चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आया. इस ग्रहण को दक्षिणी/ पश्चिमी यूरोप, अफ्रीका के अधिकतर हिस्से, उत्तरी अमेरिका के अधिकतर हिस्से, दक्षिणी अमेरिका, भारतीय महासार और अंटार्टिका में देखा गया. 

साल का तीसरा चन्द्र ग्रहण:
उल्लेखनीय है कि इस साल 6 ग्रहण लगने वाले हैं. इनमें 4 चंद्र गहण और 2 सूर्य ग्रहण है. साल का पहला चन्द्र ग्रहण जनवरी में लगा था. दूसरा 5 जून लगा था, यह भी चंद्र गहण था. इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगा. चौथा ग्रहण आज लगने वाला है. पांचवा ग्रहण 30 नवंबर को लगेगा,जो चंद्रग्रहण होगा. छठा ग्रहण 14 दिसंबर को लगेगा, जो सूर्यग्रहण होगा. यह भारत में नहीं दिखेगा.

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नई दिल्ली: साल 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण आज खत्म हो गया है. यह चंद्रग्रहण रविवार को भारत समयानुसार सुबह 8 बजकर 37 मिनट पर लगा था. रविवार को लगने वाला चंद्र ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण था. जानकारी के मुताबिक जब पृथ्वी, सूरज और चांद के बीच तो आती है लेकिन तीनों सीधी रेखा में नहीं होते और ऐसे में पृथ्वी अपने बाहरी हिस्से से ही सूरज की रोशनी को चांद तक पहुंचने से रोक पाती है, जिसे पेनंब्र कहा जाता है. 

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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हादसा, ट्रेन की चपेट में आने से बस में सवार 19 सिख श्रद्धालुओं की मौत

पाकिस्तान के  पंजाब प्रांत में हादसा, ट्रेन की चपेट में आने से बस में सवार 19 सिख श्रद्धालुओं की मौत

नई दिल्ली: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शुक्रवार को एक भयानक हादसे की खबर मिली. पंजाब प्रांत में एक पैसेंजर ट्रेन श्रद्धालुओं से भरी एक बस में जा भिड़ी. इस घटना में 19 सिख यात्रियों की मौत की खबर है, जबकि दर्जनभर यात्री जख्मी हो गए हैं. सूचना मिलने पर प्रशासन मौके पर पहुंचा और राहत एवं बचावकर्मियों ने पहुंचकर जख्मी लोगों को अस्पताल पहुंचाया. 

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धार्मिक अनुष्ठान करने गए थे सभी:
जानकारी के मुताबिक बिना बैरियर वाली क्रॉसिंग पर यह घटना घटित हई.यह घटना पंजाब के शेखूपुरा में फरूकाबाद की है. यहां कराची से लाहौर जा रही शाह हुसैन एक्सप्रेस पैसेंजर ट्रेन शेखूपुरा जा रही वैन में जा टकराई. शेखपुरा जिले में यह सिख श्रद्धालु गुरुद्वारा सच्चा सौदा लौट रहे थे. वह धार्मिक अनुष्ठान करने गए थे. 

इमरान खान ने जताया दुख:
सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है. शवों को भी अस्पताल पहुंचाया गया है और मौके पर राहत और बचावकार्य पूरा हो चुका है. प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया है. उन्होंने प्रशासन से घायलों को सबसे अच्छी मेडिकल सहायता देने का निर्देश दिया है.

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नई दिल्ली: सुरक्षा मामलों को देखते हुए भारत सरकार का बहुत बड़ा फैसला सामने आया है.लद्दाख में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने वायुसेना की शक्ति बढ़ाने का फैसला किया है. रक्षा मंत्रालाय ने गुरुवार को रूस से 33 नए लड़ाकू विमान प्राप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें 12 नए सुखोई और 21 नए मिग-29 विमान शामिल हैं. यह सौदा करीब 40 हजार करोड़ का बताया जा रहा है. 

पीएम मोदी ने की पुतिन से फोन पर बात:
लद्दाख में चीन के साथ सीमा विवाद के बीच भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग पर बातचीत आगे बढ़ी है. इस पर कोई ब्योरा फिलहाल न देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बात की और उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध में जीत की 75वीं वर्षगांठ के समारोह की सफलता और रूस में संवैधानिक संशोधनों के लिए किए गए सफल वोटों के समापन पर बधाई दी. 

म्यांमार में भारी बारिश की वजह से खदान धंसी, 100 से ज्यादा लोगों की मौत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया:
इस दौरान पीएम मोदी और पुतिन द्विपक्षीय संपर्क और परामर्श की गति बनाए रखने के लिए सहमत हुए, जिससे इस वर्ष के अंत में भारत में होने वाले वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा सके. पीएम मोदी ने द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए भारत में राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत करने के लिए अपनी उत्सुकता व्यक्त की. वहीं रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी फोन कॉल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया और सभी क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया. 

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नई दिल्ली: म्यांमार में खदान धंसने से एक दर्दनाक हादसा हो गया. इस हादसे में कई लोगों की मौत की खबर सामने आई है. खबरों की माने तो म्यांमार में जेड माइन में  भूस्खलन की वजह से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. उत्तरी म्यांमार में भूस्खलन के बाद कम से कम 100 जेड खनिकों के शवों को गुरुवार को भूस्खलन के बाद बाहर निकाला गया. 

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बचाव कार्य में बारिश बनी बाधा:
जानकारी के मुताबिक अभी और शव कीचड़ में फंसे हुए हैं. मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. इस इलाके में गत एक हफ्ते से तेज बारिश हो रही है जिससे बचाव कार्य में भी परेशानी आ रही है. आपको बता दें कि जेड की इन खदानों में पहले भी भूस्खलन से कई लोगों की मौत हो चुकी है. हादसे के प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उन्होंने लोगों को मलबे के एक ढेर पर देखा जो ढहने के कगार पर था. 

पहाड़ी से मलबा गिरने पर हुआ हादसा:
कुछ ही देर बाद पहाड़ी से पूरा मलबा नीचे गिर गया. जिसकी चपेट में आने से 100 से अधिक लोग मारे गए. गौरतलब है कि म्यांमार में एक वर्ष पहले भी ऐसा हादसा हो चुका है. जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी. जबकि मलबे की चपेट में आने से सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए थे.

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