नई दिल्ली मन की बात में बोले पीएम मोदी- चुनौतियां खूब आई, संकट भी अनेक आए लेकिन हमने हर संकट से नए सबक लिए

मन की बात में बोले पीएम मोदी- चुनौतियां खूब आई, संकट भी अनेक आए लेकिन हमने हर संकट से नए सबक लिए

मन की बात में बोले पीएम मोदी- चुनौतियां खूब आई, संकट भी अनेक आए लेकिन हमने हर संकट से नए सबक लिए

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए देशवासियों को संबोधित किया. साल के आखिरी 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि चार दिन बाद नया साल शुरू होने वाला है. अगले साल अगली मन की बात होगी. उन्होने कहा कि देश में नया सामर्थ्य पैदा हुआ है. इस नई सामर्थ्य का नाम आत्मनिर्भरता है. 

मैंने देश में आशा का एक अद्भुत प्रवाह भी देखा: 
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सम्मान में सामान्य मानवी ने बदलाव को महसूस किया है. मैंने देश में आशा का एक अद्भुत प्रवाह भी देखा है. चुनौतियां खूब आई, संकट भी अनेक आए लेकिन हमने हर संकट से नए सबक लिए. उन्होंने कहा कि हमें वोकल फॉर लोकल की भावना को बनाए रखना है. प्रधानमंत्री ने इस साल का रिजॉल्यूशन देश के लिए लेने को कहा. इसके अलावा उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने की अपील की.

जनता कर्फ्यू जैसा प्रयोग पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बना:
पीएम मोदी ने कहा कि मुझे कई देशवासियों के पत्र मिले हैं. अधिकतर पत्रों में लोगों ने देश के सामर्थ्य, देशवासियों की सामूहिक शक्ति की भरपूर प्रशंसा की है. जब जनता कर्फ्यू जैसा प्रयोग पूरे विश्व के लिए प्रेरणा बना, जब ताली-थाली बजाकर देश ने हमारे कोरोना वॉरियर्स का सम्मान किया था, एकजुटता दिखाई थी उसे भी कई लोगों ने याद किया है.

अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे अपनी आस्था छोड़ दें:
पीएम मोदी ने कहा कि आज के ही दिन गुरु गोविंद जी के पुत्रों, साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था. अत्याचारी चाहते थे कि साहिबजादे अपनी आस्था छोड़ दें, महान गुरु परंपरा की सीख छोड़ दें. लेकिन, हमारे साहिबजादों ने इतनी कम उम्र में भी गजब का साहस दिखाया, इच्छाशक्ति दिखाई. दीवार में चुने जाते समय, पत्थर लगते रहे, दीवार ऊंची होती रही, मौत सामने मंडरा रही थी, लेकिन, फिर भी वो टस-से-मस नहीं हुए. पीएम ने कहा कि हमारे देश में आतताइयों से, अत्याचारियों से, देश की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यता, हमारे रीति-रिवाज को बचाने के लिए, कितने बड़े बलिदान दिए गए हैं, आज उन्हें याद करने का भी दिन है.


 

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