जयपुर VIDEO: रिटायर्ड IAS राजीव महर्षि को पद्मभूषण, फर्स्ट इंडिया ने की खास बातचीत

VIDEO: रिटायर्ड IAS राजीव महर्षि को पद्मभूषण, फर्स्ट इंडिया ने की खास बातचीत

जयपुर: राजस्थान के मुख्य सचिव का पद हो या केन्द्र में वित्त सचिव,गृह सचिव या कैग की जिम्मेदारी. साल 1978 बैच के रिटायर्ड आईएएस राजीव महर्षि ने उन्हें दी गई हर अहम भूमिका में खुद को न सिर्फ साबित किया है, बल्कि अपने प्रशासकीय किरदार को नए आयाम दिए हैं. पद्मभूषण के रूप में बड़ी उपलब्धि तक पहुंचने से लेकर NSE की सहायक संस्था IFSC में चेयरमैन पद की नई जिम्मेदारी तक वे अपने इस दायित्व को कभी कम नहीं होने देते. उन्हें पद्मभूषण मिलने से लेकर नई जिम्मेदारी और पूरे प्रशासकीय करियर का सिंहावलोकन करते हुए महर्षि ने हमारे वरिष्ठ संवाददता डॉक्टर ऋतुराज शर्मा से खास बातचीत की.

राजीव महर्षि के साथ खास बातचीत:
प्रश्न-सबसे पहले तो बहुत शुभकामनाएं आपको. पद्मभूषण की फेहरिस्त में आपके नाम की घोषणा होने की उपलब्धि को आप किस रूप में लेते हैं? 

उत्तर-मैं इस सम्मान को बेहद विनम्रता से स्वीकार करता हूं. मैंने अपने हिसाब से अपनी क्षमता और काबिलियत अनुसार अपनी ड्यूटी की है. जितनी ईमानदारी और निष्ठा हो सकती थी.उससे मैंने अपना काम किया,लेकिन ऐसी उपलब्धि में केवल एक व्यक्ति का योगदान नहीं रहता है. सीनियर अफसरों से मुझे अच्छी गाइडेंस मिली है और साथियों से मुझे सहयोग मिला है. जूनियर्स से भी मैंने काफी कुछ सीखा है. उसके बाद जो मैंने किया, वह जितना अच्छा हो सकता था.उसे करने का प्रयास किया.

प्रश्न-अगर ब्यूरोक्रेट के रूप में आपकी इस यात्रा को देखें.सिंहावलोकन करें तो रिटायरमेंट से पहले और उसके बाद की उपलब्धियों को किस रूप में देखना चाहेंगे.

उत्तर-मेरे हिसाब से जो मुझे जिम्मेदारी दी गई.भले ही मैं सिविल सेवा में आया उसके बाद उस जिम्मेदारी को निभाना ही मेरा कर्तव्य रहा. वहीं मैंने किया. उससे अधिक न मैं कुछ कर सकता था और न इससे कम करने का मेरा कभी इरादा रहा. मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे बड़े जिम्मेदारी के पद मिले, जिसमें मैंने अपने सहयोगियों के साथ कुछ अच्छा करने का प्रयास किया. 

प्रश्न-पद्म पुरस्कारों की बात करें तो खास तौर पर राजस्थान कैडर के ब्यूरोक्रेट्स को देखें तो बहुत गिने-चुने नाम आते हैं. ऐसे में आप अपनी पूरी सेवा और इस उपलब्धि को देखते हैं?

उत्तर- तो राजस्थान कैडर से तो बहुत अच्छे-अच्छे ब्यूरोक्रेट्स आते हैं. टीएन चतुर्वेदी और नरेश चंद्रा को पद्मविभूषण मिला,बलवंत राय और एम एल मेहता साहब को पद्मश्री मिला. तो हमारी तो उम्मीद यह रहेगी कि अब जो पीढ़ी आई है उन्हें यह प्रेरणा मिले कि अपना काम अपनी निष्ठा और ईमानदारी से जितना हो सकता है,वह करे और कोई सम्मान मिले या न मिले, कोई काम को रिकॉग्नाइज करे या न करे,लेकिन अपना कर्तव्य यह है कि जो जिम्मेदारी दी गई है उसका निर्वहन पूरी काबिलियत के साथ होनी चाहिए.

प्रश्न-ब्यूरोक्रेट के रूप में अपनी यात्रा के दौरान कोई खास मुकाम,कुछ ऐसे दिलचस्प पल या कोई ऐसी दिल को छू लेने वाली बात जिसे राजीव महर्षि याद करना चाहेंगे इस बेहतरीन समय में ?

उत्तर-ऐसी तो हैं बहुत सी घटनाएं, लेकिन जब आईएएस में आकर कैरियर शुरू किया तब नायब तहसीलदार या गिरदावर थे और जो हमारे स्टेट सेवा के अधिकारी थे श्रीकांत वगैरह.उनसे कार्य सीखा और उन्होंने जिस प्रकार से हमें सिखाया, उसे भुलाना बहुत मुश्किल है. मुझे एक नाम ध्यान आता है अजमेर में नायब तहसीलदार मोतीलाल जी उन्होंने बहुत ही धैर्य से मुझे पूरा रेवेन्यू का काम ठीक से समझाया और यह भी समझाया कि जो आपकी ईमानदारी और गैर- ईमानदारी में क्या फर्क होता है. किसी के यहां से चाय पीने से गैर ईमानदारी नहीं हो जाती है लेकिन चाय पिलाने वाले से ज्यादा एक्सपेक्ट करेंगे तब वह गैर जिम्मेदारी,गैर ईमानदारी की श्रेणी में आता है. ऐसे बहुत से लोगों का बहुत सा योगदान होता है. बहुत सी मीठी यादें भी हैं और मीठे पल भी हैं.भले ही वह ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में हो,भले ही वह केन्द्रीय गृह मंत्रालय में हों और भले ही वह CAG में हो.बहुत ऐसे क्षण हैं. 

प्रश्न-NSE में सहायक संस्था IFSC में चेयरमैन आपको बनाया गया है, इस दोहरी खुशी है। इसमें क्या दायित्व रहेगा?

उत्तर-अहमदाबाद में इंटरनेशनल फाइनेंस सर्विसेस सेंटर IFSC अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग के रूप में प्लेटफॉर्म बनाया है. यहां पर यूरो और डॉलर में होनेवाले अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन्स हो सकते हैं. इसमें देश का जो कारोबार है जैसे निफ्टी का जो इंडेक्स है उसकी ट्रेडिंग सिंगापुर में होती थी. इसी तरह निवेशकों के रिस्क मैनेजमेंट से जुड़ी संस्था का भी सारा कारोबार सिंगापुर में होता था. निवेश या निफ्टी इंडेक्स हमारा हो और उसका सारा कार्य या ट्रांजेक्शन्स सिंगापुर में हो, वह ठीक बात नहीं थी. इस हिसाब से IFSC एक पुराना इनिशिएटिव है जब पीएम मोदी मुख्यमंत्री थे तब इसे चालू किया गया था और मेरा सौभाग्य है कि जब मैं 2015 में केन्द्र में वित्त सचिव के पद पर था तब वित्त मंत्रालय ने इसकी मंजूरी दी थी. तो एक तरह से यह मेरे लिए होमकमिंग भी है और इससे अप्रत्यक्ष रूप से भारत के निवेश क्लाइमेट को बहुत लाभ मिलेगा. क्योंकि हमारे यहां जो इंडेक्स या इनवेस्टमेंट है उसकी अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग या उसके लिए जो अंतरराष्ट्रीय निवेशक हैं वे बिना सिंगापुर जाए ये कार्य कर सकेंगे. इसके साथ-साथ इसकी फीस और कमीशन भी काफी होते हैं जो सिंगापुर में करीब 1000 करोड प्रतिदिन  के बराबर होती है तो वह आय भी अब हमारे लोगों,हमारे ब्रोकर्स,हमारे लॉयर्स और हमारे विशेषज्ञों के पास आया करेगी. इससे रोजगार भी बढ़ेगा. यह आत्मनिर्भरता की ओर कदम था जिसके बारे में बहुत पहले सोचा गया था लेकिन इसे अमली जामा अब पहनाया गया है. 

प्रश्न-राज्य के मुख्य सचिव,केन्द्र में गृह सचिव,केन्द्रीय वित्त सचिव और कैग सहित कई प्रशासकीय भूमिकाएं आपने निभाई हैं.अब रिटायरमेंट के बाद कोई ऐसी जिम्मेदारी जिसे राजीव महर्षि सोचते हैं कि वे अब निभा सकते हैं?

उत्तर-देश की सत्यता यह है कि यहां की जनसंख्या बहुत युवा और रिलेटिवली लीडरशिप यंग लोगों के पास आनी चाहिए. हमारे उम्र के लोगों ने अपना कार्य कर लिया है और अब हमसे बीस-पच्चीस वर्ष छोटे लोगों को बड़ी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. हाल ही में केन्द्र सरकार ने अहम पदों पर युवाओं को जिम्मेदारी देकर ऐसा किया भी है. ऐसे में जीवन के इस मुकाम में मैं मानता हूं कि रिटायरमेंट भरी जिंदगी ही सही विकल्प है और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को अहम पद दिए जाने चाहिए.

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