'पैलेस ऑन व्हील्स' का सत्र समाप्त, पर्यटन निगम की लाइफ लाइन बनी यह शाही ट्रेन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/22 04:14

जयपुर। दुनियाभर में भारत की सांस्कृतिक राजदूत के तौर पर मशहूर पैलेस ऑन व्हील्स का सत्र समाप्त हो गया है। इस सत्र में शाही ट्रेन नए रैक में चली थी बावजूद इसके ट्रेन की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई।

शाही ट्रेन पर्यटन निगम की फाइनेंशियल लाइफ लाइन बन चुकी है। पर्यटन निगम के 600 कर्मचारियों के पेट भरने के साथ ही पर्यटन के क्षेत्र में हमारी ध्वजवाहक साबित हो रही है। पेश है एक रिपोर्ट:

वर्ष 1982 में पूर्व राजघरानों के रेलवे सैलूनों को जोड़कर शुरू की गई पैलेस ऑन व्हील्स इन 37 वर्षों में तीन रैक बदल चुकी है। 1982  में बनी ट्रेन को 1990 में मीटर गेज के आधुनिक रैक में बदला गया और वर्ष 1996 में बड़ी लाइन की ट्रेन में बदला गया। ट्रेन का 22 वर्ष पुराना रैक पिछले वर्ष एक बार फिर बदला गया और रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स के नए रैक को पैलेस ऑन व्हील्स के रैक में तब्दील कर दिया गया। 

इस सत्र में शाही ट्रेन को 34 फेरे करने थे लेकिन 3 फेरों में बुकिंग न मिलने के चलते उन्हें रद्द करना पड़ा और 31 फेरों पर देश विदेश के 1490 पर्यटकों ने शाही ट्रेन में सफर किया। पैलेस ऑन व्हील्स के इस सत्र में 839 सैलून बुक हुए जो कुल सैलून की संख्या का 66 फ़ीसदी है।

पैलेस ऑन व्हील्स देश दुनिया में राजस्थान की सांस्कृतिक राजदूत के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी है और इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि अगले सत्र जो कि सितंबर में शुरू होगा उसकी एडवांस बुकिंग अभी से ही शुरू हो गई है। 

28 अप्रैल से शुरू हो रहे ग्रेट इंडियन ट्रैवल बाजार में शाही ट्रेन का शोकेस रखा गया है ताकि दुनिया भर से आने वाले ट्रैवल ट्रेड के प्रतिनिधि शाही ट्रेन का अवलोकन कर सकें। अब बुधवार को पैलेस ऑन व्हील्स दिल्ली पहुंचेगी और गुरुवार को जयपुर आ जाएगी।

इसके बाद पैलेस ऑन व्हील्स को रेलवे के अजमेर वर्कशॉप में भेजा जाएगा जहां उसका वार्षिक रखरखाव होगा सितंबर में अगला सत्र शुरू होगा उससे पहले ट्रेन के इंटीरियर को अपग्रेड भी किया जाने की योजना है। 

अगले सत्र से पहले पैलेस ऑन व्हील्स के अंदर कॉन्फ्रेंस ऑन व्हील्स और मैरिज ऑन व्हील्स का कंसेप्ट भी शुरू किए जाने की योजना है ताकि अगले सत्र से ट्रेन में कॉरपोरेट घराने अपने एनुअल कॉन्फ्रेंस और बॉलीवुड हॉलीवुड सेलिब्रिटी व अन्य हस्तियां मैरिज भी प्लान कर सकें। ध्यान रहे कि पैलेस ऑन व्हील्स के राजस्व का 56 फीस दी हिस्सा रेलवे को और 44 फ़ीसदी हिस्सा पर्यटन निगम को मिलता है।

पैलेस ऑन व्हील्स पर्यटन निगम की अर्थव्यवस्था की मुख्य धुरी है। शाही ट्रेन से पर्यटन निगम को सालाना करीब 10 करोड रुपए का राजस्व मिलता है।

जिससे उसके करीब 600 कर्मचारियों की रोजी-रोटी चलती है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पैलेस ऑन व्हील्स का यह सत्र बेहतर रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि ट्रेन के अपग्रेडेशन से और बेहतर मार्केटिंग से अगले सत्र के लिए ट्रेन को और भी बेहतर बुकिंग मिलेंगी।

   जयपुर संवाददाता निर्मल तिवारी की रिपोर्ट

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