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पंचतीर्थ महास्नान और आध्यात्मिक यात्रा के साथ ही धार्मिक पुष्कर मेला आज से शुरू

पंचतीर्थ महास्नान और आध्यात्मिक यात्रा के साथ ही धार्मिक पुष्कर मेला आज से शुरू

पुष्कर(अजमेर): कार्तिक मास की पवित्र प्रबोघिनी एकादशी के पहले पंचतीर्थ महास्नान और आध्यात्मिक यात्रा के साथ ही धार्मिक पुष्कर मेला आज से शुरू हो गया है. प्रात: ब्रह्म मुहूर्त से ही महास्नान शुरू हो गया जो पूरे दिन जारी रहा रहेगा.  

अभिनन्दन के बाद आध्यात्मिक पदयात्रा शुरू हुई: 
ब्रह्मा की पवित्र धरा पर संत, महन्त एवं अनेक समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने  आध्यात्मिक पदयात्रा की. इससे पहले यात्रा को जिला कलक्टर आरती डोगरा ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया. प्रात: आठ बजे पुष्कर के गुरूद्वारे के सामने संत, महन्त, विभिन्न संप्रदायों के मठाधीशों का पुष्प तिलक के साथ अभिनन्दन के बाद  आध्यात्मिक पदयात्रा शुरू हुई. पदयात्रा में विभिन्न मंदिरों, स्कूलों और समाज सेवकों  की ओर से मनोहर झांकियां सजाई गई. 

स्वागत में जगह-जगह पुष्प वर्षा: 
आध्यात्म से जुड़ी ये झांकियां ढोल नगाड़ों के साथ जब पुष्कर के मुख्य बाजारों से निकली तो कस्बेवासियों ने इनके स्वागत में जगह-जगह स्वागत द्वार बनवाए और फूलों की वर्षा की. भारतीय संस्कृति और आध्यात्म के इस नज़ारे को देखकर विदेशी पर्यटकों ने भी न केवल इसमें पैदल चलकर भागीदारी निभाई बल्कि हरे राम हरे कृष्णा का बखान करते हुए ढोल नगाड़े भी बजाये. ये पदयात्रा मुख्य बाजारों और ब्रह्मा मंदिर से होते हुए मेला मैदान तक पहुंची. 

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नई दिल्ली: देशभर में 1 जून से 30 जून तक अनलॉक 1 का ऐलान कर दिया गया. गृह मंत्रालय की ओर से गाइडलाइन्स जारी की गई. इसके तहत कंटेनमेंट जोन के बाहर चरणबद्ध तरीके से छूट मिलेगी, लेकिन फिलहाल कंटेनमेंट जोन में पूरी पाबंदी रहेगी. हालांकि, जरूरी गतिविधियों को मंजूरी दी जाएंगी. अनलॉक 1 की यह गाइडलाइन्स 1 जून से जारी रहेगी. चलिए जानते है इस गाइडलाइन्स के बारे में...

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कंटेनमेंट जोन के अंदर सब कुछ बंद
इस गाइडलाइन के मुताबिक कंटेनमेंट जोन के अंदर सब कुछ बंद रहेगा, लेकिन कंटेनमेंट जोन के बाहर चरणबद्ध तरीके से सब कुछ खोलने की अनु​मति होगी. 

प्रथम चरण: 8 जून से धार्मिक स्थल, होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल खोलने की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, यह सब शर्तों के साथ ही खोले जाएंगे.

द्वितीय चरण: इसमें स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान खोलने जाएंगे. लेकिन इसकी अनुमति राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी. अभी जुलाई माह से स्कूलों को खोलने का प्रयास किया जाएगा. 

तृतीय चरण: इसमें अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, मेट्रो रेल, सिनेमा हॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क, थिएटर, बार और ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल जैसी जगहें आदि को खोलने पर विचार होगा.

कर्फ्यू जारी रहेगा:  
रात 9 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू जारी रहेगा. इमरजेंसी सेवाओं को इसमें छूट दी गई है. स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान खोले जाने पर फैसला सरकार बाद में लेगी.

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पहली बार देश में घरों में हुई ईद की नमाज, जयपुर में कई परिवारों ने की एक साथ नमाज अदा

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जयपुर: राजधानी सहित प्रदेशभर में आज ईदुलफितर की नमाज अदा की गयी. लॉकडाउन के चलते केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार मस्जिदों और ईदगाह में नमाज की इजाजत नहीं दी गयी है. ऐसे में प्रदेश में भी मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने अपने घरों में ईद की नमाज अदा की. 

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ईद की नमाज में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हुए: 
पहली बार घरों में हो रही ईद की नमाज में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हुए. लॉकडाउन के चलते इस बार घरों में भी रंग रोगन नहीं करवाए गये और ना नए कपड़ों, जूतों और अन्य सामान की खरीदारी हुई. लेकिन तमाम दिक्कतों के बीच ईद-उल-फितर पर सेवइयों की मिठास के साथ ही दस्तरख्वान पर परोसे जाने वाले व्यंजनों की फेहरिस्त जरूर तैयार हो गई है.   

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जयपुर: कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन की बंदिशों के साथ आज जयपुर सहित प्रदेशभर में ईदुल फितर ईद की नमाज अदा की गयी. जयपुर की स्थापना के बाद ये पहला मौका है जब इस गुलाबीशहर में ईद की सामुहिक नमाज नही हुई. दिल्ली रोड़ स्थित ईदगाह में चीफ काजी और जौहरी बाजार स्थित जामा मस्जिद में मौलना मुफती अमजद अली ने ईद की नमाज अदा करायी. 

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5-5 नमाजियों को नमाज की अनुमति दी गयी थी: 
दोनों ही जगहों पर प्रशासन की ओर से केवल 5—5 नमाजियों को नमाज की अनुमति दी गयी थी. प्रशासन की गुजारिश पर ईदगाह में सुबह 6 बजे तो वही जामा मस्जिद में सुबह सवा 6 बजे नमाज अदा करायी गयी. नमाज के बाद मुल्क और मुल्म की अवाम को कोरोना से निजात के लिए खास दुआ भी की गयी. वहीं नमाज के नमाजियों ने मौके पर मौजुद पुलिसकर्मियों को ईद की मुबारकबाद देते हुए उनके जज्बे लिए सलाम किया.

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर और केरल में आज ईद मनाई जा रही है. लोगों ने घरों में ही ईद की नमाज अदा की. वहीं केरल में भी आज ईद मनाई जा रही है. मालापुरम में लोगों ने ईद की नमाज घर पर ही अदा की. वहीं जम्मू-कश्मीर से अलग हुए लद्दाख में शनिवार को ईद मनाई गई. लद्दाख, करगिल क्षेत्र में शुक्रवार को चांद देखा गया था, इसलिए लद्दाख में 23 मई को ईद-उल-फितर मनाया गया.

देश के अन्य हिस्सों में कल मनाई जाएगी ईद:
जबकि देशभर के अन्य हिस्से में ईद सोमवार को मनाई जाएगी. दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी और फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम ने शनिवार देर शाम को ऐलान किया कि देशभर में कहीं से चांद दिखने की इत्तला नहीं हुई है लिहाजा ईद-उल-फितर सोमवार को होगी.

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सोशल डिस्टेंसिंग की पालना:
इस बार कोरोना संकट के बीच पूरे देशभर में ईद मनाई जाएगी, जिसमें लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए घर में ही ईद की नमाज अदा करनी पड़ेगी. दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम ने कोरोना वायरस और लॉकडाउन को लेकर लोगों से अपील की है कि बेहद सादगी के साथ घरों में रहकर ईद मनाएं. नमाज भी घर में ही अदा करें. लॉकडाउन में मस्जिदों में आम लोगों के जाने पर पाबंदी है, इसलिए एहतियात बरतें.आपको बता दें कि ईद की नमाज जमात में अदा की जाती है. हालांकि इस बार कोरोना संकट को देखते हुए सभी धार्मिक स्थल बंद हैं, इसलिए मस्जिद में नमाज अदा करने की इजाजत नहीं है.

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दाती महाराज ने उड़ाईं लॉकडाउन की धज्जियां, दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की शुरू 

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नई दिल्ली: लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में दाती महाराज पर केस दर्ज किया गया है. कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लागू है. लॉकडाउन के दौरान लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की गई है. साथ ही लॉकडाउन में धार्मिक कार्यक्रम और लोगों की भीड जुटने पर भी प्रतिबंध है. हालांकि अब दिल्ली में एक धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन का मामला सामने आया है.

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लॉकडाउन पर सरकारी दिशा निर्देश के उल्लंघन का आरोप:
सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं. यह फोटोज दिल्ली में असोल के शनिधाम मंदिर की हैं. यहां लॉकडाउन की गाइडलाइन का पालन न करते हुए धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इतना ही नहीं, लोगों ने इस कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान नहीं रखा.

22 मई की शाम एक मंदिर में कार्यक्रम करने पर केस दर्ज:
पुलिस की शुरुआती जांच के दौरान यह पता चला कि शनिधाम मंदिर के मुख्य पुजारी दाती महाराज के साथ कुछ लोगों ने 22 मई की शाम 7:30 बजे मंदिर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. मंदिर में लॉकडाउन पर सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया.फिलहाल मामला दर्ज कर जांच की जा रही है. 

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शनि जयंती आज, जानें न्याय के देवता शनि देव के जन्म की कहानी

शनि जयंती आज, जानें न्याय के देवता शनि देव के जन्म की कहानी

जयपुर: ज्‍येष्‍ठ मास की अमावस्‍या यानी आज देशभर में शनि जयंती मनाई जा रही है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनि न्यायधीश या कहें दंडाधिकारी की उपाधि से नवाजा गया है. शनिदेव के पास हमारे सभी कर्मों का लेखाजोखा रहता है. वह हर व्‍यक्ति को उसके कर्मों का फल देते हैं. धार्मिक परंपराओं में बताया गया है कि इस दिन शनिदेव का जन्‍म हुआ था. इस अमावस्‍या को ही महिलाएं अपने पति की दीर्घायु का व्रत रखती  हैं और बड़ अमावस्‍या का त्‍योहार मनाती हैं. 

अक्सर शनि का नाम सुनते ही डर लगने लगता है, शनि के प्रकोप का खौफ खा जाते हैं. कुल मिलाकर शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है लेकिन असल में ऐसा है नहीं. शनिदेव अच्छे का परिणाम अच्छा और बूरे का बूरा देने वाले ग्रह हैं. अगर कोई शनिदेव के कोप का शिकार है तो रूठे हुए शनिदेव को मनाया भी जा सकता है. शनि जयंती का दिन तो इस काम के लिये सबसे उचित माना जाता है. 

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शनिदेव के जन्‍म की क‍था: 
स्‍कंदपुराण में शनिदेव के जन्‍म की कथा के बारे में विस्‍तार से बताया गया है. राजा दक्ष की कन्या संज्ञा का विवाह सूर्यदेवता के साथ हुआ. सूर्यदेवता का तेज बहुत अधिक था जिसे लेकर संज्ञा परेशान रहती.  वह सोचा करती कि किसी तरह तपादि से सूर्यदेव की अग्नि को कम करना होगा. जैसे तैसे दिन बीतते गये संज्ञा के गर्भ से वैवस्वत मनु, यमराज और यमुना तीन संतानों ने जन्म लिया. संज्ञा अब भी सूर्यदेव के तेज से घबराती थी फिर एक दिन उन्होंने निर्णय लिया कि वे तपस्या कर सूर्यदेव के तेज को कम करेंगी लेकिन बच्चों के पालन और सूर्यदेव को इसकी भनक न लगे इसके लिये उन्होंने एक युक्ति निकाली उन्होंने अपने तप से अपनी हमशक्ल को पैदा किया जिसका नाम संवर्णा रखा और बच्‍चों की देखरेख का जिम्‍मा उसको सौंपकर खुद अपने पिता के घर चली गई.  पिता के साथ न देने पर संज्ञा घोड़ी का रूप लेकर वन में जाकर तपस्‍या करने लगी. वहीं छाया रूप होने के कारण सवर्णा को भी सूर्य के तेज से कोई परेशानी नहीं हुई. सूर्य और संवर्णा के मिलन से फिर 3 संतानें हुईं-मनु, शनिदेव भद्रा.

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सूर्य देव ने कहा यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता: 
एक अन्य कथा के अनुसार शनिदेव छाया के पुत्र होने के कारण वर्ण में काले थे.  जब शनिदेव का जन्म हुआ तो रंग को देखकर सूर्यदेव ने छाया पर संदेह किया और उन्हें अपमानित करते हुए कह दिया कि यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता. मां के तप की शक्ति शनिदेव में भी आ गई थी उन्होंने क्रोधित होकर अपने पिता सूर्यदेव को देखा तो सूर्यदेव बिल्कुल काले हो गये, उनके घोड़ों की चाल रूक गयी. परेशान होकर सूर्यदेव को भगवान शिव की शरण लेनी पड़ी इसके बाद भगवान शिव ने सूर्यदेव को उनकी गलती का अहसास करवाया. सूर्यदेव अपने किये का पश्चाताप करने लगे और अपनी गलती के लिये क्षमा याचना कि इस पर उन्हें फिर से अपना असली रूप वापस मिला. लेकिन पिता पुत्र का संबंध जो एक बार खराब हुआ फिर न सुधरा आज भी शनिदेव को अपने पिता सूर्य का विद्रोही माना जाता है. 


 

राम जन्मभूमि के समतलीकरण के दौरान मिल रही देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प कलश और कलाकृतियां

राम जन्मभूमि के समतलीकरण के दौरान मिल रही देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प कलश और कलाकृतियां

नई दिल्ली: अयोध्या में धीरे-धीरे राम मंदिर का काम शुरू हो गया है. इसी बीच राम जन्मभूमि के समतलीकरण के दौरान मंदिर के अवेशष मिलने का दावा किया गया है.  इन अवशेषों में कई पुरातात्विक मूर्तियां खंभे और शिवलिंग. आमलक, कलश और चौखट शामिल हैं. बता दें कि इसी महीने 11 मई से राम जन्मभूमि परिसर में समतलीकरण का काम शुरू हुआ है.

राम मंदिर निर्माण से पहले समतलीकरण ...

अवशेषों के मिलने का सिलसिला शुरू हो चुका: 
सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर के पक्ष में फैसले के बाद अधिग्रहित क्षेत्र में निर्माण की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हो गई है. जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर निर्माण के लिए तैयारियां व ट्रेंचों को भरने, समतलीकरण और लोहे की जालियों को हटाने का कार्य जोरों पर है. कोरोना संकट को देखते हुए इन जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जा रहा है. इसी बीच अवशेषों के मिलने का सिलसिला शुरू हो चुका है.

राम मंदिर निर्माण से पहले समतलीकरण ...

देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प कलश, कलाकृतियां आदि चीजें निकली: 
जानकारी के अनुसार अब तक जहां-जहां खुदाई हुई है, वहां से और आसपास की जगहों से देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प कलश, कलाकृतियां आदि चीजें निकली हैं. हालांकि ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी में अवशेष के बारे में कुछ विस्तार से नहीं बताया गया है. ऐसा बताया जा रहा है कि विशेषज्ञों के निरीक्षण के बाद ही इस पर विस्तार रूप से बताया जा सकता है.

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से ...

5 फुट आकार के नक्काशीयुक्त शिवलिंग की आकृति भी प्राप्त हुई:
इन अवशेषों में देवी देवताओं की खंडित मूर्तियां, अन्य कलाकृतियां के पत्थर, 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ व 6 रेड सैंड स्टोन के स्तंभ और 5 फुट आकार के नक्काशीयुक्त शिवलिंग की आकृति प्राप्त हुई है.


 

22 मई को है वट सावित्री व्रत, जानें क्या है महत्व

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जयपुर: अपने पति की लंबी आयु के लिए हिंदू धर्म में महिलाएं कई व्रत रखती हैं. ऐसे ही व्रतों में से एक है वट सावित्रि व्रत. इस व्रत के प्रभाव से सौभाग्यवती महिलाओं की मनोकामना पूर्ण होती है. उनका सौभाग्य अखंड रहता है. यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है. ज्येष्ठ अमावस्या को दान पुण्य, पितरों की शांति के लिए सौभाग्यशाली दिन माना जाता है. ज्येष्ठ अमावस्या को शनि देव की जयंती के रूप में मनाया जाता है. 

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उपवास करने से पिछले जन्म के पापों से भी मुक्ति मिलती है:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो स्त्री उस व्रत को सच्ची निष्ठा से रखती है उसे न सिर्फ पुण्य मिलता है बल्कि उसके पति पर आई सभी विपदा दूर हो जाती हैं. इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है. अमावस्या पर उपवास करने से पिछले जन्म के पापों से भी मुक्ति मिलती है. 

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वट सावित्री व्रत का महत्व: 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थी. अतः इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है. इस दिन वट (बड़, बरगद) का पूजन होता है. इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं. 

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