आतंक का पर्याय बन चुके पैंथर को वन विभाग की टीम ने पिंजरे में किया कैद

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/21 03:52

भीलवाड़ा: जिले के करेड़ा तहसील क्षैत्र लक्ष्‍मीपुरा ग्राम में पिछले तीन माह से आतंक का प्रयाय बन चूके पैंथर को आखिरकार आज वन विभाग की टीम ने पिंजरे में कैद कर ही लिया. पैंथर के पिंजरे में कैद होने की खबर गांव में आग की तरह फैल गयी और भारी संख्या में वहां पर ग्रामीण भी जमा हो गये. वन विभाग की टीम पैंथर को टाड़गढ रावली अभ्यारण में ले जाकर छोडने के प्रयास शुरू कर दिये है. 

ग्रामीणों में हो गया था भय व्याप्त: 
लक्ष्‍मीपुरा ग्राम निवासी ईश्‍वर गुर्जर ने कहा कि पिछले तीन माह से गांव और आसपास के क्षैत्र में पैंथर की आवाजाही और आए दिन मेवशियों को शिकार बनाने के कारण ग्रामीणों में भय व्‍याप्‍त हो गया था. गांव से पिछले तीन माह में 7 से 8 बकरियों के साथ ही अन्‍य कई जानवरों को अपना शिकार बना चूका था. इसकी शिकायत हमने वन विभाग में की. वन विभाग के रेंजर गोविन्‍द सिंह खिंची ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत पर हमने पैंथर की मूवमेंट पर नजर रखे हुए थे. इसके चलते हमने गांव के ही भंवर सिंह रावणा राजपूत के खेत पर एक कुत्‍ते को पिंजर में रखकर लगाया. आज सुबह जब यहां आकर देखा गया तो पैंथर इसमें कैद हो चूका था.

टाड़गढ रावली अभ्यारण में छोड़ा जाएगा पैंथर: 
यह क्षैत्र अरावली टाटगढ़ के जंगलों से लगा हुआ है तो कई बार यह पैंथर घुमते-घुमते इधर आ जाते है. पिंजरे में बन्द पैंथर को हम अजमेर जिले के टाड़गढ रावली अभ्यारण मे लेकर जायेगें और वहां उसके उपचार के बाद टाटगढ के जंगल में पेंथर को छोड़ा दिया जाएगा. 

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