लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने से पाक विस्थापितों में ख़ुशी का माहौल

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/12/10 08:12

जैसलमेर: देश में सोमवार देर रात लोकसभा में नागरिकता संसोधन बिल भारी बहुमत से पास होने की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान में हो रहे अत्याचारों व धर्म प्रतारणा से तंग आकर हमेशा के लिए भारत आये पाकिस्तानी हिन्दू विस्थापित बस्तियों में जश्न व खुशी का माहौल हैं. इन बस्तियों में आज दिवाली जैसा माहौल हैं. अब तक अपने को बेगाने समझ रहे यह हिन्दु पाक विस्थापित केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह का धन्यवाद करते थक नही रहे हैं. अब इन्हें उम्मीद हैं कि राज्य सभा में अतिशीघ्र में यह बिल पास हो जायेगा. 

देश की नागरिकता के लिए कई सालों तक इंतजार करना पड़ रहा था इंतजार: 
पाकिस्तान में हो रहे अत्याचारो से तंग आकर हजारों की तादात में सदैव के लिए भारत आये हिन्दू पाकिस्तान विस्थापितों को अब तक देश की नागरिकता के लिए कई सालों तक इंतजार करना पड़ रहा हैं 10 से 15 साल के बाद कड़ी मशक्कत व कड़े नियम व प्रावधानों के बाद इन्हें जाकर नागरिकता मिल पाती थी इसके कारण इन्हें न तो सरकारी सुविधा मिल पाती थी और न ही इनके बच्चों के स्कूलों में एडमिशन हो पाता था. सामाजिक विकास तो बहुत दूर की बात थी. दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर यह हिन्दू विस्थापित किसी भी सूरत में पाकिस्तान वापस जाने को तैयार नहीं थे भले ही वे किसी भी दोयम दर्जे की जिन्दगी यहां जी रहे थे. 

विस्थापितों में खुशी व जश्न का माहौल: 
सोमवार का दिन उनके राहत व खुशी लेकर आया हैं. केन्द्र सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में प्रस्तुत कर पास करवा दिया हैं अब राज्यसभा में पास होने के बाद इस संशोधन बिल का कानून भारत में बन जाएगा उसके बाद इन पाकिस्तानी हिन्दू विस्थापितों को नागरिकता मिलने में कोई लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. आज जब हम जैसलमेर के पाक हिन्दु विस्थापितों की बस्ती में पहुंचे तो काफी खुशी का जश्न का माहौल देखने को मिला जैसलमेर हिन्दू पाकिस्तानी विस्थापित अध्यक्ष नाथू भील के यहां दर्जनां की तादात में विस्थापित इकट्ठे हुवे थे यहां पर कई प्रकार के व्यंजन बनाए जा रहे हैं विस्थापितों में खुशी व जश्न का माहौल था. नरेन्द्र मोदी व अमित शाह के जय-जयकार किए जा रहे थे. गौरतलब हैं कि नए बिल के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आए हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, सिख शरणार्थियों को नागरिकता मिलने में आसानी होगी. इसके अलावा अब भारत की नागरिकता पाने के लिए 11 साल नहीं बल्कि 6 साल तक देश में रहना अनिवार्य होगा.    

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