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एईएन भर्ती की मुख्य परीक्षा का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने RPSC की एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट को माना सही

एईएन भर्ती की मुख्य परीक्षा का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने RPSC की एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट को माना सही

जयपुर: राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित कि जा रही सहायक अभियंता संयुक्त भर्ती 2018 की मुख्य परीक्षा का रास्ता साफ हो गया है. हाईकोर्ट ने इस भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा के 8 प्रश्नों को चुनौति देने वाली आधा दर्जन याचिकाओं को खारिज कर दिया है. जस्टिस एस पी शर्मा की एकलपीठ ने ये आदेश हितेशकुमार व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिये है. हाईकोर्ट विवादित प्रश्नो के मामले में RPSC की एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट को सही मानते हुए कहा कि हाईकोर्ट किसी सब्जेक्ट का एक्सपर्ट नही है उसे एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर विश्नास करना होगा.

3 दिसंबर को आयोजित होने वाली मुख्य परीक्षा का रास्ता साफ: 
हाईकोर्ट के आदेश के साथ ही अब आरपीएससी द्वारा 3 दिसंबर को आयोजित होने वाली मुख्य परीक्षा का रास्ता साफ हो गया है. गौरतलब है कि राज्य के पीडब्ल्यूडी, पीएचईडी, उर्जा, पंचायती राज, सिचाई विभाग और मेकेनिकल डिपार्टमेंट के लिए संयुक्त रूप से 917 पदो की भर्ती निकाली गयी थी. 16 दिसंबर 2018 को प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन किया गया था. लेकिन इस परीक्षा के 8 प्रश्नों को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाए दायर कि गयी थी. हाईकोर्ट नें अब इन याचिकाओं को खारिज कर दिया है.

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3 साल तक राज्यसेवा की शर्त पर हाईकोर्ट ने पीजी करने की दी इजाजत

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में चिकित्सा अधिकारी के पद पर नियुक्त तीन अभ्यर्थियों को पीजी पूर्ण होने के बाद तीन साल तक राज्य सरकार के तहत सेवा देने की शर्त पर पीजी में शामिल की अनुमति देने के आदेश दिये है. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिये है वो पीजी कोर्ट के लिए याचिकाकर्ता को उसके आरिजनल दस्तावेज प्रदान करे. साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता से 5 लाख का बॉण्ड लेने और पीजी पूर्ण करने के पश्चात 3 साल तक सरकारी सेवा करने के आदेश दिये है. यह आदेश जस्टिस सतीश कुमार शर्मा ने डॉ अजय कुमार सैनी व दो अन्य चिकित्सा अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिये है.

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याचिकाकर्ता का चयन चिकित्सा अधिकारी के रूप में हुआ: 
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का चयन चिकित्सा अधिकारी के रूप में हुआ जिसके बाद सरकार ने उन्हे अलग अलग जगह नियुक्ति दी. इसी दरम्यान उसका चयन नीट पीजी में प्रवेश के लिए भी हो गया. याचिकाकर्ता ने पीजी में प्रवेश के लिए राज्य सरकार से अपने मूल दस्तावेज प्राप्त करने चाहे लेकिन सरकार ने ये कहते हुए इंकार कर दिया कि चिकित्सा अधिकारी के पद पर नियुक्त होने वाले अभ्यर्थि नियुक्ति के 1 साल तक पीजी नहीं कर सकते. वहीं राज्य सरकार की ओर कहा गया कि नियुक्ति आदेश के साथ ही ये शर्त रखी गयी थी कि चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति के एक वर्ष तक वो पीजी में नहीं जा सकते. इसलिए याचिका को स्वीकार नहीं किया जाये. 

हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, सहायक रेडियोग्राफर भर्ती में बैठ पाएंगे अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स 

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जयपुर: राजस्थान सरकार द्वारा 12 जून 2020 को जारी कि गयी सहायक रेडियोग्राफर के 1257 पदों कि भर्ती में डिप्लोमा इन रेडिएशन टेक्नोलॉजी के फाइनल ईयर के स्टूडेंट भी शामिल हों सकेंगे. राजस्थान हाईकोर्ट ने अंतिम वर्ष के स्टूडेंट को बड़ी राहत देते हुए इन स्टूडेंट को परीक्षा में शामिल करने के आदेश दिये हैं. जस्टिस अभय चतुर्वेदी की एकलपीठ ने राज्य सरकार को इन स्टूडेंट के आफलाईन आवेदन स्वीकार करने के साथ बिना कोर्ट की अनुमति के परीक्षा परिणाम जारी नहीं करने के भी आदेश दिये है. एकलपीठ ने राजेन्द्र प्रसाद कुड़ी सहित 13 अन्य स्टूडेंट की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिये हैं. इसके साथ ही राज्य के प्रमुख सचिव चिकित्सा, निदेशक चिकित्सा, चैयरमेन कर्मचारी चयन बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. 

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सहायक रेडियोग्राफर के 1257 पदों पर भर्ती निकाली: 
राजस्थान अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने हाल ही में सहायक रेडियोग्राफर के 1257 पदों पर भर्ती निकाली है. लेकिन मौजूदा स्थिति में वर्ष 2016 की भर्ती के बाद राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल में मात्र 642 ही डिप्लोमाधारी पंजीकृत हैं. इसमें आरयूएचएस के 417, टेक्नीकल बोर्ड एज्यूकेशन जोधपुर के 65 व वर्ष 2000 से पहले 9 माह के डिप्लोमा वाले 160 अभ्यर्थी शामिल हैं. सत्र 2016-17 में पैरामेडिकल कोर्सेज में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा टाइम टेबल अब जारी कर दिया गया है. परीक्षा 9 जुलाई से आयोजित होगी. ऐसे में 14 स्टूडेंट ने याचिका दायर कर परीक्षा में शामिल करने की गुहार लगायी थी. 

स्टूडेंट को नुकसान नहीं होने देने की गुहार लगायी थी:
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट रघुनंदन शर्मा ने पैरवी करते हुए राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल की लेटलतिफी के लिए स्टूडेंट को नुकसान नहीं होने देने की गुहार लगायी थी. जिसे अदालत ने मंजूर करते हुए याचिकाकर्ता स्टूडेंट को परीक्षा में शामिल करने की अनुमति दी है. 

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लेटतलीफी के चलते आवेदन करने से वंचित होना पड़ रहा: 
गौरतलब है कि डिप्लोमा इन रेडिएशन टेक्नोलॉजी के 400 से ज्यादा विद्यार्थियों को राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल की लेटतलीफी के चलते सहायक रेडियोग्राफर भर्ती में आवेदन करने से वंचित होना पड़ रहा है. सत्र 2015-16 में इन विद्यार्थियों ने दो साल के इस डिप्लोमा में प्रवेश लिया था. लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी अभी तक डिप्लोमा कोर्स पूरा नहीं होने से सहायक रेडियोग्राफर के 1257 पदों पर निकली भर्ती के लिए वे आवेदन तक नहीं कर सकते. अभी तक इनकी प्रथम वर्ष की परीक्षा ही हुई है. सैकंड ईयर की परीक्षा बाकी है. 

ऋण पर्यवेक्षक के 300 रिक्त पदों पर शीघ्र होंगी भर्ती- सहकारिता मंत्री

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जयपुर: सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि ऋण पर्यवेक्षकों के रिक्त पदों पर राजस्थान सहकार भर्ती बोर्ड के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए. इससे करीब 300 पदों पर नियुक्ति होगी जिससे बैंकों की कार्य प्रणाली में और गति आएगी. उन्होंने कहा कि केन्द्रीय सहकारी बैंकों के ऋण पर्यवेक्षकों के रिक्त पदों की सूची मंगवाकर भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र संम्पन्न करें. 

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धारा-55 की जांच के लिए निश्चित समय तय किया जाए:
आंजना बुधवार को शासन सचिवालय के मंत्रालय भवन में सहकारिता विभाग से जुड़े अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कई प्रकरणों में धारा- 55 में होने वाली जांच तथा जांच परिणाम वर्षो से लंबित है इससे अपेक्षित कार्यवाही नही हो पाती है उन्होंने कहा कि सहकारिता अधिनियम की धारा-55 में होने वाली जांच के लिए एक निश्चित समय तय किया जाए और यदि किसी कारणवश जांच में देरी हो रही है तो कारणों सहित सक्षम अधिकारी से अवधि बढ़ाने की अनुमति ली जाए. 

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नए किसानों को भी फसली ऋण का वितरण किया जाए:
सहकारिता मंत्री ने कहा कि और नए किसानों को भी फसली ऋण का वितरण किया जाए ताकि उन्हें शून्य प्रतिशत पर फसली ऋण का लाभ मिल सके. उन्होंने निर्देश दिए कि समर्थन मूल्य पर आगामी खरीद में भारत सरकार द्वारा दिए गए खरीद लक्ष्य के अनुरूप ही किसानों के पंजीयन किये जाए. उन्होंने निर्देश दिए कि उपज रहन ऋण में प्रभावी मॉनिटंरिग करें. सहकारिता मंत्री ने निर्देश दिए कि व्यवस्थापकों के कैडर की प्रक्रिया को शीघ्रता से संम्पन्न करें.  

सहकारी बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिवीक्षा वेतन में की वृद्धि

सहकारी बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिवीक्षा वेतन में की वृद्धि

जयपुर: सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि सहकारी बैंकों की सीधी भर्ती से नियुक्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा अनुकम्पा से नियुक्त कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि में देय नियत पारिश्रमिक में दुगुने तक की वृद्धि की गई है. उन्होंने बताया कि इस वृद्धि से 4 संवर्ग वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक, बैंकिग सहायक एवं चुतर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लाभ मिलेगा. संशोधित नियत वेतन 1 जुलाई, 2020 से लागू होगा.

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आंजना ने बताया कि इस निर्णय से राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लि. (अपेक्स बैंक) तथा जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लि. में नियुक्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को लाभ मिलेगा. साथ ही ऐसे अधिकारी एवं कर्मचारी जिनका परिवीक्षा काल पूरा नहीं हुआ है वो भी इस दायरे में आएंगे. रजिस्ट्रार सहकारिता नरेश पाल गंगवार ने बताया कि परिवीक्षा के दौरान चुतर्थ श्रेणी कर्मचारी का वेतन प्रतिमाह 4850 से बढ़ाकर 10640 रूपये, बैंकिग सहायक का वेतन 8910 से बढ़ाकर 11950, प्रबंधक का वेतन 14660 से बढ़ाकर 23860 तथा वरिष्ठ प्रबंधक का वेतन 22180 से बढ़ाकर 30680 रूपये किया गया है. इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए है. 

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हाईकोर्ट ने RAS मुख्य परीक्षा परिणाम जारी करने पर लगी रोक हटायी, नियमों में संशोधन करने से हुआ रास्ता साफ

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने आरएएस भर्ती 2018 की मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी करने पर लगी रोक हटा दी है. राजस्थान सरकार और आरपीएससी की ओर से पेश किये गये प्रार्थना पत्र पर सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस अशोक गौड़ की एकलपीठ ने ये आदेश दिये हैं. हाईकोर्ट के आदेश से अब आरएएस भर्ती का रास्ता साफ हो गया है. गौरतलब है कि सुरज्ञानसिंह व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर 2018 मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी थी. 

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आरएएस व अधीनस्थ सेवा के 1080 पदों की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में सामान्य वर्ग की कट ऑफ 76.06 और ओबीसी वर्ग की कट ऑफ 99.33 रही थी. ओबीसी वर्ग के याचिकाकर्ताओं के अंक सामान्य वर्ग से अधिक होने के बावजूद ओबीसी की कट ऑफ कम रही थी. आरपीएससी ने उन्हें ओबीसी में मानते हुए मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं किया था. जिसे राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौति देने पर हाईकोर्ट ने एक दिसंबर 2018 को मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी करने और भर्ती प्रक्रिया जारी रखने पर रोक लगा दी थी. साथ ही हाईकोर्ट ने सामान्य वर्ग से अधिक अंक वाले ओबीसी अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल करने के आदेश दिये थे.

भर्ती को पूर्ण करने के लिए सरकार ने बदले नियम: 
लंबे समय तक आरएएस भर्ती के मुख्य परीक्षा परिणाम जारी करने पर लगी रोक के चलते हाल ही में 10 जून को राजस्थान सरकार ने बड़ा फैसला लिया. सरकार ने भर्ती के नियम 15 में बदलाव करते हुए मेरिट अधिक होने पर अभ्यर्थियों को पात्र मानने का फैसला लिया. सरकार ने अपने नियम को 2013 से 2018 तक की भर्तियो पर लागू किया है. ऐसे में हाईकोर्ट में दायर कि गयी सभी याचिकाए सारहीन होने के चलते निस्तारित की गयी. 

राज्य में अभी तक आरएएस भर्ती में श्रेणी के अनुमानित रिक्त पदों के 15 गुना आरक्षित अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए बुलाने के पात्र माने जाते रहे हैं, लेकिन अब श्रेणीवार कुल रिक्तियों की बजाय वर्ष में भरी जानेवाली रिक्तियों की कुल अनुमानित संख्या की 15 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का पात्र माना जायेगा. नए नियमों के मुताबिक उक्त मापदंड के हिसाब से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की पर्याप्त संख्या उपलब्ध न हो तो उन आरक्षित अभ्यर्थियों के लिए ढील दी जा सकेगी, जिससे कि मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए संबंधित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की समुचित संख्या मिल सकेगी. तब रिक्तियों की कुल अनुमानित संख्या के विचार की संख्या सीमा में ढील दी जा सकेगी. वहीं सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 2013, 2016 और 2018 की परीक्षा के लिए जिनकी प्रक्रिया पहले हो चुकी हो या शुरू हो चुकी हो, उसमें आरक्षित वर्ग के अनुमानित कुल आरक्षित पदों से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी बुलाये हों तो वे ही अभ्यर्थी पात्र होंगे, जिन्होंने सामान्य श्रेणी के कट ऑफ के बराबर या उससे ज्यादा अंक प्राप्त किये हों.

कमेटी की सिफारिशों के आधार पर निर्णय:
यह संशोधन प्री आरएएस की परीक्षा को यूपीएससी पैटर्न पर करने के लिए बनाई कमेटी की सिफारिशों के आधार पर किया है. पिछले साल सरकार ने कमिटी बनाई थी. कमेटी में आईएएस आशीष मोदी, केके शर्मा, आरएएस जयसिंह शामिल थे. कमेटी ने यूपीएससी पैटर्न का अध्ययन किया. उसकी रिपोर्ट पर सरकार ने नियमों में संशोधन किया है.

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महाधिवक्ता ने कहा सभी अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित: 
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार ने नियमों में बदलाव किया है जिससे सभी अभ्यर्थियो के हित सुरक्षित है और प्रभावित नही होंगे. जिस पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने भी सहमति जतायी. सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के अधिवक्ता त्रिभूवन नारायण सिंह, शोभित तिवाड़ी, ओबीसी की ओर से आर एन माथुर, आर पी सैनी, हिमांशु शर्मा ने पैरवी की. वहीं आरपीएससी की ओर से मिर्जा फैसल बेग और कार्मिक विभाग की आरे से अतिरिक्त महाधिवक्ता एस एस राघव ने पैरवी की.

राजस्थान यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं 15 जुलाई से, 29 अगस्त तक चलेंगी यूजी ओर पीजी फाइनल की परीक्षाएं

जयपुर: राजस्थान यूनिवर्सिटी की यूजी और पीजी फाइनल इयर की परीक्षाएं 15 जुलाई से शुरू होकर 29 अगस्त तक चलेगी. आज राजस्थान यूनिवर्सिटी की ओर से परीक्षाओं के टाइम टेबल को अंतिम रूप दे दिया गया. कल परीक्षाओं का टाइम टेबल राजस्थान यूनिवर्सिटी की बेवसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा. इसी के साथ 31 अगस्त से 9 सितम्बर तक ड्यू पेपरों की परीक्षा आयोजित करवाई जाएगी.

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- करीब 2 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा
- यूजी फाइनल,पीजी फाइनल के स्टूडेट्स की परीक्षाएं
- परीक्षाओं के लिए कुल 170 परीक्षा केंद्र
- इस बार 2 शिफ्टों में होगी परीक्षाएं
- पहले 3 शिफ्टों में हुआ करती थी परीक्षाएं
- लेकिन कोरोना महामारी के चलते 2 शिफ्ट में होगी परीक्षाएं

15 जुलाई से शुरू होने वाली यूजी और पीजी फाइनल इयर की परीक्षाओं के लिए राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है. राजस्थान यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं के लिए कुल 170 परीक्षा केंद्र बनाए गए है कोरोना महामारी की गाइडलाइन को देखते हुए इस बार परीक्षा केंद्रो में बढ़ोतरी की गई है. इस बार परीक्षाएं दो शिफ्ट में आयोजित की जाएगी. पहली पारी सुबह 8 बजे से लेकर 11 बजे तक तो दूसरी पारी 2 बजे से 5 बजे तक आयोजित की जाएगी. दोनों पारियों के बीच परीक्षा केंद्रो को सेनेटाइज भी किया जाएगाय. राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी परीक्षा केंद्रों को कोरोना एडवाजरी फोलो करने के निर्देश भी जारी कर दिए है. 

- प्रत्येक परीक्षा केंद्र से मांगा गया एफिडेवेट
- परीक्षा केंद्र पर कोरोना गाइडलाइन को लेकर मांगा गया एफिडेवेट
- हर पारी के बाद परीक्षा केंद्र को किया जाएगा सेनेटाइज
- यूजी फाइनल ईयर के 1 लाख 20 हजार स्टूडेंट्स देंगे परीक्षा
- वहीं पीजी फाइनल ईयर के 50 हजार स्टूडेंट्स देंगे परीक्षा

कोरोना महामारी को देखते हुए राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी परीक्षा केंद्रों से एफिडेवेट भी मांगा है जिसमें कोरोना महामारी की गाइडलाइन को फोलो किए जाने का ज्रिक है. वहीं सभी स्टूडेट्स को परीक्षा केंद्र पर मास्क व खुद का सेनेटाइजर लाना अनिवार्य होगा. 15 तारीख से शूरू होने वाली इस परीक्षा में यूजी और पीजी फाइनल को मिलाकर कुल 1 लाख 75 हजार स्टूडेंट्स परीक्षा देंगे. जिसमें यूजी फाइनल ईयर के 1 लाख 20 हजार वहीं पीजी फाइनल ईयर के 50 हजार स्टूडेंट्स शामिल है. 

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कोरोना महामारी के चलते इस बार राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रशासन पूरी सावधानी तो बरत रहा है. लेकिन क्या राजस्थान यूनिवर्सिटी के परीक्षा केंद्रों पर कोरोना महामारी की गाइडलाइन की पालना हो पाएगी ये देखने वाली बात होगी.


 

नंगे पैर दिलवाई जा रही बच्चों को बोर्ड की परीक्षाएं, परीक्षा कक्ष के बाहर ही खुलवाए गए जूते और सेंडिल

नंगे पैर दिलवाई जा रही बच्चों को बोर्ड की परीक्षाएं, परीक्षा कक्ष के बाहर ही खुलवाए गए जूते और सेंडिल

जयपुर: 10वीं बोर्ड परीक्षाओं की दो अलग अलग  तस्वीर से आप विभाग की मानसिकता का अंदाजा भलीभांती लगा सकते हैं. ये पहली तस्वीर जिसमें परीक्षा केंद्र के बाहर लगी बच्चों की भीड़ जिसमें सोशल डिस्टेसिंग के नाम पर महज विभाग की खानापूर्ति हो रही है और जरा दूसरी तस्वीर देखिए बना जूते चप्पल के बच्चों को परीक्षा दिलवाई जा रही है. एक तरफ तो विभाग इतना लापरवाह दिख रहा है कि बच्चों की सोशल डिस्टेसिंग नही बना पाया वहीं दूसरी और इतना सजग हो गया कि बच्चों के जूते चप्पल तक उतरवा लिए. 

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- परीक्षा केंद्र के बाहर बच्चों का लगा बालमेला
- स्कूल प्रशासन नहीं करवा पाया बच्चों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग
- थर्मल स्क्रेनिंग के वक्त भी बच्चे दिखे ग्रुपों में
- परीजनों में सोशल डिस्टेसिंग के नहीं होने से दिखा आक्रोश

राजधानी के गांधीनगर स्थित सरकारी स्कूल का ये नजारा आप देख रहे हैं. आज से 10वीं की शेष रही बोर्ड की परीक्षाएं शूरू होनी थी इससे पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचे ये बच्चें मानों किसी बाल मेले में आए हो. सोशल डिस्टेसिंग को लेकर स्कूल प्रशासन को कोई भी परवाह इन बच्चों की नहीं दिखी. यहां तक परीक्षा केंद्र में प्रवेश के बाद भी बच्चों की ये ही तस्वीर देखने को मिली. एक ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 10वीं बोर्ड की परीक्षाओं को ये ही देखकर आयोजित करवाई कि शिक्षा विभाग नियमों का पालन सख्ती के साथ करवाएगा. लेकिन देखिए इस स्कूल प्रबंधन को बच्चों की जान के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है. शिक्षक ही होता है जो बच्चों को सही राह दिखाता है लेकिन आज कोराना के इस दौर में शिक्षक राह दिखाना दूर उनकी सुध भी नहीं ले रहा  है. 

- नंगे पैर दिलवाई जा रही बच्चों को बोर्ड की परीक्षाएं
- परीक्षा कक्ष के बाहर ही खुलवाए गए बच्चों से जूते और सेंडिल
- जितनी सख्ती जूते और सेडिंल खोलने में विभाग ने दिखाई
- काश सोशल डिस्टेसिंग करवाने में भी दिखाई होती
- जूते और सेंडिल उतरवाने का नहीं है कोई नियम
- प्रतियोगी परीक्षाओं में देखने को मिलते है इस तरह के नियम

10वीं बोर्ड परीक्षा में शूरू होने से पहले छात्र-छात्राओं से उनके जूते और सेंडिल तक खुलवा लिए गए. यहां शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने बहुत ही तत्परता दिखाई. जबकि बोर्ड के नियमों में इस तरह का कोई उल्लेख नहीं है. आमतौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में ही इस तरह के नियम देखने को मिलते है. लेकिन जब बच्चों के जान पर आई तो स्कूल प्रशासन ने सोशल डिस्टेसिंग तक नहीं करवाई लेकिन जब बच्चों के जूते खुलवानी की बात आई तो इतनी तत्परता दिखाई की बच्चों को नंगे पैर ही परीक्षा देनी पड़ी. 

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कोरोना महामारी के बीच 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं तो शुरू हो गई लेकिन जिस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ती दिखी उससे ना केवल मुख्यमंत्री चिंतित होगे बल्कि बच्चों के परिजनों के मन में भी एक डर देखा जा रहा है.  

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने दसवीं और बारहवीं कक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं. डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने यूपी बोर्ड का रिजल्ट जारी किया है. रिजल्ट जारी करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिप्टी सीएम ने कहा कि इस बार यूपी बोर्ड का रिजल्ट पिछली बार से बेहतर रहा है. दिनेश शर्मा ने कहा कि नकलविहीन परीक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए. तकनीकी का पूरा इस्तेमाल किया गया है.

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10वीं में 83.31 प्रतिशत बच्चे पास हुए: 
लंबे वक्त से रिजल्ट का इंतजार कर रहे विद्यार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए दसवीं और 12वीं के नतीजे देख सकते हैं. 10वीं में 83.31 प्रतिशत बच्चे पास हुए हैं, जिसमें रेगुलर 83.44 फीसदी और प्राइवेट- 65.03 फीसदी बच्चे उत्तीर्ण हुए. वहीं यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं में बागपत के छात्र-छात्रा ने टॉप किया है. बागपत की रिया जैन 96.67 प्रतिशत अंकों के साथ टॉपर रहीं तो वहीं 12वीं में अनुराग मलिक ने 97% अंकों के साथ टॉप किया है. 

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लड़कों के मुकाबले लड़कियां का प्रदर्शन बेहतर रहा:
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि दसवीं और बारहवीं कक्षा में कुल 51,30,481 परीक्षार्थी शामिल हुए. दसवीं कक्षा में 27,44,976 परीक्षार्थी और बारहवीं कक्षा में 23,85, 505 परीक्षार्थी शामिल रहे थे. इस साल के रिजल्ट में लड़कों के मुकाबले लड़कियां का प्रदर्शन बेहतर रहा है. दसवीं कक्षा में 23 लाख 982 छात्र पास विद्यार्थी पास हुए हैं. यूपी सरकार ने टॉपर्स को लैपटॉप देने की घोषणा की है. इसके अलावा दसवीं और बारहवीं कक्षा के टॉपर्स विद्यार्थियों को सरकार एक लाख रुपये की सहायता राशि भी देगी. 20 टॉपर्स के घर तक सरकार पक्की सड़क बनाएगी.
 

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