जयपुर VIDEO: प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को अब मिल सकेगा गोल्डन ऑवर में बेस्ट ट्रीटमेंट, न्यूरोट्रोमा सोसायटी ऑफ इंडिया ने जारी की नई गाइडलाइन

VIDEO: प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को अब मिल सकेगा गोल्डन ऑवर में बेस्ट ट्रीटमेंट, न्यूरोट्रोमा सोसायटी ऑफ इंडिया ने जारी की नई गाइडलाइन

जयपुर: प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को गोल्डन ऑवर में "जीवनदायनी" ट्रीटमेंट मिल सकेगा. जिला स्तर पर बैठे चिकित्सकों को यह पता रहेगा कि सिर की चोट लगे हुए मरीजों को किस तरह बेस्ट ट्रीटमेंट दिया जाए ताकि उनकी जान बच सकें. जी हां यह सब कुछ संभव होगा न्यूरोट्रोमा सोसायटी ऑफ इंडिया की नई गाइडलाइन से आखिर क्या है गाइडलाइन और आम मरीजों को कैसे मिलेगा इसका फायदा. 

ब्रेन इंजरी देश में होने वाली असमय मौतों का छठा बड़ा कारण है. सर्वविदित है कि देश में ब्रेन इंजरी के कारण हज़ारों लोगों की मौत होती है. जबकी लाखों लोग ब्रेन इंजरी का देश जीवनभर झेलते हैं. बावजूद इसके आज भी ब्रेन इंजरी होने पर मरीजों को तत्काल इलाज नहीं मिल पाता है. जो मरीज समय पर अस्पताल पहुंच जाते हैं उन्हें भी जिला या पीएसची-सीएचसी स्तर पर ब्रेन इंजरी का प्रोटोकॉल के तहत इलाज नहीं मिल पाता है. जिसको देखते हुए  न्यूरोट्रोमा सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा ब्रेन इंजरी के इलाज के लिए एक गाइडलाइन तैयार की है. इस गाइडलान को चार न्यूरोसर्जन ने तैयार किया है. जिसमें एसएमएस अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ.वीडी सिन्हा भी शामिल हैं. 

गाइड लाइन में चार पार्ट पर फोकस किया गया है. इसमें जागरूकता,प्री हॉस्पिटल केयर, अस्पताल में इलाज और रिहैबिलिटेशन शामिल हैं. इस गाइडलाइन के एडिटर और एसएमएस अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ.वीडी सिन्हा ने बताया कि इस गाइडलाइन को स्वास्थ्य मंत्रालय भेजा जाएगा जिसके बाद देशभऱ के सभी चिकित्सकों को गाइडलाइन दी जाएगी. उन्होंने बताया कि हर जिला अस्पताल में इमरजेंसी केयर की सुविधा नहीं है,ऐसे में इस गाइडलाइन के जरिए अन्य चिकित्सक ब्रेन इंजरी के मरीजों का इलाज कर पाएंगे.

आखिर क्यों जरूरी ब्रेन इंजरी के इलाज गाइडलाइन

एक आंकडे के अनुसार महज 24 फीसदी मरीज ही गोल्डन ऑवर्स यानी 1 घंटे में अस्पताल पहुंच पाते हैं

30 फीसदी मरीज 2 से 3 घंटे के भीतर अस्पताल आते है

19 फीसदी मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें 4 से 6 घंटे में अस्पताल पहुंचाया जाता है

जबकी 20 फीसदी मरीज तो 24 घंटों में भी अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं

जो पहुंचते हैं उन्हें भी न्यूरोसर्जन की किल्लत के कारण प्रोपर इलाज नहीं मिल पाता है

वरिष्ठ न्यूरो सर्जनस का मानना यह है कि अस्पताल में मौजूद चिकित्सक यदि गाइडलाइन का गहनता से अध्ययन करेंगे तो काफी तादाद में मरीजों की जान बचाई जा सकेगी

दरअसल, सड़क हादसों में ब्रेन इंजरी के शिकार ज्यादातर 20 से 40 साल की उम्र के लोग होते हैं. इस उम्र के लोगों के घायल या फिर मौत होने का असर पूरे परिवार पड़ता है. पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक रुप से टूट जाता है. ऐसे में गाइडलाइन में जागरुकता के अलावा रिहैबिलिटेश पर भी फोकस किया गया है. जागरुकता में दुर्घटनाएं कैसे बचा जा सकता है, इस पर ध्यान दिया गया है तो प्री हॉस्पीटल केयर में अस्पताल तक मरीज को पहुंचाने में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए का जिक्र किया गया है. लेकिन, मरीज के घायल होने,अस्पताल में इलाज के अलावा रिहेबिलिटेशन पर भी बहुत फोकस किया गया है. गाइडलाइन में बताया गया है कि मरीज का ऑपरेशन होने के बाद रिहेबिलिटेशन भी बहुत जरुरी है. अलग-अलग थैरेपी से मरीज की रिकवरी तेज की जा सकती है. ताकी वो फिर से स्वस्थ्य होकर काम कर सके.

इस गाइडलाइन को चार चिकित्सकों ने मिलकर तैयार किया है

इन चिकित्सकों में डॉ.मैथ्यु जोसेफ,डॉ.सुमीत सिन्हा,डॉ.धवल शुक्ला और डॉ.वीडी सिन्हा शामिल है

ये चारों डॉक्टर्स देश के जाने-माने न्यूरोसर्जन में शामिल हैं. 

हमारे देश में महज 24 फीसदी मरीज गोल्डन ऑवर्स में अस्पताल पहुंचते हैं लेकिन कई विकसीत देश अब प्लेटेनियम ऑवर्स यानी आधे घंटे में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में कामयाब हो चुके हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि ज्यादातर मरीजों की ना सिर्फ जान बच पा रही है बल्की अन्य गंभीर शारीरिक दिक्कतें भी कम हो रहे हैं. ऐसे में उम्मीद है कि यह गाइडलाइन सड़क हादसों में हेड इंजरी का शिकार होने वाले मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी.
 

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