VIDEO: जल संकट से जूझ रही प्रदेश की जनता, 11 कलेक्टर्स ने जिले में नहीं मानी पानी की समस्या

Naresh Sharma Published Date 2019/05/19 11:17

जयपुर: पूरे प्रदेश में जलसंकट गहराया हुआ है. खुद मुख्यमंत्री इसको लेकर गंभीर हैं और जलदाय विभाग के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं, लेकिन सीएमओ द्वारा कलेक्टर्स से प्राप्त फीडबैक कुछ अलग ही बात कहता है. प्रदेश के 33 में से 11 जिला कलक्टर का मानना है कि उनके जिले में पेयजल को लेकर समस्या नहीं हैं. खास बात यह है कि जिन कलक्टर्स ने यह बात कही है, वहां पर जनता पानी के लिए सड़कों पर उतर रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कलक्टर्स का फीडबैक महज कागजी है. 

सूरज का पारा चढ़ने के साथ ही प्रदेश में जल संकट भी बढ़ने लगा है
सूरज का पारा चढ़ने के साथ ही प्रदेश में जल संकट भी बढ़ने लगा है. कहीं पर जनता सड़क पर उतर रही है, तो कहीं पर जलदाय विभाग के दफ्तरों पर ताले लगाए जा रहे हैं. प्रमुख सचिव संदीप वर्मा रोज सुबह 10 बजे अधिकारियों की मीटिंग ले रहे हैं, तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी चिंता जताते हुए अधिकारियों की मैराथन बैठक की. जल संकट दूर करने के उपायों पर विचार किया. इस बीच सीएमओ ने सभी जिला कलक्टर्स से भी पेयजल की स्थिति पर सभी जिला कलेक्टर्स से फीडबैक मंगाया. यह रिपोर्ट फर्स्ट इंडिया के पास हैं, लेकिन इस देखकर आप भी चौंक जाएंगे. 33 में से 11 कलक्टर का दावा है कि उनका यहां कोई समस्या ही नहीं है. एक नजर आप भी देख लीजिए,,,,,,,,,,

- बीकानेर कलक्टर का मानना है कि नहर बंदी के बाद स्थिति सामान्य है.
- चितौड़गढ कलक्टर के अनुसार टैंकर से पानी सप्लाई हो रहा है.
- हनुमानगढ़ कलक्टर ने साफ लिखा है - पेयजल की कोई समस्या नहीं है.
- जालौर कलक्टर के अनुसार भी पेयजल की कोई समस्या नहीं है. 
- झुंझुनू कलक्टर ने लिखा - पेयजल की कोई समस्या नहीं है. 
- जोधपुर कलक्टर ने कहा - कोई बड़ी समस्या नहीं है.
- करौली व कोटा कलक्टर की रिपोर्ट भी ऐसी ही आई है. 
- प्रतापगढ़ व राजसमंद कलक्टर भी नहीं मानते समस्या. 
- सवाई माधोपुर व सीकर में भी सामान्य सप्लाई का दावा. 
- टोंक कलक्टर का फीडबैक - पेयजल की कोई समस्या नहीं. 

अब आइये आपको जलदाय विभाग की रिपोर्ट दिखाते हैं। यह वह रिपोर्ट हैं, जो पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री के साथ मीटिंग के दौरान दिखाइ गई थी. इसमे 15 जिलों को समस्याग्रस्त बताया गया हैं. इनमें बीकानेर, जोधपुर, हनुमानगढ़, जालौर व झुंझुनू के नाम शामिल हैं. यानी खुद जलदाय विभाग मानता है कि यहां पर समस्या हैं, लेकिन कलक्टर कुछ अलग ही फीडबैक दे रहे हैं.

कलक्टर के फीडबैक जलदाय विभाग से अलग
जालौर कलक्टर कहते हैं कि कोई समस्या नहीं है, जबकि यहां के भीनमाल में चार दिन से पानी आता है. झुंझुनू कलक्टर को भी पेयजल समस्या नहीं दिख रही, लेकिन खेतड़ी सहित कई कस्बों में 72 घंटे के अंतराल से पानी सप्लाई हो रहा है. जोधपुर के पीपाड़सिटी व राजसमंद के देवगढ़ के अलावा प्रतापगढ़ का भी यही हाल है. टोंक कलक्टर कहते हैं कि पानी की समस्या नहीं है, जबकि यह जिला बीसलपुर बांध से प्यास बुझाता है और बांध में पानी नहीं है. टोंक, निवाई, मालपुरा व टोडारायसिंह में दो दिन के अंतराल से पानी आता है. चितौडगढ़ कलक्टर भी दावा कुछ भी कर रहे हो, लेकिन इस जिले के निंबाहेडा, बड़ी सादड़ी, कपासन व बेगूं में 48 घंटे के अंतराल से पानी आता है. हनुमानगढ़ के नोहर, भादरा व रावतसर में भी स्थिति अच्छी नहीं है. 

पेयजल की स्थिति से विपरीत कलेक्टर्स की रिपोर्ट
मामला साफ है कि प्रदेश में पेयजल की जो स्थिति है उसके विपरीत कलक्टर ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या महज बंद कमरों में कागजी कार्यवाही करके रिपोर्ट तैयार की जा रही है, क्या जनता की परेशानी से कलक्टर महोदय अनजान है. अगर ऐसा है, तो फिर जनता के लिए ये अफसर कर भी क्या सकते हैं?

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