लेबनान में आर्थिक हालात को लेकर सड़कों पर लोगों का प्रदर्शन, कई घायल

लेबनान में आर्थिक हालात को लेकर सड़कों पर लोगों का प्रदर्शन, कई घायल

लेबनान में आर्थिक हालात को लेकर सड़कों पर लोगों का प्रदर्शन, कई घायल

बेरूत: लेबनान में बिगड़ते आर्थिक हालात (Economic Situation ) और खराब होते जीवन स्तर को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों तथा सुरक्षाबलों के बीच हुईं झड़पों में कई प्रदर्शनकारी और 10 सैनिक घायल हो गए. विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर शीर्ष सरकारी संस्थानों के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया.

लेबनान में पिछले 20 महिनों से आर्थिक हालात खराब:
लेबनान पिछले 20 महीने से सबसे खराब आर्थिक हालात का सामना कर रहा है, जिसे लेकर शनिवार को पूरे देश में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए. विश्व बैंक के मुताबिक लेबानान की वर्तमान आर्थिक स्थिति पिछले 150 वर्षों के दौरान विश्व में देखी गईं सबसे खराब स्थितियों में से एक है. लेबनान आर्थिक संकट के अलावा एक बड‍़े राजनीतिक संकट का भी सामना कर रहा है. देश में अगस्त 2020 से ही कोई सरकार नहीं है. देश के दक्षिणी पोत शहर सिडोन और दूसरे सबसे बड़े शहर त्रिपोली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. इसके अलावा राजधानी बेरूत में भी कई जगह प्रदर्शन हुए.

लेबनान की मुद्रा भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची:
लेबनान ईंधन, दवाओं और चिकित्सा (Fuel, drugs and medicine) सामग्री सहित महत्वपूर्ण उत्पादों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिसको लेकर आम लोगों में बहुत गुस्सा है. लेबनान की मुद्रा भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है. हालात ये हैं कि लेबनान के 18 हजार पाउंड की कीमत एक अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) के बराबर रह गई है. देश की सेना ने कहा कि मोटरसाइकिलों पर सवार प्रदर्शनकारियों ने त्रिपोली में सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड फेंके, जिसमें नौ सैनिक घायल हो गए और एक अन्य सैनिक पत्थर लगने से घायल हो गया. प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी संस्थानों पर भी हमला किया.

जल्द सुधार होने की कोई उम्मीद नहीं:
लेबनान में स्थिति में जल्द सुधार होने की कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि राष्ट्रपति मिशेल औन और प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत साद हरीरी के बीच राजनीतिक गतिरोध के कारण पिछले अक्टूबर से ही सरकार का गठन नहीं हो सका है. वहीं, आर्थिक संकट पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत भी पिछले साल से स्थगित है.

लेबनान में 2019 से अब तक हजारों लोग बेरोजगार हो चुके हैं और 60 लाख की आबादी वाले देश में आधे से अधिक जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे है.

 

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