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नगर अराध्य लक्ष्मीनाथजी मंदिर में फाग का आयोजन शुरू

नगर अराध्य लक्ष्मीनाथजी मंदिर में फाग का आयोजन शुरू

जैसलमेर: स्वर्णनगरी जैसलमेर में होल्काष्टक से ही होली की धूम शुरु हो गई है. सोनार दुर्ग स्थित नगर अराध्य लक्ष्मीनाथ जी के मंदिर में भगवान के साथ जनसमूह के साथ मंदिर में होली खेली. फाग के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था. जिसके बाद पुष्करणा समाज के विभिन्न धड़ों की पारंपरिक गैर निकली. जैसलमेर में होली को लेकर वर्षों से यह परपंरा चल रही है कि होल्काष्टमी से लक्ष्मीनाथजी मंदिर में फाग का आयोजन शुरू हो जाता हैं.  

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विभिन्न छंदों पर ठाकुरजी के साथ फाग के गीतों की धूम: 
उसके बाद जैसलमेर के राज परिवार खुद फागियों के बीच आकर भगवान के साथ होली खेलते हैं. उसी परंपरा के अनुसार जैसलमेर के पूर्व महारावल बृजराजसिंह मंदिर पहुंचे तथा फागियों के बीच भगवान के साथ होली खेली. ब्रजभाषा सहित विभिन्न छंदों पर ठाकुरजी के साथ फाग के गीतों की धूम है. इस दौरान विभिन्न फाग के गीतों के पर तबले व झांझ के साथ समा बांधा जाता है. बड़ी संख्या में होली के रसिया फागोत्सव में हिस्सा लेने पहुंचते हैं. फाग के दौरान मंदिर परिसर खचाखच भरा रहता है. तुझे किन होली खिलाई, होय होली खेले, हे लक्ष्मोरोनाथ, अंजनी सुत सहित विभिन्न भजनों पर लक्ष्मीनाथजी के साथ श्रद्धालु फाग खेलते है। माना जाता है कि फाग के दौरान खुद लक्ष्मीनाथ जी श्रद्धालुओं के साथ फाग खेलते हैं. एकादशी के दिन जैसलमेर के महारावल सहित राजपरिवार के सदस्य भी फाग के दौरान उपस्थित रहे. महरावल बृजराजसिंह ने लक्ष्मीनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा की और गुलाल उड़ाकर होली का आनद लिया.

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होली के गीतों को गाकर पर्व की खुशी का इजहार:
जैसलमेर मे होली पर्व से पूर्व एकादशी की तिथि पर फाग खेलने के बाद यहां के पुष्करणा ब्राह्मणों की गेरें निकलनी शुरू हो जाती है, जिसमें पुरोहित, व्यास, बिस्सा, केवलिया, चूरा, रंगा व ओझा सभी अपनी अपनी अलग गेरें निकालते हैं और मंदिर पैलेस पर भी जाते हैं. मंदिर पैलेस से लौटने के बाद गेरें अपने अपने मोहल्लो में चली जाती हैं और होली से एक दिन पूर्व गड़ीसर तालाब पर बनी प्राचीन बगेचियों में गोठ करने के लिए चंदा एकत्रित किया जाता है. जब ये गेरें अपने भाई-बंधुओ के मोहल्लों से बाहर निकल आती है तो गेरिए होली के रंग में रंगे नजर आते है और होली के गीतों को गाकर पर्व की खुशी का इजहार करते हैं. मरूप्रदेश के लोक जीवन में भिन्न भिन्न पर्वो, त्योहारों और मेले मगरियों में गीतों का महत्व है, ठीक उसी तरह होली के पर्व पर भी यहां के लोग अपने कठोर जीवन को सरल बनाकर फाग के गीतों में रम रहे हैं. लक्ष्मीनाथ मंदिर में सदियों से सूरदास, मीरा, चन्द्रसखी आदि कवियों के ब्रज और राजस्थानी में रचे हुए गीत गाए गाये जा रहे हैं. 

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