जैविक खेती से बदलने लगी पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/30 09:04

जोधपुर। राजस्थान में अकाल के चलते बरसों से पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर हमेशा अच्छी फसलों के लिहाज से धुंधली ही रही है। मगर पिछले कुछ सालों से इंद्र देवता के मेहरबान रहने के बाद जरूर हालात सुधरे है लेकिन बदलती जलवायु ने रासायनिक खेती के बजाय जिस तरह जैविक खेती का रास्ता खोला है उससे किसानों को काफी उम्मीदें है। किसानों के साथ-साथ कृषि अधिकारी भी मानने लगे है कि जैविक खेती के जरिए ही किसानों के साथ-साथ राजस्थान की भी तकदीर व तस्वीर बदली जा सकती है। 

पश्चिमी राजस्थान में बदलती जलवायु ने रासायनिक खेती की बजाय जैविक खेती का विकल्प खुला कर दिया है। लगातार जैविक खेती के लिए प्रोत्साहन के आधार पर जैविक खेती से मुनाफा कमा रहे राज्य के कई किसान खेत में ही वर्षा जल संरक्षण, लाभदायक कीटों का संरक्षण खाद, कीट नियंत्रित बनाकर अन्य किसानों के लिए प्रेरक के रूप में सामने आए हैं। जोधपुर जिले के दांतीवाड़ा और मथानिया क्षेत्र के उजलिया गांवों को आदर्श जैविक गांव के लिए चयनित किया है। दांतीवाड़ा में तिल व मूंग और उजलिया में जीरे व इसबगोल का जैविक उत्पादन किया जाएगा। यहां जैविक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण और जैविक बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। 

जैविक खेती के चलते किसान खेत में ही बीज, खाद और आम नीम धतूरे से कीट नियंत्रक बना सकेंगे। जैविक खेती की लागत रासायनिक खेती से काफी कम है। साथ ही रासायनिक खेती से कम हो रही मिट्टी उत्पादकता जैविक खेती बढाएगी। जैविक खेती स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। वर्षा की अनिश्चितता में जैविक खेती फसलों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है।  कृषि अधिकारी बीके द्विवेदी बताते है कि यदि इसमें किसान और अधिक रूचि ले और सरकार की ओर से विशेष प्रावधान निर्धारित हो तो यह जेविक खेती काफी लाभकारी हो सकती है। इसी तरह किसान रतनलाल डागा और तुलछाराम ने भी राज्य सरकार से जैविक खेती को बढावा देने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि यह एक सर्वविदित तथ्य हैं की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि हैं और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती हैं। हरित क्रांति के समय से बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए एवं आय की दृष्टि से उत्पादन बढ़ाना आवश्यक हैं। अधिक उत्पादन के लिए खेती में अधिक मात्रा में रसायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता हैं, जिससे सामान्य एवं छोटे कृषक के पास कम जोत में अत्यधिक लागत लग रही हैं और जल, भूमि, वायु और वातावरण भी प्रदूषित हो रहें हैं। साथ ही खाद्द्य पदार्थ जहरीले हो रहे हैं। ऐसे में किसान एवं पर्यावरण के लिए जैविक खेती लाभ का सौदा हैं। जैविक खेती से किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता पूर्ण फसल प्राप्त हो सकती हैं।
राजीव गौड़ फर्स्ट इंडिया न्यूज जोधपुर
 

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