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जैविक खेती से बदलने लगी पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर

जैविक खेती से बदलने लगी पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर

जोधपुर। राजस्थान में अकाल के चलते बरसों से पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर हमेशा अच्छी फसलों के लिहाज से धुंधली ही रही है। मगर पिछले कुछ सालों से इंद्र देवता के मेहरबान रहने के बाद जरूर हालात सुधरे है लेकिन बदलती जलवायु ने रासायनिक खेती के बजाय जिस तरह जैविक खेती का रास्ता खोला है उससे किसानों को काफी उम्मीदें है। किसानों के साथ-साथ कृषि अधिकारी भी मानने लगे है कि जैविक खेती के जरिए ही किसानों के साथ-साथ राजस्थान की भी तकदीर व तस्वीर बदली जा सकती है। 

पश्चिमी राजस्थान में बदलती जलवायु ने रासायनिक खेती की बजाय जैविक खेती का विकल्प खुला कर दिया है। लगातार जैविक खेती के लिए प्रोत्साहन के आधार पर जैविक खेती से मुनाफा कमा रहे राज्य के कई किसान खेत में ही वर्षा जल संरक्षण, लाभदायक कीटों का संरक्षण खाद, कीट नियंत्रित बनाकर अन्य किसानों के लिए प्रेरक के रूप में सामने आए हैं। जोधपुर जिले के दांतीवाड़ा और मथानिया क्षेत्र के उजलिया गांवों को आदर्श जैविक गांव के लिए चयनित किया है। दांतीवाड़ा में तिल व मूंग और उजलिया में जीरे व इसबगोल का जैविक उत्पादन किया जाएगा। यहां जैविक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण और जैविक बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। 

जैविक खेती के चलते किसान खेत में ही बीज, खाद और आम नीम धतूरे से कीट नियंत्रक बना सकेंगे। जैविक खेती की लागत रासायनिक खेती से काफी कम है। साथ ही रासायनिक खेती से कम हो रही मिट्टी उत्पादकता जैविक खेती बढाएगी। जैविक खेती स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। वर्षा की अनिश्चितता में जैविक खेती फसलों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है।  कृषि अधिकारी बीके द्विवेदी बताते है कि यदि इसमें किसान और अधिक रूचि ले और सरकार की ओर से विशेष प्रावधान निर्धारित हो तो यह जेविक खेती काफी लाभकारी हो सकती है। इसी तरह किसान रतनलाल डागा और तुलछाराम ने भी राज्य सरकार से जैविक खेती को बढावा देने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि यह एक सर्वविदित तथ्य हैं की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि हैं और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती हैं। हरित क्रांति के समय से बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए एवं आय की दृष्टि से उत्पादन बढ़ाना आवश्यक हैं। अधिक उत्पादन के लिए खेती में अधिक मात्रा में रसायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता हैं, जिससे सामान्य एवं छोटे कृषक के पास कम जोत में अत्यधिक लागत लग रही हैं और जल, भूमि, वायु और वातावरण भी प्रदूषित हो रहें हैं। साथ ही खाद्द्य पदार्थ जहरीले हो रहे हैं। ऐसे में किसान एवं पर्यावरण के लिए जैविक खेती लाभ का सौदा हैं। जैविक खेती से किसानों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता पूर्ण फसल प्राप्त हो सकती हैं।
राजीव गौड़ फर्स्ट इंडिया न्यूज जोधपुर
 

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ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा योजना स्वैच्छिक

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जयपुर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2020 में ऋणी काश्तकारों के लिए भी स्वैच्छिक रहेगी. फसल बीमा से अलग रहने के इच्छुक ऋणी किसान को आगामी 8 जुलाई तक संबंधित बैंक शाखा में आवेदन करना होगा. कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि फसल बीमा योजना में खरीफ-2020 से केन्द्र सरकार की ओर से कई बदलाव किए गए हैं. 

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किसानों के लिए फसल बीमा स्वैच्छिक किया गया: 
इसके तहत वित्तीय संस्थान से फसली ऋण लेने वाले किसानों के लिए फसल बीमा स्वैच्छिक किया गया है. फसली ऋण लेने वाले किसानों को 8 जुलाई तक संबंधित बैंक में जाकर फसल बीमा से पृथक रखने के लिए निर्धारित प्रपत्र में लिखित में आवेदन करना होगा. आवेदन पत्र बैंक शाखाओं में उपलब्ध है. कटारिया ने बताया कि केन्द्र सरकार ने किसानों के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की है. 

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सरदारशहर: सरदारशहर तहसील में पिछले एक हफ्ते में बड़ी संख्या में आये टिड्डी दलों ने नरमा, कपास और मूंगफली की फसलों को पूरी तरह चट कर दिया है. जिसके चलते मानो किसानों की कमर टूट गई हो. टिड्डी दल के आने की पहले से सूचना होने के बावजूद भी प्रशासन की ओर से इनको रोकने की किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है. इसी कड़ी में अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान एसडीएम ऑफिस पहुंचे. 

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किसानों ने जताया विरोध:
आक्रोशित किसान उपखंड अधिकारी कार्यालय में जमीन पर लेट गए और अपना विरोध प्रकट किया. किसानों ने उपखंड अधिकारी रीना छिंपा को ज्ञापन सौंपकर टीडी दल से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा दिलवाने और लगातार आ रहे टीडी दल पर नियंत्रण करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा. अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश महामंत्री छगनलाल चौधरी ने बताया की बड़ी संख्या में आ रहे टीडी दल को मारने के लिए ट्रैक्टर या यहां पर उपलब्ध उपकरण निष्क्रिय साबित हो रहे हैं अगर इन टिड्डी दलो को मारना है तो हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज के जरिए इनको मारा जा सकता है इसलिए सरकार को जल्द से जल्द हवाई मार्ग से इन टिड्डी दलों को नष्ट करना चाहिए.

पहले मौसम की मार से तबाह हुई थी फसलें:
किसानों ने बताया कि किसान पहले से दुखी है पहले बिन मौसम हुई ओलावृष्टि और फिर कोरोना के चलते मजदूर नहीं मिलने से किसानों को भारी नुकसान हुआ और फिर जब किसानों की फसल पक चुकी थी उस समय बिन मौसम हुई बारिश ने भी किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है और अब टिड्डी दलों ने किसानों की नरमे कपास और मूंगफली की फसल को 100 प्रतिशत नष्ट कर दिया है. गौरतलब है कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में किसानों ने अपने अन्य के भंडार खोल दिए थे जिससे राज्य सरकार व केंद्र सरकार को बहुत बड़ा संबल प्राप्त हुआ था लेकिन अब किसानों पर टिड्डी रूपी महा संकट आ खड़ा हुआ है जिस की ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए जिससे किसान आगे आने वाली सावनी की फसल को बुवाई कर सके.

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करौली: जिले में टिड्डी पर नियंत्रण के लिए कृषि विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है. अभियान के तहत देर रात सपोटरा तहसील के गोविंदपुरा व सलेमपुर क्षेत्र में पेड़, झाड़ीयों व अन्य स्थानों पर दमकल की मदद से दवा का स्प्रे किया गया. जिससे क्षेत्र में 90% से अधिक टिड्डी खत्म हो गई. अभियान के दौरान कृषि उपनिदेशक रामलाल जाट सहित कृषि विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे. 

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किसानों को ध्वनि यंत्र बजाकर भगाने की सलाह दी जा रही:
कृषि उपनिदेशक बीडी शर्मा ने बताया कि जिले में टिड्डी के प्रकोप से निपटने के लिए रणनीति बनाकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है. अभियान के तहत दमकल, ट्रैक्टर व अन्य उपकरणों के माध्यम से उनके विश्राम स्थल पर दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है. साथ ही दिन में किसानों को ध्वनि यंत्र बजाकर भगाने की सलाह दी जा रही है. जिसके चलते जिले में टिड्डी द्वारा फसल और पेड़ों को नुकसान ना के बराबर हुआ है. देर रात गोविंदपुरा सलेमपुर क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान 2 किलोमीटर सर्किल क्षेत्र में दवाओं का छिड़काव कर टिड्डियों को खत्म किया गया. दवाओं के छिड़काव के कारण क्षेत्र में जमीन पर टिड्डियों की चादर सी बिछ गई. 

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सहकारी समितियों में कोल्ड़ स्टोरेज, गोदाम एवं प्रोसेसिंग यूनिट की होगी स्थापना

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जयपुर: क्रय-विक्रय सहकारी समितियों एवं ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कोल्ड स्टोरेज, गोदाम निर्माण, प्रोसेसिंग यूनिट सहित कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए संयत्रों की स्थापना की जाएगी. समिति एवं क्षेत्रवार स्थितियों का आंकलन कर उपयोगिता के आधार पर प्रस्ताव प्राप्त किये जाएंगे. कृषि गतिविधियों की चेन सप्लाई सिस्टम को विकसित करने की दिशा में जो भागने बड़ा कदम उठाया है. 

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सभी सहकारी समितियों का 31 जुलाई तक डेटा होगा ऑनलाइन: 
आज पंत कृषि भवन में कृषि प्रसंस्करण, खरीफ फसली ऋण, उपज रहन ऋण योजना, एमएसपी पर सरसों एवं चना खरीद सहित अन्य बिन्दुओं पर जिला स्तर पर पदस्थापित अधिकारियो से वीडियो कान्फ्रेंसिग की गई. सहकारिता एवं कृषि विभाग के प्रमुख सचिव नरेश पाल गंगवार ने वीसी के जरिए कार्य योजना पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि राजस्थान सहकारी अधिनियम 2001, राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1958 तथा स्पोर्ट्स एक्ट के तहत पंजीकृत संस्थाओं का डेटा 31 जलाई तक ऑनलाइन कर दिया जाये. जिससे पारदर्शिता के साथ सूचनाऐं आमजन को मिल सके एवं बेहतर मॉनिटरिंग भी संभव हो सके. 

20 लाख किसानों को 6 हजार करोड़ का सहकारी फसली ऋण वितरित:
उन्होंने निर्देश दिए कि जिला उप रजिस्ट्रार प्राथमिकता के साथ इस कार्य को पूरा करें. फसली ऋण वितरण में ऑनलाइन प्रणाली अपनाने से अच्छे रिजल्ट आए है. इस प्रणाली के कारण दो माह में ही लगभग 20 लाख किसानों को 6 हजार 18 करोड़ रूपये का खरीफ फसली ऋण का वितरण किसानों को हो चुका है. उन्होंने निर्देश दिए कि नए किसानों को भी फसली ऋण प्रदान किया जाये तथा जो जिले अपने यहां फसली ऋण के लिए और नए किसानों को जोड़ना चाहते है. वे प्रस्ताव भेजें तो उन्हें अनुमति प्रदान की जाएगी. प्रमुख सचिव नरेश पाल गंगवार ने 50 प्रतिशत से कम ऋण वितरण वाले 5 जिलों के प्रबंध निदेशकों को सख्त लहजे में कहा कि 30 जून तक परफोमेंस सुधारे अन्यथा अनुशासत्मक कार्यवाही के लिए तैयार रहे. उन्होंने कहा कि फसली ऋण वितरण के दौरान कोविड़-19 गाइडलाइन का पालन करे. उन्होंने उपज रहन ऋण योजना में पात्र सहकारी समितियों को सक्रिय करें तथा योजना से और किसानों को जोडे.

एमएसपी पर चना खरीद के भारत सरकार द्वारा आवंटित लक्ष्य को पूरा करें: 
उन्होंने निर्देश दिए कि 30 जून तक पात्र समिति कम से कम एक किसान को उपज रहन ऋण प्रदान करे ताकि आने वाली सीजन में किसानों को लाभ मिल सके. उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों को गौण मंडी का दर्जा देने से किसानों एवं समितियों को फायदा हुआ है. इसे स्थायित्व दिया जाए. योजनाओं की जिलेवार बेहतर मॉनिटंरिग के लिए विभाग में पदस्थापित अधिकारियों को रिव्यू के लिए जिलों में भेजा जाएगा. उन्होंने खण्डीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार को भी निर्देश दिए कि जिला अनुसार रिव्यू करें. गंगवार ने कहा कि एमएसपी पर चना खरीद के भारत सरकार द्वारा आवंटित लक्ष्य को पूरा करें ताकि अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके. 

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बाजार में सरसों के भाव एमएसपी से ऊपर होने की वजह से खरीद केन्द्रों पर आवक कम: 
राजफैड की प्रबंध निदेशक सुषमा अरोड़ा ने कहा कि 2 लाख 91 हजार 936 किसानों से सरसों एवं चना की 7 लाख 36 हजार 186 मीट्रिक टन उपज खरीदी गई है. जिसकी राशि 3 हजार 452 करोड़ रूपये है. उन्होंने कहां कि बाजार में सरसों के भाव एमएसपी से ऊपर होने की वजह से खरीद केन्द्रों पर आवक कम है. जबकि चना की आवक ज्यादा है. उन्होंने निर्देश दिए कि उपज का समय पर उठाव करें एवं ईडब्लयूआर समय पर जनरेट करें. एफएक्यू मानक से खरीद नही होने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. जो भी सहकारी समितियां अपने कार्य क्षेत्र में किसी प्रकार का नवाचार करना चाहती है या कृषि एवं कृषि उत्पादन से जुडी गतिविधियों के लिए चेन सप्लाई सिस्टम विकसित करना चाहती हैं तो इससे संबंधित प्रस्ताव विभाग को शीघ्र भिजवायें ताकि सरकार द्वारा जुडी योजनाओं का लाभ इन्हे मिल सके.

       

टिड्डी नियंत्रण को लेकर हाईटेक प्रयास, जैसलमेर को मिले 5 ड्रोन

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जैसलमेर: सीमावर्ती जिले जैसलमेर में टिड्डी दलों की आवक शुरू हो चुकी है. पाकिस्तान से लगातार टिड्डी दल आ रहे हैं. किसानों के सामने फसलों के बर्बाद होने का खतरा मंडरा रहा है. इस बीच गत बार के भारी नुकसान को देखते हुए प्रशासन, कृषि विभाग व लोकेस्ट विभाग ने कमर कस ली है. इस बार नियंत्रण के युद्धस्तर पर प्रयास शुरू हो चुके हैं. हाल ही में टिड्डी नियंत्रण दल को 5 ड्रोन मिले हैं. इस बार ड्रोन से टिड्डी नियंत्रण का प्रयास किया जाएगा. 

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प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद:
गौरतलब है कि गत साल 100 करोड़ से भी ज्यादा की फसलों को टिड्डियां चट कर गई थी. जिले के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. इतना ही नहीं इस बार भी टिड्डी दलों के आने से किसानों की चिंता बढ़ गई थी. उनके लिए राहत की खबर यह है कि प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है. अब टिड्‌डी की सूचना मिलते ही टिड्‌डी नियंत्रण विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर ड्रोन से स्प्रे कर टिडि्डयों पर काबू पाएगी. पहले दो ड्रोन आए थे और शाम तक तीन और आ गए. सूचना मिलते ही टीमों के साथ ड्रोन भी देर रात तक मौके पर पहुंच जाएंगे हाल ही में खुहड़ी व जेठवाई में ड्रोन से नियंत्रण में सफलता मिली है. 

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नियंत्रण के प्रयासों से किसानों में खुशी:
एक दिन पहले खुहड़ी व जेठवाई में टिड्डी दलों की सूचना मिलने पर ड्रोन से स्प्रे कर काबू पाया गया. नियंत्रण के प्रयासों से किसानों में खुशी. इस बार टिड्डी दलों पर नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर प्रयास शुरू हो चुके हैं. किसानों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. स्प्रे के वाहन भी बढ़ा दिए हैं. इस बीच ड्रोन भी आ चुके हैं. समय रहते नियंत्रण के प्रयास शुरू हो जाने से किसानों में खुशी की लहर है. 

डूंगरपुर जिले में टिड्डी दल आने की सूचना से किसानों में हड़कंप

डूंगरपुर जिले में टिड्डी दल आने की सूचना से किसानों में हड़कंप

डूंगरपुर: पाकिस्तान से निकला टिड्डी दल गुजरात के रास्ते होकर राजस्थान के डूंगरपुर जिले में प्रवेश कर गया है. इधर डूंगरपुर जिले में टिड्डी दल आने की सूचना से किसानों में हड़कंप मच गया. किसानों ने ढोल, थाली और डीजे बजा कर टिड्डियों को अपने खेतों से उड़ाया. इधर कृषि विभाग के अधिकारी भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और कल शाम से टिड्डियों के मूवमेंट पर नजर बनाए हुए हैं.

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कृषि विभाग के उपनिदेशक गौरीशंकर कटारा ने बताया कि टिड्डी दल जिले में सबसे पहले बिछीवाड़ा ब्लाक में आया और रात को बिलपन तथा उसके आसपास के गांवों के खेतों में पड़ाव डाला. इसके बाद कृषि विभाग ने रात भर अभियान चलाकर फायर ब्रिगेड के माध्यम से खेतों में दवा का छिड़काव किया जिससे हजारों की संख्या में टिड्डियां मर गई. आज सुबह टिड्डी दल ने फिर उड़ान भरी और बिछीवाड़ा ब्लाक के गांवों के ऊपर से होते हुए शहर में प्रवेश किया. 

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शहर और आसपास के क्षेत्रों में कुछ देर पेड़ों पर बैठने के बाद टिड्डी दल हवा के रुख के साथ उदयपुर जिले और चला गया जिसके बाद कृषि विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली. जिले में टिड्डी दल की दस्तक के बाद कृषि विभाग के अधिकारी सचेत हैं और टिड्डियों के मूवमेंट पर नजर बनाए हुए है.

राजस्थान के 16.36 लाख किसानों को सहकारी फसली ऋण का वितरण, 2.34 लाख नए किसानों को भी जोड़ा

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जयपुर: राज्य की ग्राम सेवा सहकारी समितियों के 16 लाख 36 हजार 396 सदस्य किसानों को 5287 करोड़ रूपए का सहकारी खरीफ फसली ऋण का वितरण किया जा चुका है. यह ब्याजमुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वर्ष 2020-21 में 25 लाख किसानों को वितरण का लक्ष्य है. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि 16 अप्रैल से प्रारंभ हुए खरीफ सीजन के फसली ऋण में 31 अगस्त तक 10 हजार करोड़ रूपए किसानों को वितरित किए जाने का लक्ष्य है. जबकि रबी सीजन में 1 सितम्बर से 31 मार्च 2021 तक 6 हजार करोड़ रूपए का फसली ऋण वितरित किया जाएगा.

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अब तक 86 हजार 558 किसानों को ऋण का वितरण हो चुका:
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 में 3 लाख के लक्ष्य के विरूद्ध 2 लाख 34 हजार 189 नए किसानों को भी फसली ऋण से जोड़ा जा चुका है, जिसमें से खरीफ सीजन में अब तक 86 हजार 558 किसानों को ऋण का वितरण हो चुका है. प्रमुख शासन सचिव नरेशपाल गंगवार ने बताया कि 8 जून तक जयपुर जिले में 1 लाख 51 हजार 431 किसानों को 475 करोड़ रूपए, बाड़मेर जिले में 1 लाख 28 हजार 548 किसानों को 415 करोड़ रूपए, भीलवाड़ा जिले में 88 हजार 294 किसानों को 275 करोड़ रूपए, जोधपुर जिले में 69 हजार 632 किसानों को 268 करोड़ रूपए, श्रीगंगानगर जिले में 72 हजार 999 किसानों को 255 करोड़ रूपए तथा चित्तौड़गढ़ जिले में 78 हजार 040 किसानों को 251 करोड़ रूपए का फसली ऋण वितरित किया जा चुका है.

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ऋण वितरण की धीमी गति पर संबंधित प्रबंध निदेशकों को शीघ्रता लानें के निर्देश:
उन्होंने बताया कि इसी प्रकार अन्य जिलों में भी किसानों को फसली ऋण का वितरण किया गया है. प्रबंध निदेशक, अपेक्स बैंक परशुराम मीणा ने बताया कि जयपुर, टोंक एवं बाड़मेर जिलों में निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध 75 प्रतिशत से अधिक फसली ऋण का वितरण हो चुका है. इसी प्रकार सवाई माधोपुर, बीकानेर एवं बूंदी जिलों में 60 प्रतिशत से अधिक तथा भीलवाड़ा, अजमेर, झुंझुनू व जोधपुर जिलों में 57 प्रतिशत से अधिक फसली ऋण का वितरण हुआ है. उन्होंने बताया कि भरतपुर, जैसलमेर, जालोर एवं बारां जिलों में ऋण वितरण की धीमी गति पर संबंधित प्रबंध निदेशकों को शीघ्रता लानें के निर्देश दिए गए है. 

टिड्डी टेरर को लेकर चिंतित राजस्थान सरकार, लेकिन केंद्र सरकार को गंभीर होने की जरुरत- मंत्री सालेह मोहम्मद

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जैसलमेर: राजस्थान के सरहदी जिलों तक ही सीमित रहा टिड्डी दल अटैक जयपुर सहित अन्य जिलों तक पहुंच गया है. प्रदेशभर में टिड्डीयों के हो रहे अटैक ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है तो कृषि विभाग के अधिकारियों की रातों की नींद उड़ा दी है. टिड्डी को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गंभीर है जो सभी मंत्री और जिला कलक्टर को वीसी के जरिये बैठक कर टिड्डियों को लेकर चर्चा कर रहे हैं. वहीं मंत्री सालेह मोहम्मद ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर इस आने वाले बड़े खतरे के बारे में अवगत करवया है.  

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अब फिर से कोरोना के काल में टिड्डी का कहर लौट रहा: 
मंत्री सालेह मोहम्मद ने फर्स्ट इंडिया से खास बातचीत में कहा कि गत वर्ष टिड्डियों ने सीमावर्ती जिले जैसलमेर में किसानों का बहुत बड़ा नुकसान किया था जितना बड़ा नुकसान पूरे राजस्थान में नहीं हुआ उससे कहीं ज्यादा नुकसान जैसलमेर और बाड़मेर में हुआ. अब फिर से कोरोना के काल में टिड्डी का कहर लौट रहा है. मंत्री सालेह मोहम्मद ने कहा कि इस वार टिड्डी बाड़मेर, जैसलमेर को छोड़कर राजस्थान से अन्य राज्यों की ओर जा पहुंची है. केंद्र सरकार को इस मामले में अब गंभीर होने की सख्त जरूरत है. अब बहुत बड़े दल भारत में प्रवेश करने वाले हैं और शुरुआत पश्चिमी राजस्थान की ओर से है. इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि जब इस मामले को लेकर विश्व स्तर पर टिड्डियों को लेकर चर्चा हो तो राज्य सरकार से भी इस बारे में फीडबैक दिया जाना चाहिए ताकि टिड्डी को लेकर राज्य सरकार अलर्ट हो सके.

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टिड्डी को लेकर किसी भी तरह से प्रभावी प्रयास नहीं हो पा रहे:
मंत्री सालेह मोहम्मद ने कहा कि केंद्र द्वारा टिड्डियों को लेकर डिपार्टमेंट तो बना दिया है लेकिन वहां पर अधिकारियों की कमी अधिक है ना उनके पास कोई उचित संसाधन है. इसलिए टिड्डी को लेकर किसी भी तरह से प्रभावी प्रयास नहीं हो पा रहे हैं यही कारण है कि टिड्डी दल राजस्थान के बाहर भी पहुंच गई है इसे साफ पता चलता है कि केंद्र सरकार के पास पूरे संसाधन नहीं है और केंद्र सरकार इस मामले को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है. मंत्री सालेह मोहम्मद ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को मजबूत होता नहीं देखना चाहती है इसलिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद किसानों के लिए गंभीर है और चिंतित भी है और लगातार जिला कलेक्ट्रेट और सभी मंत्रियों से टिड्डी के बारे में भी फीडबैक ले रहे हैं. मंत्री सालेह मोहम्मद ने यह भी कहा कि केंद्र की सरकार ने राजस्थान सरकार को लेकर कोई बजट पारित नहीं किया है और ना ही राजस्थान सरकार को किसी भी तरह के संसाधन मुहैया करवा रही है. समय रहते यदि केंद्र सरकार गंभीर नहीं हुई तो यह टिड्डी दल पूरे भारत वर्ष में अपना आक्रमण कर देगी और अपना कहर बरपाएगी.  

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