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20 घंटे बाद खत्म हुआ चिकित्सक-लैब टेक्नीशियन विवाद, ACS चिकित्सा रोहित कुमार सिंह की मौजूदगी में समझौता वार्ता

20 घंटे बाद खत्म हुआ चिकित्सक-लैब टेक्नीशियन विवाद, ACS चिकित्सा रोहित कुमार सिंह की मौजूदगी में समझौता वार्ता

जयपुर: सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में लैब टेक्नीशियन और डॉक्टरों के बीच हुई कथित मारपीट का मामला आखिरकार 20 घंटे बाद जाकर शांत हो गया. घटना से आक्रोशित लैब टेक्निशियंस ने दूसरे दिन मंगलवार को भी कार्य का बहिष्कार जारी रखा.लैब टेक्नीशियन सुबह से एसएमएस मेडिकल कॉलेज के बाहर एकत्रित हुए और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए परिसर में खड़े होकर विरोध जाहिर किया.इस दौरान मोती डूंगरी थाना पुलिस का जाप्ता भी मौजूद रहा.

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अधिकांश जगहों पर कोरोना जांच का काम प्रभावित:
लैब टेक्निशियनों के काम के बहिष्कार की वजह से एसएमएस समेत अधिकांश जगहों पर कोरोना जांच का काम प्रभावित हुआ. कोविड की जांचें नहीं हो पाई.हालांकि, इस दौरान मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना में कार्यरत संविदा-निविदा प्रयोगशाला सहायक और टेक्निशियनों ने जरूरी काम संभाले रखा.

सभी साथियों से काम पर लौटने की अपील:
बढ़ते विवाद को देखते हुए चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा के निर्देश पर एसीएस मेडिकल रोहित कुमार सिंह ने लैब टेक्निशियंस यूनियन के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाया. इस दौरान पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई.साथ ही लैब टेक्नीशियन रमेश कुमावत का निलंबन भी वापस ले लिया गया.वार्ता के तत्काल बाद लेब टेक्नीशियन संघ ने सभी साथियों से काम पर लौटने की अपील की. 

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राजस्थान हाईकोर्ट ने कोरोना काल की चुनौती को बनाया अवसर, वीसी के जरिए सर्वाधिक केसों की सुनवाई 

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जयपुर: कोरोना महामारी के चलते देशभर में मार्च के तीसरे सप्ताह के बाद से ही सबकुछ बदल गया है.यूं तो कोरोना देश और दुनिया के सामने बड़ी चुनौति बनकर सामने आया लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने इस चुनौति को एक अवसर के रूप में बदल दिया.मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति की पहल का नजीता है कि कोरोना कॉल में वाट्सप, स्काईप से लेकर जीटस सॉफटवेयर के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कर सर्वाधिक केसो की सुनवाई करने वाला हाईकोर्ट बन गया है.यहीं नहीं कोरोनाकाल और लॉकडाउन के दौरान सर्वाधिक कार्य दिवस पर सुनवाई करने वाला भी राजस्थान हाईकोर्ट ही है.जब देश के अधिकांश हाईकोर्ट में सुनवाई पूर्णतया बंद हो चुकी थी तब भी राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से लेकर सभी जज अपने निवास से लेकर चैंबर से सुनवाई कर रहे थे.

22 मार्च से 26 जून तक 18 हजार प्रकरण:
कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने वीसी के जरिए सभी कार्य दिवस पर सुनवाई की. 22 मार्च से 26 जून तक वीसी के जरिए राजस्थान हाईकोर्ट ने अति आवश्यक प्रकृति के 18238 मामलो की सुनवाई की है.वहीं प्रदेश की निचली अदालतों में 40905 मामलों की सुनवाई कि गई. यहां तक इसी अवधी के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने जयपुर जेल के कैदियों में कारेाना संक्रमण के मामले में रविवार को अवकाश के बावजूद विशेष सुनवाई की.

वीसी के जरिए विदाई समारोह से हुआ था आगाज:
देश में लॉकडाउन लागू होने से पूर्व ही राजस्थान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये कुछ मामलो की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग जरिए कि थी.मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति ने जनवरी और फरवरी माह में जोधपुर और जयपुर पीठ में एक साथ एक ही केस की सुनवाई की थी जिसके चलते राजस्थान हाईकोर्ट में वीसी की सुनवाई का सेटअप तैयार हो चुका था.गुर्जर आरक्षण आंदोलन पहला केस था जिसकी सुनवाई जोधपुर और जयपुर हाईकोर्ट में एक साथ कि गयी थी.लेकिन उससे पहलेे ही सितंबर 2019 में जस्टिस पी के लोहरा का विदाई रेफरेंस ही वो पहला कार्यक्रम था जिसके जरिए पहली बार दो पीठ के बीच वीसी का ट्रायल किया गया था.उस ट्रायल के दौरान कुछ मुश्किेल जरूर सामने आयी लेकिन एक नई राह जरूर खुल गई. 

पूर्व सीजे जस्टिस भट्ट ने दिखायी थी राह:
राजस्थान हाईकोर्ट देश का एकमात्र हाईकोर्ट है जिसका एक कोर्ट रूम पुरी तरह से वीडियो कॉफ्रेसिंग वीडियो उपकरणो से सुसज्जित रखा गया है.जिसका उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने नवंबर 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर नई बिल्डिंग भवन के उद्घाटन के साथ किया था.जिसमें समान प्रकृति के मामलों की एकसाथ सुनवाई करने के लिए जयपुर जोधपुर में वीसी रूम तैयार करवायें थे.जो कोरोना काल में राजस्थान हाईकोर्ट के लिए एक वरदान साबित हुए है.पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रविन्द्र भट्ट की ये सोच थी जिन्होने सुप्रीम कोर्ट के ई कोर्ट प्रोजेक्ट से प्रेरणा लेते हुए भविष्य की संभावओं को हकीकत का रूप दिया था.

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सीजे महांति के नेतृत्व में टीम ने बना दिया आसान:
राजस्थान हाईकोटर् के 35 वे मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेने के साथ जस्टिस इन्द्रजीत महांति ने ई कोर्ट प्रोजेक्ट या यो कह तो तकनीक के प्रयोग का महत्व समझते हुए एक नई टीम बनाई.इस टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी स्टेयरिंग कमेटी के चैयरमेन जस्टिस अरूण भंसाली ने.जिनके नेतृत्व में ना केवल राजस्थान हाईकोर्ट बल्कि प्रदेश की जिला न्यायालयों में कम्प्यूटर और वीसी की सुविधाओं को मजबूत किया गया.रजिस्ट्रार कम सीपीसी हेमंतसिंह बाघेला और एनआईसी के संजय मिश्रा सहित करीब 15 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने भी इसमें महति भूमिका निभायी.जिसके चलते कोरोना काल में बिना किसी अतिरिक्त खर्च के लिए सभी जजो ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए सुनवाई की.यहां यह भी उल्लेख करना जरूरी है कि राजस्थान हाईकोर्ट के जजो ने भी इसमें अपना बेहतर योगदान दिया.जिन्होंने शुरूआत में मोबाईल से केसो की सुनवाई करना स्वीकार किया.ये उनके लिए भी एक नया प्रयोग था जिसे आसानी से ना केवल समझे बल्कि उससे अब भविष्य के लिए भी सुनवाई करना आसान हो गया है.

2 साल बाद शुरू होने वाली कई प्रोजेक्ट भी किये लागू:
कोरोना काल के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने ई फाईलिंग से लेकर ई पेमेंट सिस्टम, ई कोर्ट फीस भी लागू किया है.देश में ई फाईलिंग को पूर्णतया लागू करने वाला देश का पहला हाईकोर्ट बन गया है.यहां तक कि मोबाईल से सुनवाई करने वाला भी देश के गिने चुने हाईकोर्ट में शामिल हुआ है और सबकुछ आसान हुआ क्योकि मुख्य न्यायाधीश ने इसके लिए शुरूआत की.हाईकोर्ट में इन प्रोजेक्ट को लागू करने से पहले ही तकनीकि टीमें सुप्रीम कोर्ट से प्रशिक्षण ले चुकी थी जिसका फायदा कोरोना काल में हुआ.

रेगुलर कोर्ट के बाद अब वीसी के जरिए सुनवाई भी रेगुलर:
29 जून से राजस्थान हाईकोर्ट सहित अधिनस्थ अदालतों में रेगुलर सुनवाई शुरू कर दि गई है.रेगलुर अदालतो में अधिवक्ता उपस्थित होकर पैरवी कर रहे है, लेकिन अधिकांश वरिष्ठ अधिवक्ता वीडियो कॉलिंग के जरिए अपने घर या कार्यालय से ही पैरवी कर रहे है.राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनो ही तरीको से सुनवाई जारी रखी है.ये इसलिए भी जरूरी है कि आने वाले समय में वीडियो कॉलिंग से सुनवाई एक जरूरी हिस्सा होगा.जो जेल में कैदियों की सुनवाई से लेकर अहम मामलो में गवाहों की गवाही के लिए एक मजबूत जरिया बन सकता है.

Rajasthan Corona Updates: राजस्थान में पहली बार रिकवरी रेश्यो 80 फीसदी पर, पिछले 24 घंटे में 9 मौत, 350 नए पॉजिटिव केस

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जयपुर: राजस्थान में कोरोना वायरस के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे है. पिछले 24 घंटे में 9 मरीजों की मौत हो गई. जबकि 350 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. बाड़मेर में एक, भरतपुर में तीन, भीलवाड़ा में एक मरीज की मौत हो गई. बीकानेर में दो और जोधपुर में 2 मरीजों की मौत हुई. अगर बात करें नए पॉजिटिव मरीजों की, तो अजमेर- 8,अलवर- 26,बारां- 2,बाड़मेर- 32 पॉजिटिव, भरतपुर- 38, भीलवाड़ा- 7,बीकानेर- 14,बूंदी- 1 पॉजिटिव, चूरू- 1,दौसा- 3,धौलपुर- 10,डूंगरपुर- 5, हनुमानगढ़- 10 पॉजिटिव, जयपुर- 28, जैसलमेर- 3,जालौर- 9,झुंझुनूं- 2 पॉजिटिव, जोधपुर- 43, करौली- 6,कोटा- 6, नागौर- 16 पॉजिटिव, पाली- 26,राजसमंद- 10, सवाईमाधोपुर- 1 पॉजिटिव, सीकर- 1, सिरोही- 15, उदयपुर- 22, अन्य राज्य के 5 पॉजिटिव मरीज सामने आये है. अब तक राजस्थान में कोरोना की वजह से 430 मरीज जान गंवा चुके है. वहीं पॉजिटिव मरीजों की संख्या 18 हजार 662 पहुंच गई है.

जयपुर डिस्कॉम से राहत की खबर, उपभोक्ताओं को बिल में लगने वाले विभिन्न चार्जेज की मिलेगी सूचना

कोरोना से जुड़ी बड़ी राहत की ख़बर:
राजस्थान में कोरोना से जुड़ी बड़ी राहत की ख़बर है. प्रदेश में पहली बार रिकवरी रेश्यो 80 फीसदी पर है. राजस्थान में अब तक 18 हजार 662 मरीज कोरोना के चिह्नित किए गए है. इनमें से 14 हजार 948 मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हो चुके है. राजस्थान में रिकवरी रेश्यो 80.1% पहुंच गया है. 

पॉजिटिव से नेगेटिव हुए 14 हजार 948 मरीज:
राजस्थान में कुल 14 हजार 948 मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. वहीं कुल 14 हजार 630 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए है. वहीं बात करें कुल एक्टिव मरीजों की, तो 3 हजार 284 मरीज अस्पताल में उपचाररत है. कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 5 हजार 272 है.

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जयपुर डिस्कॉम से राहत की खबर, उपभोक्ताओं को बिल में लगने वाले विभिन्न चार्जेज की मिलेगी सूचना

जयपुर डिस्कॉम से राहत की खबर, उपभोक्ताओं को बिल में लगने वाले विभिन्न चार्जेज की मिलेगी सूचना

जयपुर: बिजली उपभोक्ताओं को बिल में लगने वाले विभिन्न चार्जेज की सूचना अब बिजली मित्र एप्प पर अलग से उपलब्ध होगी. जयपुर डिस्कॉम प्रशासन ने इसके लिए एप्प में  अन्य डेबिट नाम से नए फीचर की शुरुआत की है.जयपुर डिस्काॅम के प्रबन्ध निदेशक ए.के.गुप्ता ने बताया कि उपभोक्ताओं को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए गूगल प्ले स्टोर से बिजली मित्र एप्प को अपड़ेट करना होगा.बिजली मित्र एप के अपडेट होने के बाद अन्य डेबिट में बिजली बिल में लगे विभिन्न चार्जेज की सूचना को उपभोक्ता देख सकते है.

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डैशबोर्ड़ में वार्षिक लेजर भी कर सकते हैं डाउनलोड़:
इसके अलावा डैशबोर्ड़ में वार्षिक लेजर डाउनलोड़ भी कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि वर्तमान में बिजली मित्र एप में बिल व पेमेन्ट हिस्ट्री, मीटर डिटेल, कनेक्शन डिटेल, शिकायत दर्ज कराने की सुविधा, डिपाजिट डिटेल्स, सर्विसेज, एनर्जी टिप्स, डूप्लिकेट बिल, सब-डिवीजन की सूचना, बिजली उपभोग की गणना, माई एकाउन्ट, फीडबैक, माई प्रोफाईल, लोकेट आफिस एवं डेशबोर्ड सहित लगभग 21 प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है. अब बिजली मित्र एप में अन्य डेबिट नाम से एक नए फीचर को जोड़ा गया है, जिससे कि उपभोक्ता को बिल में लगने वाले अन्य चार्जेज के बारे में अधिकाधिक प्रामाणिक जानकारी मिल सके.

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जयपुर के विधायकों ने की सीएम गहलोत से मुलाकात, बिजली के बिल माफ करने की मांग की

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जयपुर: कोरोना काल में आर्थिक संकट से गुजर रहे प्रदेश की जनता सरकार से बिजली और फीस माफ करने की लगातार मांग कर रही है और अब सरकार के मंत्री और विधायक भी इसमें शामिल हो गए हैं. गुरुवार को मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और मुख्य सचेतक महेश जोशी के नेतृत्व में कई विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उनके आवास पर मीटिंग करके बिजली बिलों काे माफ करने की मांग की है. इस प्रतिनिधिमंडल में विधायक रफीक खान, गंगादेवी, लक्ष्मण मीणा व वेदप्रकाश सोलंकी भी शामिल थे. 

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बिजली के बिलों को लेकर जनता को राहत देने की मांग:
इस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से गुहार की है कि बिजली के बिलों को लेकर जनता को राहत दी जाए, क्योंकि संकट की इस घड़ी में गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहे है. ऐसे में सरकार अधिकतम संभव मदद दे. विधायकों ने मुख्यमंत्री से स्कूल फीस में भी रियायत देने की मांग की. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण स्कूल नहीं खुले, लेकिन इसके बावजूद स्कूल संचालक फीस की मांग कर रहे हैं, ऐसे में राज्य सरकार को कोई ऐसा फॉर्मूला निकालना चाहिए कि लॉकडाउन पीरियड के दौरान की फीस का भार जनता पर न पड़े.

कॉलेज की परीक्षाओं का भी उठाया मामला:
इस प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज की परीक्षाओं का भी मामला उठाया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों की परीक्षा लिए बिना ही उनको अगली क्लास में प्रमोट किया जाए, क्योंकि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण इन स्टूडेंट्स पर असर पड़ सकता है. मुख्यमंत्री अशेाक गहलोत ने प्रतिनिधिमंडल को विश्वास जताया कि सरकार जनता के हित में ही कदम उठाएगी.

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SOG की जांच में अधिवक्ता के खिलाफ झूठी निकली शिकायत, हाईकोर्ट ने कहा याचिकाकर्ता ने कोर्ट प्रोसिडिंग को किया अपमानित करने का प्रयास

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट में एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान परिवादी द्वारा अधिवक्ताओं के खिलाफ की गई शिकायत को एसओजी ने पुरी तरह से झुठा और आधारहीन बताया है.राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले को अधिवक्ताओं की गरिमा से जुड़ा बताते हुए एसओजी को जांच के आदेश दिए थे.30 जून को पेश कि गयी एसओजी की रिपोर्ट आज भरी अदालत में सुना गया.एसओजी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि याचिकाकर्ता ने बिना किसी आधार पर अधिवक्ता पर आरोप लगाया है.

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अधिवक्ता की गरिमा को पहुंचाया नुकसान:
जांच रिपोर्ट को लेकर जस्टिस एसपी शर्मा की एकलपीठ ने कहा कि शिकायतकर्ता ने अदालत की कार्यवाही को अपमानित करने का प्रयास किया है.अदालत ने कहा कि जिन अधिवक्ताओं ने जमानत की पैरवी की उन्ही अधिवक्ता की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है.अदालत ने 9 जून और 12 जून के आदेश को ड्राप करते अधिवक्ताओं को स्वतंतत्रा दी है कि वे शिकायकर्ता के खिलाफ कार्यवाही कर सकते है. अदालत ने ये भी कहा कि कोर्ट में कोई भी शिकायत कि जाती है तो उसकी जांच की जानी चाहिए लेकिन साथ ही यदि शिकायत झुठी पायी जाये तो शिकायतकर्ता के खिलाफ उचित कार्यवाही कि जानी चाहिए.शिकायतकर्ता हितेशकुमार की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते जस्टिस एस पी शर्मा की एकलपीठ ने ये आदेश दिये है.अदालत ने हितेशकुमार को अपनी जमानत याचिका के लिए नया अधिवक्ता इंगेज करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है.

क्या है मामला:
अलवर के भिवाड़ी थाने में हितेश कुमार के खिलाफ 25 मई 2019 को धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ. हितेश पर आरोप था कि उसने फर्जीवाड़ा करते हुए महिला की जमीन बिकवा दी। पुलिस ने हितेश को गिरफ्तार कर जेल दिया. इसी बीच आरोपी हितेश ने हाईकोर्ट को 14 मई 2020 को पत्र लिखा. जिसमें कुछ वकीलों सहित अन्य लोगों पर आरोप लगाया कि केस लड़ने के नाम पर उससे खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाकर जमीन को धोखे से बेच दिया है. हाईकोर्ट में हितेश की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायत पत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए इसे वकालात की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बताया और मामले की जांच एसओजी से कराने के आदेश दिए. 

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जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में अब स्कूल फीस माफी (School Fees Maafi) की मांग जोर पकडने लगी है. पिछले कुछ दिनों से अभिभावक ( Parents) स्कूल के बाहर प्रदर्शन करते हुए दिखाई दे रहे है. गुरुवार को जयपुर के मालवीय नगर (Malviya Nagar) स्थित सेंट एसंलम स्कूल ( St. Anselm School) और प्रतापनगर ( Pratap nagar) के माहेश्वरी पब्लिक स्कूल (Maheshwari Public School) में परिजनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया.

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फीस के लिए स्कूल बना रहा है लगातार दबाब:
परिजनों का कहना है कि कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के इस दौर में भी स्कूल लगातार फीस के लिए दबाब बना रहे है और फीस को भी बड़ा दिया गया है.जब सरकार ने फीस नहीं लेने के आदेश दे रखे है तो निजी स्कूल (Private schools)फिर क्यो फीस मांग रहे है.परिजनों का ये भी कहना है कि स्कूलों ने पहले की तुलना में अब फीस (Fees)को और भी बड़ा दिया गया है.

एमपीएस स्कूल के बाहर प्रदर्शन:
जबरन फीस वसूली के विरोध में माहेश्वरी पब्लिक स्कूल (Maheshwari Public School) प्रताप नगर ( Pratap nagar) के बाहर अभिभावकों ने प्रदर्शन किया. बच्चों के माता और पिता ने जबरन फीस वसूली (Fees extortion)को लेकर विरोध जताया है. अभिभावकों ने नो स्कूल नो फीस का नारा लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया. वहीं अभिभावकों का कहना है कि अन्य स्कूलों की तरह इस स्कूल ने फीस में कोई राहत नहीं दी है. बल्कि फीस (Fees)में बेवजह बढ़ोतरी और कर दी है.

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जयपुर: जयपुर समेत पूरे रीजन में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना चाह रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है. जयपुर आरटीओ कार्यालय ने लॉक डाउन की अवधि में हुई लाइसेंसों की पूरी पेंडसी को ख़त्म कर लिया है. अब स्थाई लाइसेंस की ट्रायल के लिए लिए पहले की तरह ही तय समय मिल रहा है. कोरोना के बाद प्रदेश में हुए लंबे लॉक डाउन के कारण सभी विभागों का काम ख़ासा प्रभावित हुआ था. जयपुर आरटीओ में भी क़रीब 20 हजार ड्राइविंग लाइसेंसों का काम पेंडिंग हो गया था. इतनी बड़ी पेंडसी के कारण जहां पुराने आवदेकों को परेशान होना पड़ रहा था तो वहीं नए आवेदक भी लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे. लंबित लाइसेंसों की बड़ी संख्या देखकर ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा था कि पेंडेंसी को ख़त्म करने में आरटीओ को बहुत समय लगेगा. लेकिन आरटीओ राजेंद्र वर्मा की मॉनिटरिंग और सटीक प्लांनिग से जयपुर रीजन में ड्राइविंग लाइसेंसों की पेंडसी ख़त्म हो गई है. 

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शनिवार और रविवार को पूरी क्षमता से हुआ काम:
अब स्थाई लाइसेंस के लिए पहले की तरह ही ARTO कार्यालय में जहां 40 दिन बाद की डेट मिल रही है तो वहीं विद्याधर नगर में 25 दिन बाद कि डेट अब दी जा रही है. आरटीओ राजेंद्र वर्मा ने बताया कि लाइसेंसों की पेंडेंसी को ख़त्म करने के लिए परिवहन आयुक्त रवि जैन के निर्देशों के बाद कार्यालय समय के अलावा 3 घँटे अधिक काम किया गया. शनिवार और रविवार को भी सभी कार्यालयों में पूरी क्षमता के साथ काम किया गया. इतना ही नहीं आवेदकों को आरटीओ और डीटीओ कार्यालयों से फोन कर के भी बुलाया गया. आरटीओ राजेंद्र वर्मा का कहना है कि अगर अभी भी लॉक डाउन अवधि में आवेदन करने वाले किसी आवेदक का लाइसेंस नहीं बन पाया है तो वह कार्यालय आ कर अपनी सुविधा से अपना स्लॉट रिशेड्यूल करा सकता है.  लंबित लाइसेंसों का निस्तारण करने में जयपुर रीजन के सभी कार्यालयों ने अच्छा काम किया है.अगर आकंडो की बात करें तो...   

-22 मई से लेकर 30 जून तक जयपुर रीजन में बने हैं कुल 36049 लाइसेंस
-इसमें 7950 हैं लर्निंग लाइसेंस,16127 हैं स्थाई लाइसेंस,11972 लाइसेंसों का हुआ है नवीनीकरण

म्यांमार में भारी बारिश की वजह से खदान धंसी, 100 से ज्यादा लोगों की मौत

22 मई से 30 जून तक के आकंड़े

-आरटीओ जयपुर कार्यालय में 2236 लर्निंग लाइसेंस बने

-डीटीओ विद्याधर नगर कार्यालय में 2603 लर्निंग लाइसेंस बने

-डीटीओ चौमूं कार्यालय में 685 लर्निंग लाइसेंस बने

-डीटीओ दूदू में 931 लर्निंग लाइसेंस बने

-डीटीओ शाहपुरा कार्यालय में 853 लर्निंग लाइसेंस बने

-डीटीओ कोटपूतली कार्यालय में 642 लर्निंग लाईसेंस बने

-ARTO जगतपुरा कार्यालय में 8648 स्थाई लाइसेंस बने है

-डीटीओ विद्याधर नगर कार्यालय में 4386 स्थाई लाइसेंस बने हैं

-डीटीओ चौमू कार्यालय में 727 स्थाई लाइसेंस बने हैं

-डीटीओ दूदू में 827 स्थाई लाइसेंस बने हैं

-डीटीओ शाहपुरा कार्यालय में 955 स्थाई लाइसेंस बने हैं

-डीटीओ कोटपूतली कार्यालय में 584 स्थाई लाइसेंस बने हैं

20 हजार लंबित ड्राइविंग लाइसेंसों का निस्तारण कर जयपुर आरटीओ ने नए आवेदकों को बड़ी राहत दी है. अब जयपुर रीजन में कहीं भी लाइसेंस के लिए लोगों को तय समय से अधिक इंतजार नहीं करना पड़ रहा है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट

VIDEO: जयपुर पुलिस को CM की सौगात, पुलिस बेड़े में शामिल हुए 70 चेतक वाहन और 127 बाइक

जयपुर: राजधानी में जयपुर पुलिस कमिश्ननेट को गुरूवार को नई सौगात मिली है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीएमआर में जयपुर पुलिस की नए चेतक वाहनों और सिग्मा बाइकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस मौके पर डीजीपी भूपेंद्र सिंह यादव, जयपुर पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव सहित आलाधिकारी मौजूद रहे. 

Sriganganagar: आंगन में पड़े मिले महिला और 2 बच्चों के शव, पति फरार 

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट बेड़ा और मजबूत हो गया:  
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट बेड़ा और मजबूत हो गया है. जयपुर पुलिस कमिश्नरेट बेड़े में 197 नए वाहन शामिल हो गए है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीएमआर में जयपुर पुलिस की नई पीसीआर वैनों और सिग्मा बाइकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.  मुख्यमंत्री ने 70 नई पीसीआर वैन और 127 नई सिग्मा बाइक की सौगात जयपुर पुलिस को दी. इस मौके पर मुख्य सचेतक महेश जोशी, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और डीजीपी भूपेंद्र सिंह यादव, जयपुर पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव सहित आलाधिकारी मौजूद रहे. 

सरकार ने 70 करोड़ रुपए का बजट पुलिस विभाग को दिया था:
सालों से खटारा वाहनों को ढोह रही पुलिस के बेड़े में अब नए वाहन शामिल होने लगे हैं. राज्य सरकार ने नए वाहनों के लिए दिसंबर में 70 करोड़ रुपए का बजट पुलिस विभाग को दिया था. इस बजट से प्रदेशभर में पुलिस की नई यूनिट, नए सर्किल और थानों के लिए 1682 वाहन खरीदे जा रहे हैं. इसमें लो, मिडियम, हैवी क्वालिटी के व्हीकल और बाइक भी शामिल है. जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की नई पीसीआर वैन अत्याधुनिक तकनीक से लैस है. इसमें जीपीएस , पीटी जेड कैमरा , एलसीडी स्क्रीन , पब्लिक एड्रेस सिस्टम ,बार लाइट वायरलैस सिस्टम , मोबाइल डाटा टर्मिनल सरीखी सुविधाएं मौजूद है. नई पीसीआर वैन मिलने के बाद अब जयपुर पुलिस का रेस्पॉस टाइम 6 मिनट 37 सैंकड से घटकर 5 मिनट से भी कम होगा. 

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पुलिस महकमा भी हाईटेक होता नजर आ रहा:
बदलते समय के साथ अब पुलिस महकमा भी हाईटेक होता नजर आ रहा है. नई पीसीआर वाहनों की सौगात मिलने के बाद अब अपराधों की रोकथाम और कानून व्यवस्था को लेकर जयपुर पुलिस और चुस्त, दुरूस्त नजर आएगी. माना जा रहा है आने वाले समय में खटारा हो चुके पुलिस महकमे के तमाम वाहन भी बदले हुए नजर आएंगे. 

...सत्यनारायण शर्मा, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

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