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पुलिस ने एक साल के बच्चे को अपहरणकर्ताओं से करवाया मुक्त 

पुलिस ने एक साल के बच्चे को अपहरणकर्ताओं से करवाया मुक्त 

सहारनपुर। प्रदेश में बच्चों के अपहरण की घटनाएं रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। अपराधी आए दिन इन घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे ही अपहरण के एक मामले में पुलिस को एक साल के एक बच्चे को छुड़ाने में सफलता हाथ लगी है। 

सहारनपुर एसपी सिटी ने प्रेसवार्ता कर बताया कि थाना देहात कोतवाली अंतर्गत निवासी इंतजार की पुत्री अपने एक वर्षीय भाई को लेकर अपने चाचा के घर से पाने घर आ रही थी। जहां दिन दहाड़े रास्ते में बाइक सवार युवकों ने लड़की से एक वर्षीय छीन फरार हो गये थे। 

दो दिन बाद आज पुलिस ने बदमाशों को पकड़ लिया और उनसे बच्चे को सुरक्षित वापस ले लिया। एसपी सिटी ने बताया कि इसके लिए 5 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने अपहरणकर्ताओं की धरपकड़ के लिए स्केच जारी किये। जिसमें पुलिस को सफलता हाथ लगी। बदमाश एक आश्रम में बच्चे को छोड़ फरार हो गये। वहीं पुलिस इस कड़ी को परिवार के लोगों से जोड़ रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी पुलिस की पकड़ में होंगे। अपने बच्चे को लेकर परिवार में ख़ुशी का माहौल है। 

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फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी, अब तक कर चुका है हजारों ऑपरेशन

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यूपी के सहारनपुर में एक फ़िल्मी वाक़या सामने आया है फिल्म मुन्नाभाई और थ्री इडियट्स की तर्ज़ पर 10 सालों से प्रैक्टिस कर रहे फर्जी डॉक्टर को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है.सहारनपुर (ग्रामीण) के एसपी विद्यासागर मिश्र के अनुसार, 'देवबंद में ओमपाल (50) नामक शख्स यहां के लोकल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में फर्जी डिग्री और फर्जी रजिस्ट्रेशन के आधार पर खुद को डॉक्टर राजेश आर के तौर पर दर्शा कर प्रैक्टिस कर रहा था. वह एक नर्सिंग होम भी चला रहा था। आरोपी अभी तक हजारों ऑपरेशन कर चुका था.इस शख्स ने मैसूरु यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले एक डॉक्टर के नाम से फर्जी डिग्री बनवा ली.

वह  सहारनपुर में सीएचसी में कॉन्ट्रैक्ट पर जुड़ा हुआ था. आरोपी के फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब फिरौती से जुड़ी एक कॉल के बाद वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गया.एसपी ने बताया, 'आरोपी पहले मंगलुरु में एयर फोर्स बेस हॉस्पिटल में बतौर पैरामेडिक कार्यरत था, जिसकी पेंशन उसे अभी भी मिलती है. उसके साथ राजेश आर नामक एक डॉक्टर भी काम करते थे, जिसके बाद वह विदेश चले गए.राजेश के विदेश जाने के बाद ओमपाल ने उसकी एमबीबीएस की डिग्री पर अपनी तस्वीर लगाकर फर्जीवाड़ा कर लिया.

आरोपी का खेल तब खत्म हुआ, जब उसे किसी अज्ञात शख्स ने फोन कर असली पहचान का खुलासा करने के एवज में 40 लाख रुपयों की डिमांड की. इसकी शिकायत करने वह पुलिस के पास गया, जहां पर उसकी पोल खुल गई.डिग्री के आधार पर ही उसे सीएचसी में सर्जन की नौकरी मिली और उसने सर्जरी के कई सारे डिप्लोमा और सर्टिफिकेट बनवा लिए.

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