मौत के साये में पुलिस जवान, महज 7 साल में खंडहर हो गए आवासीय भवन

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/08/01 09:05

बिसाऊ (झुंझुनूं)। 15 साल पूर्व बिसाऊ थाना भवन व आवासीय भवनों के हुए निर्माण में घटिया सामग्री लगाये जाने के कारण यह आवासीय भवन 7 साल बाद खण्डहर बन गये हैं। ऐसे में निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिये थानाधिकारी ने पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखा है। थानाधिकारी सोहनलाल के अनुसार यह थाना भवन 2003 में बनकर तैयार हुआ था, जिनमें सिपाहियों के लिये बने तीन मंजिला फ्लेट के छह मकानों की छत सात साल बाद टपकनी शुरू हो गई। यहां छत का प्लास्टर उखड़ गया और लोहे के सरिये तक दिखाई देने लगे, वहीं बाल्कनी टूटकर लटक गई है और छज्जे भी गिर गए।

यही हाल ग्राउंड पर बने छह मकानों का भी है, जिनकी छत टूटकर जमीन पर आ गिरी। ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण सामग्री लगाने के कारण यह सभी आवासीय मकान 2010 में ही खण्डहर हो गये थे, जिनको पीडब्लूडी ने 2014 में डैमेज घोषित कर दिया था। डैमेज हुए मकानों की हालत को निवर्तमान एसपी मनीष अग्रवाल व वर्तमान जिला कलेक्टर दिनेश यादव ने भी देखी।

थानाधिकारी का कहना है कि इन मकानों की मरम्मत के लिये पुलिस विभाग ने 6 लाख 21 हजार की राशि भी स्वीकृत की, लेकिन सभी मकान डैमेज होने से उनकी मरम्मत करवाना उचित नहीं समझा गया। इसी प्रकार थाना भवन के एक हिस्से की दीवार की मरम्मत करवाई गई, इसके लिये विभाग ने 3 लाख 26 हजार की राशि मंजूर की, जिसमें पीडब्लूडी के ठेकेदार ने 10 से 15 हजार की निर्माण सामग्री लगाकर लिपाई कर 2 लाख 70 हजार खर्च होने का हिसाब थमा दिया।

पांच लाख की लागत से सिपाहियों के लिये 2012 से निर्माणधीन मैश का कार्य भी अभी तक पूरा नही हुआ है। इसमें ठेकेदार घटिया निर्माण सामग्री लगाकर घटिया कार्य कर रहा है। मैश की छत में लगा लेन्टर बीच में से लचक रहा है, फ‌र्श व खाना पकाने के लिये बनाये गये प्लेटफ‌ार्म पर लगी टाईलें घटिया स्तर की है। छत का बरसाती पानी उतारने के लिये नाला भी नहीं लगाया गया है। सिपाहियों को बैठकर खाना खाने के लिये डाईनिंग टेबल भी नहीं है। मैश का निर्माण कार्य पूरा करने के लिये अब चार लाख 63 हजार का और खर्चा बता दिया।

उधर, थानाधिकारी व सहायक अधिकारी के मकान भी जर्जर हाल में है। आलम ये है कि बरसात में छत टपक रही है, प्लास्टर झड़ रहा है और छत की आरसीसी में लगी सीमेन्ट उखड़ने लगी है। ऐसे में यह अधिकारी कमरे में जाने से भी डर रहे हैं। सिपाहियों के आवास खण्डहर होने से अब थाने के आधे से ज्यादा सिपाहियों को कस्बे में तीन से चार हजार रुपए किराये के खर्च कर रहने को मजबूर हैं, जबकि उन्हें पुलिस विभाग की ओर से हाउस रेन्ट मात्र 18 सौ 8 रुपए ही मिलते हैं।

थाने में कार्यरत कुछ सिपाहियों का कहना है कि आमजन की सुरक्षा में रात दिन तैनात रहने वाले सिपाहियों के लिये जिस ठेकेदार ने इन आवासों का निर्माण घटिया सामग्री लगाकर किया है, उसके खिलाफ‌ कड़ी कार्रवाही होनी चाहिए। इन जर्जर कमरों में हम दिनभर डयूटी के बाद रात को दो घन्टे चैन से सो भी नहीं पाते। छत के टुकड़े गिरने लगते हैं। हम चाहते हैं कि हमारी मौत वीरता के साथ हो हम कायरता के साथ इन जर्जर भवनों में मरना नहीं चाहते।

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