दो—दो नगर निगम बनाने का फैसला सरकार का नीतिगत निर्णय, हाईकोर्ट नहीं करें हस्तक्षेप— महाधिवक्ता

दो—दो नगर निगम बनाने का फैसला सरकार का नीतिगत निर्णय, हाईकोर्ट नहीं करें हस्तक्षेप— महाधिवक्ता

दो—दो नगर निगम बनाने का फैसला सरकार का नीतिगत निर्णय, हाईकोर्ट नहीं करें हस्तक्षेप— महाधिवक्ता

जयपुर: जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो दो नगर निगम बनाने के मामले में राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में जवाब पेश करते हुए मामले को नितीगत निर्णय बताते हुए अदातल से हस्तक्षेप नहीं करने को कहा है. महाधिवक्ता एम एस सिंघवी की ओर से पेश किये गये जवाब में कहा गया कि है तीन जगहों पर दो दो नगर निगम के गठन का फैसला राज्य सरकार ने जनता के हित में लिया है. जो कि सरकार का एक नीतिगत निर्णय है जिसमें अदालत को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. महाधिवता ने कहा कि वर्तमान में लॉक डाउन के कारण तीनों जगह पर चुनाव नहीं हो पा रहे हैं लेकिन राज्य सरकार अदालत के आदेश के अनुसार अगस्त में चुनाव कराने को तैयार है और तीनों जगह की नगर निगमों में अगस्त में चुनाव हो जाएंगे.

Rajasthan Corona Updates: पिछले 12 घंटे में सामने आए 109 पॉजिटिव केस, संक्रमितों का ग्राफ पहुंचा 7645 

महाधिवक्ता ने जनहित याचिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि दो-दो नगर निगम बनाए जाने का नोटिफिकेशन अक्टूबर 2019 में ही जारी हो चुका है लेकिन अब इस याचिका को दायर करना और उसमें जयपुर नगर निगम को पक्षकार बनाया गया है जिसका अब अस्तित्व ही नहीं है और जयपुर हेरिटेज व ग्रेटर जयपुर को पक्षकार नहीं बनाया है. महाधिवक्ता ने याचिका को बिना रिसर्च के दायर किया गया बताते हुए खारिज करने की अपील की है. मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस सतीश शर्मा ने सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई शुक्रवार को तय की. साथ ही अन्य पक्षकारों को मामले में जवाब पेश करने को भी कहा है. यह आदेश प्रियास यादव की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिये है. 

आदमखोर का कलंक झेल रहा बाघ T-24, वन्यजीव प्रेमियों ने उठाई रिहाई की मांग

क्या है इस जनहित याचिका में: 
गौरतलब है कि प्रिया यादव की ओर से अधिवक्ता माही यादव ने जनहित याचिका दायर कर राज्य में कोरोना के चलते बदली परिस्थितयों में 2—2 नगर निगम बनाने के फैसले को रद्द करने गुहार लगायी है. याचिका में कहा गया कि कोरोना के चलते देश व राज्य के आर्थिक व वित्तीय हालात सही नहीं हैं. जयपुर, जोधपुर व कोटा में दो-दो नगर निगम बनाए जाने से प्रदेश पर 1000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा का भार पड़ेगा.  केवल जयपुर नगर निगम को ही दो हिस्सों में बांटने पर करीबन 518 करोड़ रुपए का आर्थिक भार आता है. जयपुर नगर निगम में दो निगम बनने से कुल वार्षिक बजट 204649 लाख रुपए होगा जबकि एक निगम पर 152848 लाख रुपए खर्चा आता है. दो नगर निगम बनने से जयपुर में ही सरकार पर 51801 लाख रुपए का अतिरिक्त भार आएगा. इसलिए सरकार जयपुर, जोधपुर व कोटा में दो-दो नगर निगम बनाए जाने की नोटिफिकेशन को वापस ले.

और पढ़ें