राज बदलते ही 'सियासी' नियुक्तियों की सियासत, साधे जाएंगे जातीय-क्षेत्रीय समीकरण

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/23 04:03

जयपुर (योगेश शर्मा)। कांग्रेस राज के आगाज के साथ ही राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चर्चा का दौर शुरु हो गया। कांग्रेस राज में कई दिग्गज ऐसे है जिन्हें बोर्ड और आयोग में अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की गहलोत सरकार इस दिशा में बड़ी पहल कर सकती है। 3 साल बाद की परिपाटी को तोड़कर गहलोत सरकार की कोशिश रहेगी अगले तीन महिने में बोर्ड और आयोग में प्रभावी नियुक्तियां कर दी जाये। लोकसभा चुनाव का रण जीतने के लिये जातीय-क्षेत्रीय समीकरणों को सियासी नियुक्तियों के जरिये साधने की कोशिश गहलोत की सरकार करेगी। बोर्ड और आयोग अध्यक्षों की घोषणा में डिप्टी सीएम सचिन पायलट की राय अहम होगी। मलमास के बाद कुछ अच्छी खबर कांग्रेसजनों के लिये सामने आ सकती है। इस परिपेक्ष्य में कांग्रेस नेताओं ने लॉबिंग भी शुरु कर दी है। खास रिपोर्ट-

राज बदलने के साथ ही सियासी नियुक्तिों को लेकर भी बदलाव का दौर शुरु होने के संकेत मिलने लगे है। जयपुर से लेकर यूआईटी में सियासी नियुक्तियां होनी है। हजारों की संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों के जरिये साधा जायेगा जिससे वो लोकसभा चुनावों से पहले रणनीतिक तौर पर उन्हें साधा जा सके। राज्य की कांग्रेस में कई दिग्गज ऐसे है जिन्हें राजनीतिक तौर पर कांग्रेस सरकार में स्थापित करना बेहद आवश्यक हो गया है। रामेश्वर डूडी, गिरिजा व्यास, रघुवीर मीना, मांगी लाल गरासिया जैसे दिग्गज चुनाव नहीं जीत पाये लिहाजा इन्हें एड़जस्ट किया जायेगा। 

वहीं सुमित्रा सिंह, सुभाष महरिया, डॉ चंद्रभान जैसे दिग्गजों को चुनावी समर में नहीं उतारा था लिहाजा उन्हें प्राइम पोस्ट पर लाया जा सकता है। किसान आयोग, हाउसिंग बोर्ड, आर टी डी सी, बीज निगम, एससी आयोग, एस टी आयोग, महिला आयोग, हज हाउस, वक्फ बोर्ड, देवनारायण बोर्ड, खादी आयोग, देवस्थान बोर्ड, खादी बोर्ड, अधिनस्थ सेवा चयन बोर्ड, सिंधी अकादमी, केशकला बोर्ड, हिन्दी अकादमी, बाल आयोग, यूथ बोर्ड, क्रीडा परिषद, परशुराम बोर्ड, माटी कला बोर्ड  समेत विभिन्न यू आ टी में नियुक्तियां होनी है।

सियासी नियुक्तियों की कतार में कांग्रेस के दिग्गज

--रामेश्वर डूडी
--प्रधुम्न सिंह
--गिरिजा व्यास
--सुमित्रा सिंह
--डॉ चंद्रभान
-- डॉ सहदेव चौधरी
--राजीव अरोड़ा
--नारायण सिंह
-रघुवीर मीना  
--दुरु मियां
--अश्क अली टाक
--राजेन्द्र चौधरी
--सईद सऊदी
--पुखराज पाराशर
--रणदीप धनखड़
--धर्मेन्द्र राठौड़
--करण सिंह उचियाड़ा
--बद्री जाखड़
--रेहाना रियाज
--प्रो नरेश दाधीच
--महेश शर्मा 
--राजेश चौधरी
--मुमताज मसीह
--ज्योति खंडेलवाल
--अर्चना शर्मा
--सत्येंद्र सिंह राघव
--सुशील शर्मा
--खानू खां बुधवाली
--श्रवण कुमार
--भगवान सहाय सैनी
--रुक्षमणी सिंह
--सईद अंसारी
--बृजेन्द्र सिंह सूपा
--दिनेश खोडनिया
--रघुवीर मीना
--रतन देवासी
--पवन गोदारा
--सीताराम लाम्बा
--चयनिका उनियाल
--अमित पूनिया
--नसीम अख्तर इंसाफ
--घनश्याम मेहर
--मकबूल मंडेलिया
--रामेश्वर दाधीच
--राजेन्द्र सिंह सोलंकी
--सलावत खान
--सुरेश चौधरी
--सुरेन्द्र जाड़ावत
--प्रकाश चौधरी
--लियाकत अली खान
--शंकर यादव
--करण सिंह राठौड़
--पंकज मेहता
--हरिमोहन शर्मा
--ब्रह्मदेव कुमावत
--श्रीगोपाल बाहेती
--ललित भाटी
--रामचंद्र चौधरी
--कैलाश चंद मीना
--शिवचरण माली
--अलाउद्दीन आजाद
--एस एन सिंह,पूर्व आईएएस
--सुनील पारवानी
--शोभा डूडी
--वीरेन्द्र वैष्णव
--आर सी शाह
--डॉ ईश मुंजाल
--कृष्ण मुरारी गंगावत
--विजेन्द्र सिंह इंद्रपुरा
--धीरज गुर्जर
--रविन्द्र त्यागी
--सुनीता भाटी

भंवर जितेन्द्र सिंह, मानवेन्द्र सिंह, सुभाष महरिया, बद्री जाखड़, श्रवण कुमार, रामेश्वर दाधीच जैसे कुछ प्रमुख नेता है जिन्हें पार्टी लोकसभा का चुनाव लड़ा सकती है। युवा और महिला चेहरों को आगे रखने की कवायद सियासी नियुक्तियों में देखने को मिलेगी। जिसने पांच सालों तक पार्टी के लिये मेहनत की उसे सियासी नियुक्तियों में तरजीह दी जायेगी। पिछले गहलोत राज में कांग्रेस के कई दिग्गज ऐसे रहे जिन्हें 1 साल से भी कम वक्त बोर्ड और आयोग अध्यक्ष पद पर मिला। लिहाजा इस बार कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि समय रहते सियासी नियुक्तियों की घोषणा होनी चाहिये, जिसका लाभ राजनीतिक तौर पर कांग्रेस पार्टी को मिलना चाहिये, छह माह बाद लोकसभा चुनावों होने है ऐसे में सामाजिक और क्षेत्रीय नियुक्तियों से सियासी लाभ की उम्मीद कांग्रेस के थिंक टैंक कर सकते है।

...दिनेश डांगी के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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