2018 स्पेशल: राजस्थान की VVIP सीटों पर कई दिग्गजों का राजनीतिक करियर लगा दांव पर

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/25 02:59

जयपुर। इस साल का अंत राजस्थान की राजनीति के लिहाज के काफी महत्वपूर्ण रहा है। सरकार बदलने के साथ ही कुछ दिग्गज नेताओं को चुनावों में करारी शिकस्त देखने को मिली तो कुछ ने नया इतिहास रचा है। वसुंधरा राजे सरकार में कद्दावर रहे कई मंत्री विधानसभा चुनाव हार गए तो वही कांग्रेस की लहर होने के बाद भी कुछ सीटों पर काफी रोचक मुकाबला देखने को मिला। राजस्थान की कुछ वीवीआईपी सीटें ही राजस्थान का भविष्य तय करती हैं। आइये जानते है राजस्थान की उन सीटों के बारें जहां इस बार के चुनावों में कई दिग्गजों को मात खानी पड़ी है। 

झालरापाटन- राजस्थान VVIP सीटों में सबसे पहले आती है झालरापाटन सीट जहां से राजस्थान की मुख्यमंत्री बीजेपी से वसुंधरा राजे का सामना बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए मानवेंद्र सिंह से था। मानवेंद्र सिंह के भी राजस्थान में लोकप्रिय होने के चलते यह सीट काफी रोचक मानी जा रही थी लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 34,980 मतों से मानवेंद्र सिंह को करारी शिकस्त दी। 

टोंक- कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट टोंक सीट से राजस्थान के चुनावी दंगल में थे । पायलट का यहां पर बीजपी में नंबर दो कहे जाने वाले मंत्री यूनुस खान से था। ऐसे में यह सीट भी काफी दिलचस्प बन गई थी। लेकिन यहां पर वसुंधरा राजे के करीबी माने जाने वाले यूनुस खान 54,179 मतों से चुनाव हार गए। 

सांगानेर- बीजेपी नेता घनश्याम तिवाड़ी के यहां से चुनाव लड़ने के कारण यह सीट पहले काफी रोचक सीटों में से एक बन गई थी, हालांकि चुनाव परिणाम में ऐसा कुछ भी देखने को नही मिला। तिवाड़ी के चुनाव हारने के साथ ही उनकी जमानत भी जब्त हो गई और बीजेपी के अशोक लाहोटी ने यहां से बाजी मार ली।

नोखा- नोखा (GEN) विधानसभा सीट राजस्थान के बीकानेर जिले की एक सीट है। यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी को बीजेपी के बिहारी लाल विश्नोई ने कारारी शिकस्त दी । इससे पहले डूडी कांग्रेस के प्रमुख सीएम दावेदारों में से एक थे।

सपोटरा- सपोटरा विधानसभा से कांग्रेस के दिग्गज नेता रमेश मीणा के सामने बीजेपी के राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी गोलमा देवी के चुनाव लड़ने से यह सीट भी काफी रोचक हो गई थी। किरोड़ी लाल मीणा और रमेश मीणा को एक दुसरे का कड़ा प्रतिद्वंदी माना जाता है। लेकिन यहां से रमेश मीणा लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर किरोड़ी मीणा के राजनैतिक करियर को कड़ी चुनौती दी है। 


 

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