कानूनी दायरों में उलझा श्रीलंका में चल रहा राजनीतिक गतिरोध

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/10 06:58

कोलंबो। श्रीलंका में सत्ता से हटाए गए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के नेतृत्‍व वाली पार्टी - यूनाइटेड नेशनल फ्रंट (यूएनएफ) ने संसद को भंग करने के राष्‍ट्रपति के फैसले को सर्वोच्‍च न्‍यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है। संसदीय दल की आज सवेरे हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। हालांकि यूएनएफ और कुछ छोटे राजनीतिक दलों ने इस फैसले को अनुचित, असंवैधानिक और अस्‍वीकार्य बताया है। 

बहरहाल श्रीलंका में दो हफ्तों से चल रहा राजनीतिक गतिरोध अब कानूनी और संवैधानिक दायरों में फैलता दिख रहा है। विक्रमसिंघे की सरकार ने संविधान में 19वें संशोधन के द्वारा राष्‍ट्रपति की शक्तियों को कम करने की कोशिश की थी, जिसमें प्रधानमंत्री को बर्खास्‍त करने और संसद में भंग करने के प्रावधान थे, लेकिन राष्‍ट्रपति सिरिसेना ने संविधान की अन्‍य धाराओं का उल्‍लेख कर इस संशोधन की अनदेखी की है। 

ऐसे में उच्‍चतम न्‍यायालय क्‍या निर्णय लेगा, वो श्रीलंका के भविष्‍य की दशा और दिशा तय करेंगे। हालांकि नई सरकार का मानना है कि अंतिम निर्णय जनता के हाथों में होता है। इसे चुनाव द्वारा ही तय किया जा सकता है।

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