बंगाल का सियासी घमासान: 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा करने वाली BJP में अब अंदर ही अंदर बगावत के सुर

बंगाल का सियासी घमासान: 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा करने वाली BJP में अब अंदर ही अंदर बगावत के सुर

बंगाल का सियासी घमासान: 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा करने वाली BJP में अब अंदर ही अंदर बगावत के सुर

कोलकाता: बंगाल में इन दिनों सियासी घमासान (Bengal Political heat) चला हुआ है. हर पार्टी फिर वो चाहे TMC, BJP, CPM, CONGRESS हो या फिर कोई अन्य. सभी अपनी अपनी सरकार बनने का दावा करते नजर आ रहे है. वही पर अब BJP में बगावती सुर देखने को मिल रहे है. इसी कारण गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेशाध्यक्ष को दिल्ली बुलाया है. सूत्रों की मानें तो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो सौ सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा में पार्टी के भीतर ही बगावत शुरू हो गई है. कैंडीडेट्स की दूसरी सूची जारी होने के बाद कोलकाता समेत पूरे प्रदेश में पार्टी के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. बड़े नेताओं को घेर रहे हैं. कई जगह पत्थरबाजी और चप्पल फेंकने जैसी घटनाएं भी हुईं.

हेस्टिंग स्थित कार्यालय के सामने कार्यकर्ताओं ने किया था प्रदर्शन:
विरोध को काबू में करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार रात अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष और अन्य नेताओं के साथ बैठक की थी. लेकिन मंगलवार को भी भाजपा के हेस्टिंग स्थित कार्यालय के सामने कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने दिलीप घोष, मुकुल रॉय सहित अन्य नेताओं को मंगलवार रात दिल्ली बुला लिया.

स्वपन दासगुप्ता को राज्यसभा से देना पड़ा इस्तीफा:
भाजपा ने रविवार को बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे और चौथे चरण के लिए कैंडीडेट्स के नाम घोषित किए थे. तीसरे चरण के लिए 27 और चौथे चरण के लिए 38 कैंडीडेट्स अनाउंस किए थे. इसमें केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो सहित तीन मौजूदा सांसदों लॉकेट चटर्जी, स्वपन दासगुप्ता और निशिथ प्रमाणिक को मैदान में उतारा गया है. सांसदों और मंत्रियों को टिकट देने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि जो पार्टी 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही है. उसे अपने मौजूदा सांसदों और केंद्रीय मंत्री को चुनाव में उतारना पड़ रहा है. इन सबके बीच स्वपन दासगुप्ता को राज्यसभा से इस्तीफा देना पड़ा. क्योंकि तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने उनकी उम्मीदवारी पर तकनीकी सवाल खड़े किए थे. सांसदों और मंत्रियों को टिकट मिलने के चलते जिन नेताओं को साइडलाइन किया गया है. वे भी कार्यकर्ताओं के साथ खुलकर विरोध पर उतर आए हैं.

मंत्री का घेराव किया, सुसाइड की कोशिश हुई:
रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेशभर में अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया. हुगली जिले सहित कोलकाता के हेस्टिंग स्थित भाजपा कार्यालय में जमकर हंगामा किया गया. कार्यकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाए कि TMC से आने वाले 89 साल के रबींद्रनाथ भट्टाचार्य जैसे दलबदलू नेताओं को टिकट दे दिया गया और जो कार्यकर्ता भाजपा के लिए खून-पसीना बहा रहे हैं. उन्हें दरकिनार कर दिया गया. भट्टाचार्य को टिकट देने के विरोध में पार्टी के स्थानीय नेता संजय पांडे ने अपने समर्थकों के साथ विरोध किया. उन्होंने मप्र के स्वास्थ्य मंत्री का घेराव भी कर लिया था और उन्हें कई बातें सुनाईं. वहीं हुगली जिले के ही निरूपम भट्टाचार्य ने रेलवे ट्रैक पर सुसाइड की कोशिश की. हालांकि बाद में उन्हें किसी तरह मना लिया गया.

दलबदलु नेताओं को टिकट दिए जाने के आरोप:
भाजपा अभी तक एक दर्जन दलबदलुओं को टिकट दे चुकी है. इसमें TMC, CPM और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा से आए नेता शामिल हैं. तृणमूल कांग्रेस छोड़कर जो नेता भाजपा में शामिल हुए हैं. उनमें से कई को पार्टी ने Y, X और Z कैटेगरी की सुरक्षा भी मुहैया करवाई है. इसमें नंदीग्राम से ममता के खिलाफ चुनाव लड़ रहे शुभेंदु अधिकारी, खड़गपुर सदर सीट से उम्मीदवार बनाए गए हिरणमय चटर्जी, TMC से आए अशोक डिंडा, वनश्री माइती, वैशाली डालमिया जैसे नाम शामिल हैं.

सांसदों और मंत्रियों को टिकट देना पार्टी की पॉलिटिकल स्ट्रैटजी:
इस मामले में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य का कहना है कि पूरे बंगाल की जनता को ये पता चल चुका है कि हम चुनाव जीत रहे हैं. इसलिए समाज के हर वर्ग के लोग हमसे जुड़ रहे हैं. इसी कारण टिकट के लिए भी एप्लीकेशन बहुत ज्यादा आ गए. तो कुछ विरोध हो रहा है लेकिन हम इसे एक-दो दिन में ठीक कर लेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा जैसी पार्टी में ऐसा होना दुर्भाग्यपूर्ण है. बोले सांसदों और मंत्रियों को टिकट देना पार्टी की पॉलिटिकल स्ट्रैटजी है. प्रदेश अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को दिल्ली बुलाए जाने पर भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें किसी दूसरे काम से दिल्ली बुलाया गया है. टिकट का मामला नहीं है.

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