मंत्रिपरिषद के गठन में सोशल इंजीनियरिंग का राजनीतिक विज्ञान

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/24 09:31

जयपुर (योगेश शर्मा)। मंत्रिपरिषद के गठन में सोशल इंजीनियरिंग का राजनीतिक विज्ञान भी देखने को मिलता है। आमतौर पर बीजेपी राज की मंत्रीपरिषद में सामान्य वर्ग को महत्व मिलता है लेकिन इस बार कांग्रेस का मंत्रिपरिषद भी बराबरी की टक्कर देता नजर आया है। किसान कौम से ताल्लुक रखने वाले जाट वर्ग का प्रभाव दोनों ही राज में देखने को मिला है। राजे सरकार की कैबिनेट में राजपूत वर्ग प्रभावी दिखाई दिया तो वहीं गहलोत मंत्रिपरिषद की कैबिनेट में दो ब्राह्मण चेहरे लिये गये। एससी और एसटी को दोनों ही राज में साधा गया। हालांकि मौजूदा गहलोत मंत्रिपरिषद में प्रभावी प्रतिनिधित्व मिला है। अचरज है लेकिन यह सच है कि मुस्लिम प्रतिनिधित्व में गहलोत और राजे मंत्रिपरिषद अभी तक बराबर नजर आई। खास बात यह है कि गुर्जर नेतृत्व को डिप्टी सीएम पद दिया गया है।  खास रिपोर्ट-

जातीय गणित से लबरेज रहती है राजस्थान की राजनीति, फिर इससे कैसे अछूती रह सकती है मंत्रीपरिषद। लिहाजा मंत्रिपरिषद के गठन में सामाजिक विज्ञान, यूं कहे सोशल इंजीनियरिंग का भी पूरा तड़का लगता है। क्षेत्र से अधिक समाजों को साधा जाता है। राजस्थान में बड़े वर्गो में शुमार है जाट और राजपूत। पिछली राजे सरकार की बात करे तो कैबिनेट के चेहरे के रुप में 3 राजपूत क्षत्रप थे। वहीं मौजूदा गहलोत मंत्रीपरिषद में 1 राजपूत ही काबिना का हिस्सा है। वहीं गहलोत कैबिनेट में 3जाट शुमार है। 

सोशल इंजीनियरिंग का गणित बताते है, हालांकि गहलोत मंत्रिपरिषद का विस्तार होना अभी शेष है 7और मंत्री बनाये जाएंगे। 

गहलोत कैबिनेट
—जाट वर्ग से 3 
—राजपूत वर्ग से 1
—ब्राह्मण वर्ग से 2
—एसटी वर्ग से 2
—जैन वर्ग से 2
—कलबी वर्ग से 1
—गुर्जर वर्ग से 1
—माली वर्ग से 1
—मुस्लिम वर्ग से 1

स्वतंत्र प्रभार के मंत्रियों की बात करे तो जाट वर्ग से 1
—एसटी वर्ग से 1 (आदिवासी अंचल)
—एससी वर्ग से 1 को लिया गया 

राजे कैबिनेट 2013-2018
—जाट वर्ग से 2
—राजपूत वर्ग से 3
—एससी वर्ग से 1
—एसटी वर्ग से 1
—वैश्य वर्ग से 2
—ब्राह्मण वर्ग से 2
—माली वर्ग से 1
—मुस्लिम वर्ग से 1
—कुम्हार वर्ग से 1
—-सिंधी वर्ग से 1
—गुर्जर वर्ग से 1
—यादव वर्ग से 1

तुलनात्मक गौर करे तो एससी और एसटी को व्यापक प्रतिनिधित्व गहलोत की कैबिनेट में मिला है। मास्टर भंवर लाल मेघवाल दलित फेस है तो वहीं परसादी लाल मीना और रमेश मीना एसटी वर्ग से लिये गये। वहीं 2 ब्राह्मण विधायक डॉ बीडी कल्ला और डॉ रघु शर्मा कैबिनेट का हिस्सा है और दोनों को ही कैबिनेट बनाया गया है। जबकि वसुंधरा राजे मंत्रिपरिषद में अरुण चतुर्वेदी ही कैबिनेट मंत्री थे। गहलोत मंत्रिपरिषद में मुस्लिम वर्ग को अधिक प्रतिनिधित्व की उम्मीद थी, कांग्रेस पार्टी से रहती भी है। इसके बावजूद एकमात्र साले मोहम्मद को कैबिनेट में स्थान मिल पाया। राजे कैबिनेट के दौरान यूनूस खान मुस्लिम फेस थे। राजपूत वर्ग को राजे कैबिनेट में व्यापक स्थान मिला था राजेन्द्र राठौड़, राजपाल सिंह शेखावत और गजेन्द्र सिंह खींवसर काबिना में शुमार थे। दूसरी गहलोत मंत्रिपरिषद में अभी तक प्रताप सिंह खाचरियावास ही राजपूत फेस के तौर पर कैबिनेट में है। गुर्जर वर्ग से दो चेहरे गहलोत मंत्रिपरिषद में लेकिन खास बात यह है कि सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा दायित्व सौंपा गया है। पहली बार कोई गुर्जर नेता उप मुख्यमंत्री बना है। माली फेस खुद अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री के तौर पर सर्वेसर्वा है। सामाजिक गणित को सियासत में साइंस की तरह माना जाता है जो दल इसको साध लेता है वहीं सत्ता को प्राप्त करता है और राज भी करता है।

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