VIDEO: प्रदूषण नियंत्रण मंडल 'सख्त', SMS अस्पताल 'बेपरवाह'

Vikas Sharma Published Date 2019/04/11 11:32

जयपुर। मेडिकल बायोवेस्ट निस्तारण के प्रति राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सख्ती ने भले ही सरकारी और निजी अस्पतालों में खलबली मचा दी हो, लेकिन सूबे के सबसे बड़ा एसएमएस अस्पताल की लापरवाही के चलते लोगों को "संक्रमण रूपी" बीमारी बंट रही है। अस्पताल में मुर्दाघर के पास स्थित मेडिकल कचरे के लिए जो जगह बनाई है, ठीक उसी के पास स्थित जगह को नगर निगम ने कचरा डिपो बना रखा है। इतना ही नहीं मेडिकल वेस्ट के अलग-अलग निस्तारण के नियम भी हवा हवाई साबित हो रहे है। 

राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के ताजा फरमान में साफ निर्देश दिए गए है कि अस्पतालों में कचरे को निर्धारित प्रावधान के हिसाब से अलग-अलग रंग की थैलियों में एकत्र किया जाए, लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में मरीज व उनके साथ आने वाले लोगों का संक्रमण मुक्त रखने के प्रति अस्पताल प्रशासन जरा भी गंभीर नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने कहने को तो मोर्चरी के पास बायोमेडिकल वेस्ट संग्रहण केन्द्र बना रखा है, लेकिन सच्चाई ये है कि नगर निगम प्रशासन ने इसके ठीक बाहर की जगह को अघोषित कचरा डिपो बना रखा है। फर्स्ट इंडिया की टीम ने जब कचरा संग्रहण केन्द्र का दौरा किया तो पाया कि अस्पताल से अलग-अलग थैलियों में कचरा एकत्र तो किया जा रहा है, लेकिन केन्द्र पर आने के बाद उसके अलग-अलग संधारण के प्रति जरा भी गंभीरता नहीं बरती जा रही है। इस मामले में सख्ती के बजाय अस्पताल प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। 

----(राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल का ताजा फरमान और सख्ती)------
- बायोमेडिकल वेस्ट के सही निस्तारण नहीं करने से नाराज पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड 
- कई अस्पताल आज भी बगैर प्राधिकार पत्र और सम्मति के हो रहे संचालित 
- ऐसे में सभी 6323 अस्पतालों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस, समय सीमा आज समाप्त 
- नोटिस से अस्पताल प्रबन्धकों में मची खलबली, प्रदूषण नियंत्रण मंडल में जमे अस्पताल प्रबन्धन के प्रतिनिधि 
- ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण मंडल में लगाया गया दो दिन का विशेष शिविर, अब होगी सख्ती  

------किस रंग की थैली में कौन का बायोमेडिकल वेस्ट----- 
- इमरजेंसी, प्रयोगशाला, इंजेक्शन रूम, वार्ड आदि जगह पांच तरह के बैग रखने का है प्रावधान 
- हरे बैग में साधारण कचरा, पीले बैग में संक्रमित जैविक कचरा, खून, पट्टियां, कटे अंग, रूई, प्लास्टर 
- नीले बैग में नुकीले पदार्थ एवं धातु निडिल, ब्लेड, टूटी हुई सिरिंज, वायल,कांच का सामान 
- लाल बैग में आईवी सैट, बीटी सैट, खून की थैली, केनुला, प्लास्टिक सिरिंज 
- काले बैग में रासायनिक कचरा अवधि पार दवाइयां जहरीले रसायन 

नियमानुसार बायोमेडिकल और इंडस्ट्रियल कचरे को शहरी कचरे में नहीं मिलाना चाहिए, लेकिन एसएमएस अस्पताल में इससे उलट काम हो रहा है। यहां अस्पताल के बाहर एक तरफ जहां कचरा डम्पिंग पाइंट बनाया हुआ है। वहीं दूसरी ओर अन्दर अस्पताल के कचरा संग्रहण केन्द्र से भी कचरा बाहर लाकर वाहनों में भरा जाता है। अस्पताल प्रशासन भले ही इस मामले में आंखेमूंदे बैठ हो, लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल इस पूरे मामले को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहा है। इसका उदाहरण इस बात से लगाया जा सकता है कि चार दिन पहले भीलवाड़ा के एक निजी अस्पताल का प्राधिकारपत्र इसलिए रद्द कर दिया गया,क्योंकि वहां बायोमेडिकल वेस्ट व लिक्विड बाहर खुले में डाला जा रहा था। 

आमजन की सेहत से जुड़े इस मामले में राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सख्ती स्वागत योग्य है, लेकिन ये सख्ती तभी रंग दिखा पाएगी जब निजी और सरकारी अस्पतालों पर एकसमान सख्ती बरती जाए। फिर चाहे वो प्रदेश का सबसे बड़ा एसएमएस अस्पताल और नगर निगम प्रशासन ही क्यों न हो। अगर ऐसा हुआ, तो ये न सिर्फ सभी अस्पतालों के लिए नजीर बनेगा, बल्कि "मौत" रूपी बायोमेडिकल वेस्ट के खतरे से भी आमजन को बचाया जा सकेगा। 

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