दो जून की रोटी के लिए फरिश्ते की आस में असहाय गरीब परिवार

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/26 02:00

भीनमाल(जालोर)। धानसा गांव मे एक असहाय निर्धन गरीब परिवार है जो दो पल की  रोजी-रोटी के लिए इनदिनों बेहाल है । उस परिवार मे न तो कोई कमाने वाला है और न ही कोई प्रशासन का सहयोग मिल रहा है । आस-पास के ग्रामीण व समाजसेवीओं द्वारा थोडी बहुत सहायता कि जा रही हैं लेकिन वो भी पर्याप्त नही है। ग्रामीणों से बात कर गरीब महिला ने प्रशासन से सहायता की गुहार भी लगाई पर कोई सहयोग नही मिल पाया । 

धानसा गांव मे जैसीया (जेसाराम )मेघवाल के परिवार मे कोई कमाने वाला व्यक्ति नही है परिवार में दो सदस्य ही है जिसमे जैसीया बुज़ुर्ग व हमेशा बीमार रहते है और परिवार के पास बीमारी के ईलाज के लिए भी अब पैसे नही है । जिस कारण इनका इलाज भी नही हो पा रहा है । जैसीया की पत्नी गटुदेवी उनकी सेवा करती है। लेकिन उस को  भी ढलती उम्र मे चलने फिरने मे काफी दिक्कत होती है इनके पत्नी का कहना है कि में मजदूरी जाकर पेट पालती थी, लेकिन अब उम्र के साथ शरीर उनका भी साथ नही देता है। 

पत्नी गटु देवी का कहना है कि घर में खाने के लिए कुछ नही होने के कारण कई बार भूखे पेट सोना पडता है और घर में बिस्तर भी नही है,वही इतनी तेज कड़ाके की ठंड में खुले मे सोना पड़ता है सिर छिपाने के लिए छत भी नसीब नही है पत्नी गटु देवी ने जिला प्रशासन से गुहार लगा रही है। मेरी मदद की जाये वही इनके पत्नी का कहना है कि उन्हें न तो पेंशन आती है और न कोई सरकारी सुविधा। देखा जाए तो इन गरीब परिवारों को सरकारी किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा हैं भले ही सरकार बड़े बड़े दावे कर रही हो । जिन योजनाओं का लाभ गरीबों को मिलने चाहिए उनका मध्य वर्ग के लोग उठा रहे हैं। अब तो बस भगवान के आसरे दिन निकाल रहे है और उम्मीद रखते है कि कोई फरिश्ता बनकर हमारा सहयोग के लिए आगे आए तो जिंदा रह पायेंगे।

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