जयपुर Pradosh Vrat 2022 Dates: अच्छा स्वास्थ्य और आयु वृद्धि के लिए करें प्रदोष व्रत, यहां देखिए पूरी लिस्ट

Pradosh Vrat 2022 Dates: अच्छा स्वास्थ्य और आयु वृद्धि के लिए करें प्रदोष व्रत, यहां देखिए पूरी लिस्ट

Pradosh Vrat 2022 Dates: अच्छा स्वास्थ्य और आयु वृद्धि के लिए करें प्रदोष व्रत, यहां देखिए पूरी लिस्ट

जयपुर: हर माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत होता है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के साथ उनके परिवार की पूजा की जाती है. प्रदोष व्रत के दिन शिव चालीसा, शिव पुराण और शिव मंत्रों का जाप करना शुभ होता है. साल 2022 में कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ेंगे. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत की काफी महिमा मानी गई है. ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि नए साल में पहला प्रदोष व्रत 15 जनवरी और साल का आखिरी प्रदोष व्रत 21 दिसंबर को पड़ेगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो जातक पूरी श्रद्धा के साथ प्रदोष व्रत करते हैं उनके जीवन में यश, धन, वैभव और सुख, शांति बनी रहती है और भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है. पंचांग के अनुसार, वर्ष के प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से व्रती के सभी संकटों से मुक्ति मिलती है. साथ ही घर में सुख और समृद्धि आती है. 

प्रदोष व्रत से मिलने वाले फल:
ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि अलग- अलग दिन के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ प्राप्त होते है. रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत से आयु वृद्धि तथा अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है. सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने पर किया जाने वाला व्रत आरोग्य प्रदान करता है और इंसान की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है. मंगलवार के दिन त्रयोदशी का प्रदोष व्रत हो तो उस दिन के व्रत को करने से रोगों से मुक्ति व स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है. बुधवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो, उपासक की सभी कामनाओं की पूर्ति होती है. गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़े तो इस दिन के व्रत के फल से शत्रुओं का विनाश होता है. शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए किया जाता है. संतान प्राप्ति की कामना हो तो शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत करना चाहिए. अपने उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए जब प्रदोष व्रत किए जाते हैं तो व्रत से मिलने वाले फलों में वृ्द्धि होती है.

प्रदोष व्रत 2022:- 
पौष, शुक्ल त्रयोदशी शनिवार 15 जनवरी प्रदोष व्रत
माघ, कृष्ण त्रयोदशी रविवार 30 जनवरी प्रदोष व्रत
माघ, शुक्ल त्रयोदशी सोमवार 14 फरवरी प्रदोष व्रत
फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी सोमवार 28 फरवरी प्रदोष व्रत
फाल्गुन, शुक्ल त्रयोदशी मंगलवार 15 मार्च प्रदोष व्रत
चैत्र, कृष्ण त्रयोदशी मंगलवार 29 मार्च प्रदोष व्रत
चैत्र, शुक्ल त्रयोदशी बृहस्पतिवार 14 अप्रैल प्रदोष व्रत
वैशाख, कृष्ण त्रयोदशी बृहस्पतिवार 28 अप्रैल प्रदोष व्रत
वैशाख, शुक्ल त्रयोदशी शुक्रवार 13 मई प्रदोष व्रत
ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी शुक्रवार 27 मई प्रदोष व्रत
ज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी रविवार 12 जून प्रदोष व्रत
आषाढ़, कृष्ण त्रयोदशी रविवार 26 जून प्रदोष व्रत
आषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी सोमवार 11 जुलाई प्रदोष व्रत
श्रावण, कृष्ण त्रयोदशी सोमवार 25 जुलाई प्रदोष व्रत
श्रावण, शुक्ल त्रयोदशी मंगलवार 9 अगस्त प्रदोष व्रत
भाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी बुधवार 24 अगस्त प्रदोष व्रत
भाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी गुरुवार 8 सितंबर प्रदोष व्रत
आश्विन, कृष्ण त्रयोदशी शुक्रवार 23 सितंबर प्रदोष व्रत
आश्विन, शुक्ल त्रयोदशी शुक्रवार 7 अक्टूबर प्रदोष व्रत
कार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी शनिवार 22 अक्टूबर प्रदोष व्रत
कार्तिक, शुक्ल त्रयोदशी शनिवार 5 नवम्बर प्रदोष व्रत
मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी सोमवार 21 नवम्बर प्रदोष व्रत
मार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी सोमवार 5 दिसंबर प्रदोष व्रत
मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी बुधवार 21 दिसंबर प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत की विधि:
कुण्डली विश्ल़ेषक डा.अनीष व्यास ने बताया कि प्रदोष व्रत करने के लिए मनुष्य को त्रयोदशी के दिन प्रात: सूर्य उदय से पूर्व उठना चाहिए. नित्यकर्मों से निवृत होकर, भगवान श्री भोले नाथ का स्मरण करें. इस व्रत में आहार नहीं लिया जाता है. पूरे दिन उपावस रखने के बाद सूर्यास्त से एक घंटा पहले, स्नान आदि कर श्वेत वस्त्र धारण किए जाते हैं.पूजन स्थल को गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करने के बाद, गाय के गोबर से लीपकर, मंडप तैयार किया जाता है. अब इस मंडप में पांच रंगों का उपयोग करते हुए रंगोली बनाई जाती है. प्रदोष व्रत कि आराधना करने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है. इस प्रकार पूजन की तैयारियां करके उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर का पूजन करना चाहिए. पूजन में भगवान शिव के मंत्र 'ऊँ नम: शिवाय' का जाप करते हुए शिव को जल चढ़ाना चाहिए.

प्रदोष व्रत कथा: 
भविष्यवक्ता डा.अनीष व्यास ने बताया कि एक नगर में तीन मित्र राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र रहते थे. राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे, धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना होना बाकी था. एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे. ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है.’ धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्नी को लाने का फैसला ले लिया. तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं, ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया. ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो नहीं माना. कन्या के माता-पिता को अपनी बेटी की विदाई करनी पड़ी. विदाई के बाद पति-पत्नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई. दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे. कुछ दूर जाने पर डाकू उनका धन लूटकर ले गए. दोनों घर पहुंचे. वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया. उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा. जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी. और कहा कि इसे पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें. धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया. धीरे-धीरे उसकी हालात ठीक हो गई और धन-सपंदा में कोई कमी नहीं रही.

और पढ़ें