जयपुर VIDEO: गुरु पूर्णिमा पर अपने राजनीतिक गुरु शांति धारीवाल से मिले प्रमोद जैन भाया, देखिए ये खास रिपोर्ट 

VIDEO: गुरु पूर्णिमा पर अपने राजनीतिक गुरु शांति धारीवाल से मिले प्रमोद जैन भाया, देखिए ये खास रिपोर्ट 

जयपुर: हाड़ौती की सियासत में दो गुरु-चेले ऐसे भी हैं, जिन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपना अलग मुकाम बनाया है. गहलोत कैबिनेट के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक शांति धारीवाल को खान एवं गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया उन्हें अपना गुरु मानते हैं. सियासत की पाठशाला का यह चेला कल गुरु पूर्णिमा पर जब अपने राजनीतिक गुरु मंत्री शांति धारीवाल के निवास पर गया तो गुरु ने भी बर्बस ही गले से लगाया और पीठ थपथपाई.

गुरु पूर्णिमा पर अपने राजनीतिक गुरु शांति धारीवाल से मिलने के बाद चेले खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने क्या कुछ कहा यह भाया की जुबानी आपको सुनाते हैं:  गुरुपूर्णिमा के हर वार्षिकचक्र पर सबसे पहले जिसे सर्वाधिक करीब पाया, वह मेरे राजनीतिक गुरू नगरीय विकास मंत्री परमआदरणीय श्री शांति धारीवाल जी हैं. आज के चक्र की गुरुपूर्णिमा पर जब स्मरण किया और भाईसाहब धारीवालजी के निजी आवास पर गया, तो मैंने पांवा ढोक की. भाईसाहब धारीवाल जी ने मुझे खींचकर सीने से लगाया और दुलारा, फिर गले लगाकर थपकाया. ईश्वर का आभार, जिसने मुझे गुरु के रूप में आपकी छाया दे दी. आपने मुझे हर पल संभाला. आप अनुशासनप्रिय नेता हैं, लेकिन आपकी ह्र्दयशीलता अकाट्य है. 

कार्यदक्षता में भी आपका कोई सानी नहीं दिखता. आप गलती करने पर कान उमेठ देने में संकोच नहीं करते. हाड़ौती सहित राजस्थान भर को ज्ञात है, की मुझे राजनीति का ककहरा भाईसाहब धारीवालजी ने ही पढ़ाया. आपकी सीखों ने मुझे भीतर से काफी मजबूत किया. एक प्रकार से मेरे जीवन पर यह बड़ा प्रभाव है. राज्य सरकार और कांग्रेस पार्टी की जाजम पर उपस्थित वरिष्ठजनों के बीच आपकी मौजूदगी से भी खुद को बड़ा भाग्यशाली समझता हूं. ख़ुद पर फख्र महसूस करता हूँ, क्योंकि मेरे लिए आप ही वह प्रथम प्राध्यापक बने हैं, जिन्होंने मुझे राजनीति का अक्षरबोध कराया. 

आपकी बेमिसाल तथा अद्वितीय छवि की कल्पवृक्ष सरीखी छाया में रहकर ही मैंने राजनीति का कठिन ककहरा पढ़ा. मेरे हक में जहां आवश्यकता लगी खुद आपने पग - पग पर अमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया और जरूरत महसूस होने पर तल्ख़ी से संवारा भी है. जीवन की कुल जोड़ देखूं, तो मेरे व्यक्तिगत जीवन सृजन में मां - बाऊजी के इतर आपश्री का अतिविशिष्ट योगदान रहा है, जिसके लिए आपके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं. आत्मिक अनुभव यह रहा, कि छोटी से छोटी सूचना पर आप बारां पधारते रहे हैं.मुझे यह भी याद है मानसिक उद्विग्नता की घड़ी में आप मेरे लिए सदैव एक बड़ा सहारा बनकर खड़ा होते रहे. 

अंत में एक बार पुन: गुरु पूर्णिमा की ढोक. प्रार्थना करता हूं कि आपकी ओर से मिलता रहा स्नेह -प्यार हम पर सदा कायम रखें.' दरअसल अपने गुरु शांति धारीवाल से राजनीति का सबक सीखने वाले प्रमोद जैन भाया ने भी बारां झालावाड़ क्षेत्र की राजनीति में अपना अलग मुकाम बनाया है. अब प्रमोद भाई को भी अपने गुरु की तरह हाडोती क्षेत्र में कांग्रेस के एक बड़े चेहरे के तौर पर जाना जाता है. 

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